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CAA: कानपुर में सड़क पर जारी प्रदर्शन, महिलाएं बोलीं, 'पहले गोरों से लड़े, आज की लड़ाई चोरों से&


कानपुर यूपी के कानपुर में पुलिस प्रशासन के एक बार फिर इजाजत देने के बाद नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में प्रदर्शन जारी है। कानपुर के चमनगंज इलाके में महिलाएं मोहम्मद अली पार्क से बाहर निकलकर सड़क पर जमा हो गई हैं। सीएए-एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं महिलाएं 'पहले लड़ाई गोरों से, अब लड़ेंगे चोरों से' जैसे नारे लगा रही हैं। बता दें कि सोमवार को पार्क से जबरन हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी उग्र हो गए। भीड़ के दबाव के चलते पुलिस ने पार्क के अंदर धरना जारी रखने की मौखिक अनुमति दे दी थी। चमनगंज इलाके में प्रदर्शनकारी रात में भी सड़कों पर बैठे रहे। इस दौरान एक महिला ने कहा, 'हिंदू मुस्लिम हम होने नहीं देंगे, सन 47 फिर से होने नहीं देंगे, क्योंकि हम लोग एक बार लड़ चुके हैं, हमारे पूर्वज लड़ चुके हैं। 1947 में हमने लड़ा था गोरों से, अब हम लड़ेंगे चोरों से...।' इससे पहले मोहम्मद अली पार्क में एक महीने से जारी धरने को खत्म करने की कोशिशों के बीच प्रदर्शनकारी सोमवार को उग्र हो गए थे। रविवार आधी रात के बाद सख्ती कर पुलिस ने पार्क खाली कराया था। सुबह तक चले हंगामे के बाद हजारों की तादाद में महिलाएं और बच्चे रोड पर आ गए। सुबह 10 बजे तक भीड़ का दबाव बढ़ गया था और मजबूरन पुलिस-प्रशासन ने महिलाओं को पार्क में फिर धरने की मौखिक अनुमति दे दी। सीएए के खिलाफ मोहम्मद अली पार्क में 7 जनवरी से धरना चल रहा था। कई दिनों की कोशिशों के बाद शनिवार शाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने ऐलान किया था कि धरना खत्म हो गया है, लेकिन कुछ घंटों बाद ही एक गुट से जुड़ी महिलाएं दोबारा पार्क में धरना देने पहुंच गईं थी। दोबारा तनातनी के बीच पुलिस ने दिसंबर में हुए उपद्रव के तीन आरोपियों को रविवार को जेल भेज दिया था। सोमवार/मंगलवार रात करीब 2 बजे पुलिस और अर्धसैनिक बलों के साथ अधिकारी मोहम्मद अली पार्क पहुंचे। काफी देर तक समझाने के बाद महिलाएं हटने को राजी नहीं हुईं तो पुलिस ने बल प्रयोग कर महिलाओं को वहां से हटा दिया। इस दौरान क्षेत्र में भगदड़ जैसे हालात रहे। डीआईजी/एसएसपी अनंत देव के मुताबिक, दोनों शहर काजियों और एक अन्य शख्स की मौजूदगी में बातचीत तय हुई और धरना खत्म करने का ऐलान किया। दूसरे गुट ने सोशल मीडिया के जरिए दोबारा धरने की घोषणा कर दी। भीड़ का कोई नेतृत्व नहीं कर रहा है। आपसी राजनीति के चलते दोबारा समय मांगा गया है। जिस मुद्दे पर धरना था, उसका तो ज्ञापन दिया जा चुका है। उकसाने वालों को नोटिस दिया गया है।