मोहन भागवत की नसीहत- 'आपस में झगड़े से दोनों की हानि'

November 19, 2019

मुंबई
महाराष्ट्र की राजनीति में उठापटक का दौर चल रहा है। तीस साल पुरानी शिवसेना और बीजेपी की दोस्ती टूट चुकी है। विधानसभा चुनाव के नतीजों के तकरीबन एक महीने होने को हैं और सरकार पर सस्पेंस बना हुआ है। इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने इशारों-इशारों में बीजेपी और शिवसेना को नसीहत दी है। भागवत ने कहा कि अपने स्वार्थ को बहुत कम लोग छोड़ते हैं। राज्य में अभी शिवसेना सरकार गठन के लिए एनसीपी और कांग्रेस से बातचीत कर रही है। मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, 'सब जानते हैं कि स्वार्थ बहुत खराब बात है लेकिन अपने स्वार्थ को बहुत कम लोग छोड़ते हैं। देश का उदाहरण लीजिए या व्यक्तियों का। सब मानव जानते हैं कि प्रकृति को नष्ट करने से हम नष्ट हो जाएंगे। पर प्रकृति को नष्ट करने का काम थमा नहीं। सब जानते हैं कि आपस में झगड़ा करने से दोनों की हानि होती है लेकिन आपस में झगड़ा करने की बात अभी तक बंद नहीं हुई।' भागवत के इस बयान को शिवसेना और बीजेपी दोनों के लिए नसीहत के रूप में देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री पद पर अड़े रहते हुए एनडीए को विधानसभा चुनाव में बहुमत मिलने के बावजूद शिवसेना ने बीजेपी का साथ छोड़ दिया। वहीं, बीजेपी की तरफ से भी फिलहाल दोस्ती की कोई कोशिश नहीं दिख रही है। शिवसेना लगातार कह रही है कि मुख्यमंत्री उसी का होगा। महाराष्ट्र में सरकार गठन पर रस्साकशी के बाद शिवसेना ने मोहन भागवत से दखल की अपील की थी। शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे के सलाहकार किशोर तिवारी इस संबंध में एक खत लिखते हुए नितिन गडकरी और भागवत को मध्यस्थता के लिए आगे आने को कहा था। हालांकि गडकरी ने कहा था कि सरकार गठन से संघ का लेना-देना नहीं है। वहीं, फडणवीस के बार-बार फोन करने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने उनसे बात नहीं की थी। इसके बाद शिवसेना कोटे के मंत्री अरविंद सावंत ने एनडीए सरकार से इस्तीफा दे दिया था। सोमवार को एनसीपी चीफ शरद पवार के बयान ने सरकार गठन पर सस्पेंस बढ़ा दिया था। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से 50 मिनट की मीटिंग के बाद पवार ने यह कहकर सस्पेंस और गहरा कर दिया कि हमारे बीच सरकार बनाने पर कोई ही नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मैंने सोनिया गांधी को सिर्फ राज्य के हालात के बारे में ब्रीफिंग दी। शरद पवार ने मीडिया से बात करते हुए यहां तक कहा कि शिवसेना के साथ किसी तरह के कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर भी बात नहीं हुई। यही नहीं उन्होंने शिवसेना को सरकार बनाने पर भरोसा देने की बात पर भी कुछ कहने से इनकार कर दिया। उनकी बात से साफ है कि आने वाले कुछ और दिनों तक महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर माथापच्ची का दौर जारी रह सकता है। यहां तक शिवसेना नेता संजय राउत की ओर से 170 विधायकों के समर्थन को लेकर भी उन्होंने कहा कि इस बारे में उनसे ही पूछें। पवार ने कहा कि यह खबरें थीं कि कांग्रेस और एनसीपी ही मिलकर बात करते हैं। ऐसे में हमने स्वाभिमान पक्ष के राजू शेट्टी, समाजवादी पार्टी और अन्य दलों को भी भरोसे में लेंगे। उन्होंने कहा, 'सोनिया गांधी को प्रदेश की ब्रीफिंग देने का काम किया। इसके अलावा किसी मुद्दे पर हमने बात नहीं की। हालांकि हम इस परिस्थिति पर ध्यान रखेंगे और दोनों पार्टियों के कुछ सीनियर लोगों की राय लेने का प्रयास करेंगे। इसके बाद आगे की राय बनाएंगे।'

 

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