पीएम नरेंद्र मोदी राज्यसभा के 250वीं बैठक को किया संबोधित

November 18, 2019

नई दिल्ली
राज्यसभा के ऐतिहासिक 250वें सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के उच्च सदन को भारत के संघीय ढांचे की आत्मा करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकसभा जहां जमीन से जुड़ी है, वहीं उच्च सदन राज्यसभा दूर तक देख सकती है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान के हवाले से उन्होंने कहा कि राज्यसभा सेकंड हाउस है, सेकंडरी (गौण, महत्वहीन) नहीं और भारत के विकास के लिए इसे सपोर्टिव हाउस बने रहना चाहिए। इस दौरान उन्होंने एनसीपी और बीजू जनता दल (बीजेडी) की इसलिए तारीफ की कि उनके सांसद कभी वेल में नहीं जाते। पीएम मोदी ने कहा कि इन दोनों दलों से हम सभी को सीखने की जरूरत है, बीजेपी को भी। पीएम ने ऐसे वक्त एनसीपी की तारीफ की है जब महाराष्ट्र में सियासी हलचल काफी तेज है और पवार की पार्टी बीजेपी की पूर्व सहयोगी शिवसेना के साथ मिलकर सरकार बनाने की कोशिश में है। पीएम मोदी ने भले ही संसदीय कामकाज को लेकर यह सराहना की है, लेकिन उनकी इस टिप्पणी के दूर तलक मायने निकाले जा रहे हैं। महाराष्ट्र में शिवसेना की ओर से एनसीपी और कांग्रेस के साथ सरकार गठन की कोशिशों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बयान के जरिए बीजेपी ने एनसीपी के साथ दोस्ती के संकेत दिए हैं। इन कयासों को शरद पवार के सरकार गठन को लेकर पूछे गए सवाल पर कोई ठोस जवाब न देने से और बल मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात से पहले शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए बीजेपी और शिवसेना से पूछा जाना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'चेक ऐंड बैलेंस का सिद्धांत राज्यसभा के लिए लागू होता है। जरूरी है कि हम रुकावटों के बजाय संवाद का रास्ता चुनें। दो दलों का जिक्र करना चाहूंगा- एनसीपी और बीजेडी। दोनों दलों ने खुद ही तय किया है कि हम वेल में नहीं जाएंगे। उन्होंने इस नियम को कभी नहीं तोड़ा। हम सभी को इनसे सीखने की जरूरत है। वेल में न जाकर भी लोगों का दिल, विश्वास जीत सकते हैं, यह इन दोनों पार्टियों ने दिखाया है। जब हम विपक्ष में थे तो हम भी यही काम करते थे, इसलिए हमें भी सीखने की जरूरत है।'प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्यसभा समय के हिसाब से खुद को ढालता आया है। उन्होंने कहा, 'समय बदलता गया, परिस्थितिया बदलती गईं और इस सदन ने बदली हुई परिस्थितियों को आत्मसात करते हुए खुद को इसके अनुरूप ढाला। मेरे लिए सौभाग्य का विषय है कि आज इस महत्वपूर्ण मौके का साक्षी बनने का मुझे अवसर मिला था।' उन्होने कहा कि हमारे प्रथम उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने राज्यसभा में कहा था, 'हमारे विचार, हमारा व्यवहार और हमारी सोच ही दो सदनों वाली हमारी संसदीय प्रणाली के औचित्य को साबित करेंगी। संविधान का हिस्सा बनी इस द्विसदनीय व्यवस्था की परीक्षा हमारे कार्यों से होगी।' राज्यसभा की अहमियत बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर निचला सदन जमीन से जुड़ा हुआ है तो दूसरा सदन दूर तक देख सकता है। उन्होंने कहा कि इस सदन ने इतिहास रचे हैं और जरूरत पड़ने पर इतिहास को मोड़ा भी है। प्रधानमंत्री ने कहा, 'इस सदन ने कई ऐतिहासिक पल देखे, इतिहास बनाया भी है, बनते हुए इतिहास को भी देखा है और जरूरत पड़ने पर इतिहास की धारा को मोड़ा भी है।'पीएम मोदी ने कहा, 'अटलजी ने कहा था कि एक नदी का प्रवाह तभी तक अच्छा रहता है जबतक कि उसके किनारे मजबूत रहते हैं। भारत का जो संसदीय प्रवाह है उसका एक किनारा लोकसभा है दूसरा राज्यसभा। जब ये दोनों मजबूत रहेंगे तो संसदीय प्रवाह बना रहेगा। हमें राष्ट्रीय दृष्टिकोण से ओझल नहीं होना है लेकिन हमें इसके साथ क्षेत्रीय हित का संतुलन भी सटीक ढंग से बनाना होगा। यह काम अगर कहीं सबसे अच्छे ढंग से हो सकता है तो इसी सदन में हो सकता है।'

 

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