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केजरीवाल के नाम पर ही लड़ेगी आप, कांग्रेस, बीजेपी ने घेरा

नई दिल्ली 
दिल्ली विधानसभा का चुनाव अगले 6 महीनों के भीतर होना तय है। इसकी तैयारियों को लेकर 3 प्रमुख राजनीतिक दलों आम आदमी पार्टी (आप), बीजेपी और कांग्रेस के नेता सक्रिय हो गए हैं। ‘आप’ ने इस चुनाव को लेकर खास रणनीति बनाई है। यह चुनाव मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के नाम पर लड़ा जाएगा, जबकि लोकसभा चुनाव में पूर्ण राज्य के मुद्दे को फोकस किया गया था। इसकी झलक ‘आप’ मुख्यालय के बाहर भी देखने को मिल रही है। यहां एक बोर्ड लगाया गया है, जिस पर ‘दिल्ली में तो केजरीवाल’ लिखा हुआ है। लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी दफ्तर के बाहर ‘दिल्ली का सम्मान अधूरा, पूर्ण राज्य से होगा पूरा’ बोर्ड लगा था, जो अब भीतर की ओर कर दिया गया है। आप नेता सौरभ भारद्वाज कहते हैं कि दिल्ली में केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं है। यह विरोधी दलों के नेता और जनता भी मानने लगी है। गैर-बीजेपी मुख्यमंत्रियों में अरविंद केजरीवाल का नाम विश्वसनीय रहा है। साढ़े 4 साल के कार्यकाल में तमाम अड़चनों के बावजूद वायदों का बड़ा हिस्सा पूरा हुआ। बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में हुए कार्य महसूस हो रहे हैं। पूर्ण राज्य का मुद्दा दिल्ली से संबंधित नहीं है, यह लोकसभा के जरिए ही संभव हो सकता है। इसलिए पार्टी ने इसे लोकसभा चुनाव का मुद्दा बनाया। वहीं बीजेपी नेता विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सीएम केजरीवाल सिर्फ नौटंकी करते हैं। पूर्ण राज्य का मुद्दा तो ये लोकसभा चुनाव की वोटिंग से पहले ही छोड़ चुके थे। इनके होर्डिंग-पोस्टर बदलने लगे थे। पहले कहा था कि मोदी और बीजेपी को वोट नहीं करना, ये अनधिकृत कॉलोनी तुड़वाकर बिल्डरों को दे रहे हैं। अब जब केंद्र सरकार कॉलोनियों में मालिकाना हक देने जा रही है, तो खुद का श्रेय लेकर मोदी को धन्यवाद कर रहे हैं। कामकाज छोड़कर एलजी हाउस पर धरना देने बैठ गए। अब जनता में यह संदेश चला गया है कि केंद्र और दिल्ली में बीजेपी की सरकार होना जरूरी है। चुनाव से पहले कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष देवेंद्र यादव मानते हैं कि आप के दावों का रिएलिटी चेक होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हर बार नया सपना दिखाते हैं। केजरीवाल के दावों का रिएलिटी चेक करेंगे, तो सचाई सामने आ जाएगी। ‘दिल्ली में तो केजरीवाल’ और ‘5 साल केजरीवाल’ जैसे नारों से अब जनता गुमराह नहीं होगी। अपनी पब्लिसिटी के लिए जनता का पैसा बर्बाद कर रहे हैं। अस्पतालों में इलाज के अभाव में मौतें हो रही हैं। 1000 मोहल्ला क्लीनिक अब तक नहीं बन पाए, जो बने हैं, उनमें गाय लेट रही हैं। 4 स्कूल मॉडल बना दिए हैं, जिसका प्रचार करते हैं। वहीं 350 स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं। सरकारी स्कूलों से 1 लाख बच्चे कम हो गए। 

 

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