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दिल्लीवालों को वोटिंग के प्रति जागरूक करने के लिए 13.5 करोड़ रुपय खर्च किए गए, लेकिन निराशा हाथ लगी


नई दिल्ली अपने वोट के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए दिल्ली की जनता अपने घरों से बाहर निकले, यह सुनिश्चित करने के लिए पिछले कई महीनों में दिल्ली के इलेक्शन ऑफिस ने करोड़ों रुपये खर्च किए। वोटिंग के प्रति जागरूक करने के लिए 13.5 करोड़ रुपय खर्च किए गए, लेकिन निराशा हाथ लगी। कोशिशें रंग नहीं लाईं और 2014 लोकसभा चुनावों के वोटर टर्नआउट के मुकाबले इस बार 5 पर्सेंट कम वोटरों ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। लोगों को जागरूक करने के लिए खर्च किए गए 13.5 करोड़ का बड़ा हिस्सा वोटिंग के दिन से महज 40 दिन पहले से खर्च करना शुरू किया गया। 1 अप्रैल से लेकर 11 मई तक कुल 11 करोड़ रुपये खर्च किए गए, वहीं बाकी रकम पिछले वित्त वर्ष में खर्च की गई। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिल्ली में 65.09 फीसदी वोटिंग हुई थी, जबकि इस बार महज 60.38 फीसदी वोटर बूथ तक पहुंचे। दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी रणबीर सिंह मानते हैं कि इस बार वोटर टर्नआउट नविराशाजनक रहा। उन्होंने कहा, 'हमने मतदाताओं को जागरूक और शिक्षित करने के लिए काफी पैसा, समय और ऊर्जा खर्च की लेकिन सारी मेहनत को वोटों में तब्दील न कर सके।' उन्होंने आगे कहा, 'साल 2014 के लोकसभा चुनाव अप्रैल के महीने में हुए थे जब मौसम थोड़ा बेहतर था। इस बार दिल्ली में पोलिंग के दिन तेज गर्मी थी और छुट्टियां शुरू नहीं हुई थीं। साथ ही, वीकेंड होने की वजह से कुछ लोग शायद शहर से बाहर निकल गए थे।' एक अधिकारी ने बताया कि अंग्रेजी और हिंदी में विज्ञापन देने, होर्डिंग, बैनरों और जिंगल्स के जरिए आउटडोर पब्लिसिटी पर खूब पैसा खर्च किया गया। इसके अलावा, मेट्रो, डीटीसी और क्लस्टर बसों में भी ऐडवर्टाइजिंग की गई। इलेक्शन ऑफिस ने इस काम के लिए ब्रॉडकास्ट इंजिनियरिंग कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड(BECIL) को भी हायर किया था, जिसने दिल्ली में बड़े पैमाने पर दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के फेसबुक और ट्विटर हैंडल को प्रमोट किया। इनके जरिए जागरूकता कार्यक्रमों के बारे में जानकारी शेयर की। इसके अलावा, मुख्य निर्वाचन आधिकारी कार्यालय ने वोटरों को जागरूक करने के लिए बिजली और पानी के बिलों पर भी संदेश छपवाए ताकि लोग वोट जरूर डालें। दिन में कई-की बार रेडियो जिंगल्स बजाए जाते थे। सातों संसदीय क्षेत्रों के रिटर्निंग ऑफिसरों ने भी स्पेशल कार्यक्रम करवाए, जिनमें निजामी भाइयों की कव्वाली, मोहित चौहान की संगीत संध्या, डांस पर्फॉर्मैंस, बाइक रैली, हेरिटेज वॉक आदि शामिल रहे। युवा वोटरों को आकर्षित करने के लिए ऋषभ पंत और कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट मानिक बत्रा को भी लाया गया ताकि लोग जागरूक हो सकें, लेकिन वोटरों पर खास असर नहीं पड़ा। इतनी कोशिशों के बावजूद दिल्ली के 14,317,453 वोटों में से महज 86,43,715 वोट डाले गए। थर्ड जेंडर वोटरों की बात की जाए तो कुल 669 में से महज 178 ने मताधिकार का इस्तेमाल किया।


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