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जेट एयरवेज बंद, लेकिन एक महीने की सैलरी के लिए भटक रहे कर्मचारी


नई दिल्ली जेट एयरवेज का परिचालन भले ही अस्थायी तौर पर बंद हो गया है, लेकिन ऐसा क्यों हुआ इसकी जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं है। एयरलाइन के प्रमोटर और इसके कर्जदाता दोनों ही अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। कंपनी के कर्मचारियों ने महज एक महीने की सैलरी के लिए हर दरवाजे पर दस्तक दी, लेकिन उन्हें अभी तक एक पाई नहीं मिल पाई है। जेट के सीईओ विनय दूबे ने शुक्रवार को कर्मचारियों को लिखे खत में कहा, 'हमने कंपनी के कर्जदाताओं (SBI के नेतृत्व वाले बैंकों) से बार-बार बताया कि सैलरी नहीं मिल पाने के कारण हमारे कर्मचारी भारी संकट में हैं और अगर यह हालत बरकरार रही तो उनके पास दूसरी कंपनी में नौकरी ढूंढने के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। दुर्भाग्यवश, बैंकों ने साफ-साफ कह दिया कि वे एयरलाइन की बोली प्रक्रिया पूरी होने तक सैलरी को लेकर किसी तरह की प्रतिबद्धता जताने में सक्षम नहीं हैं।' उन्होंने कहा, 'एक तरफ तो हमें हमें बोली प्रक्रिया के दौरान जेट एयरवेज के मूल्यों को बरकरार रखने को कहा जा रहा है, जबकि दूसरी तरफ वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। एयरलाइन के लिए बेहद अहम रहे हमारे कुछ साथियों के पास कहीं और नौकरी ढूंढने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। जब हमने अपनी परेशानियों को बैंकों के समक्ष जाहिर किया तो हमसे साफ तौर पर कहा गया कि इस समस्या का समाधान कंपनी के शेयरधारकों को निकालना होगा, जो काफी समय पहले रिजॉल्यूशन प्लान पर सहमति जता सकते थे।' उल्लेखनीय है कि जेट एयरवेज के कर्मचारियों ने बीते 20 अप्रैल को सरकार से एयरलाइन के लिए बोली प्रक्रिया जल्द से जल्द और पारदर्शी तरीके से पूरी करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने कम से कम एक महीने की सैलरी दिलवाने का भी निवेदन किया था। जेट एयरवेज के सीईओ विनय दूबे और सीएफओ अमित अग्रवाल सहित कंपनी के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के आवास पर उनसे मुलाकात की, जिस दौरान उन्होंने उनसे अपील की। करीब एक घंटे तक चली बैठक में विमानन सचिव पी. एस. खरोला भी मौजूद रहे थे।