• संवाददाता

अतीक अहमद को नहीं रखना चाहती हैं जेलें


इलाहाबाद माफिया से नेता बने अतीक अहमद से मिलने के बाद लगभग हर एक आदमी यही कहता है कि उनकी आंख में देखकर बात करना लगभग नामुकिन है। पिछले साल बरेली जेल में अतीक अहमद की सुरक्षा में तैनात रहे एक पुलिसकर्मी ने कहा, 'वे डराती हैं। उनकी आंखें हर समय खून से सनी नजर आती हैं और वह आपको घूरते हैं ताकि आप नीचे देखें।' पांच फीट छह इंच के अतीक अहमद को जब देवरिया जेल से बरेली भेजा गया तो उन पर नजर रखने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए थे। जेल अधीक्षक की ओर से मेसेज भेजा गया और अनुरोध किया गया कि इस अपराधी को कहीं और भेजा जाए। यही नहीं जो लोग जेल की सुरक्षा कर रहे थे, उनकी सुरक्षा के लिए अतिरिक्‍त पुलिस बल को तैनात किया गया। बिजनसमैन मोहित जायसवाल के अपहरण के आरोपों पर अ‍तीक अहमद को बरेली भेजे जाने के बाद भी उनको डॉन के गुर्गे देवरिया जेल ले गए जहां उनकी पिटाई की गई। जायसवाल ने कहा कि उन्‍हें कुछ ऐसे कागजों पर साइन करना पड़ा, जिससे उनकी कुछ कंपनियां अतीक अहमद के नाम हो गईं। यह घटना दिसंबर 2018 में हुई थी। गत 19 अप्रैल को उत्‍तर प्रदेश सरकार ने चुनाव आयोग की अनुमति से अतीक अहमद को नैनी जेल भेजने का आदेश दिया। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अतीक अहमद को गुजरात की जेल भेज दिया गया ताकि वह यूपी में अपना उगाही का धंधा न चला सकें। अतीक जेल में रहें या बाहर दशकों से उनके नाम से लोग खौफ खाते हैं। मूल रूप से देवरिया के रहने वाले अतीक अब 57 साल के हो गए हैं। अपराध जगत में उनकी शुरुआत 1979 में इलाहाबाद में हत्‍या के मामले से हुई थी। उस समय अतीक की उम्र मात्र 17 साल की थी। अगले तीन दशक तक इलाहाबाद, फूलपुर और चित्रकूट में उन्‍होंने एक गिरोह चलाया। प्रयागराज के एसपी (क्राइम) मनोज अवस्‍थी कहते हैं, 'इलाहाबाद के खुल्‍दाबाद पुलिस स्‍टेशन में अतीक हिस्‍ट्री शीटर नंबर 39A हैं।' पुलिस के डोजियर के मुताबिक अतीक के गैंग को 'अंतरराज्‍य गिरोह 227' के रूप में लिस्‍टेड किया गया है जिसमें 121 सदस्‍य शामिल हैं। इनमें अतीक का छोटा भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ शामिल है। इन दोनों कुख्‍यात भाइयों पर 150 मुकदमे दर्ज हैं। अतीक अहमद डॉन से 1989 में नेता हो गए। वर्ष 2004 तक वह छह बार चुनाव जीते। इसमें पांच बार वह इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधायक और एक बार फूलपुर लोकसभा सीट से सांसद रहे। अतीक ने निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी लेकिन बाद में उन्‍होंने समाजवादी पार्टी जॉइन कर ली। इसके बाद वह अपना दल चले गए। वर्ष 2004 के चुनाव में अतीक ने एसपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी लेकिन वर्ष 2014 के चुनाव में उन्‍हें असफलता हाथ लगी। वर्ष 2018 के लोकसभा उपचुनाव में अतीक अहमद चुनाव लड़े और उन्‍हें शिकस्‍त मिली। एसपी अध्‍यक्ष अखिलेश यादव खुलेआम कह चुके हैं कि वह अतीक को नापसंद करते हैं। इन सबके बीच अतीक का नाम वर्ष 2005 में बीएसपी एमएलए राजू पाल की हत्‍या में आया था। राजू पाल ने अतीक के भाई अशरफ को चुनाव में हराया था। कई जेलों में शिफ्ट किए जाने के बाद अतीक अहमद ने अपने गैंग को चलाए रखा है। वर्ष 2018 के फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में पर्चा दाखिल करने के कुछ समय बाद पुलिस ने अतीक की बैरक पर छापा मारा था और बड़े पैमाने पर मोबाइल जब्‍त किया था। इस संबंध में बरेली के डीएम वीके सिंह कहते हैं, 'अपराधी जब नेता बनते हैं तो सम्‍मानीय बनने का प्रयास करते हैं लेकिन अतीक के साथ ऐसा नहीं है। कई साल तक विधायक और सांसद रहने के बाद भी अतीक ने अपराध नहीं छोड़ा।' उन्‍होंने कहा, 'यदि कुछ महीने और यहां पर बंद होते तो माहौल पूरी तरह से खराब हो जाता। जल्‍द ही उनके गुर्गे शहर में आ जाते और इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस जगह को उगाही का नया अड्डा बना लेते।' पुलिस के मुताबिक इसके संकेत पहले से ही वहां हैं। अहमद के बरेली भेजे जाने के बाद देवरिया में पुलिस ने चार अपराधियों को पकड़ा जो अतीक का नाम लेकर उगाही करना चाह रहे थे।


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