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जेट एयरवेजः एक फैसले से थम गई कर्मचारियों की जिंदगी, बेघर होने के कगार पर पहुंचे


मुंबई देश में एक और विमानन सेवा प्रदाता कंपनी ने आखिरकार दम तोड़ दिया। कभी देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइंस रही जेट एयरवेज ने बुधवार को पैसों की किल्लत के कारण अपने सभी विमानों को खड़ा कर दिया। कंपनी के इस फैसले के साथ ही जेट में काम करने वाले कर्मचारियों पर जैसे मुसीबतों पर पहाड़ टूट पड़ा है। कई महीने से वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों की न सिर्फ गृहस्थी ठहर गई है, बल्कि उनके बच्चों के सपनों पर सवालिया निशान लग गए हैं। हालत इतनी खराब है कि पैसों की किल्लत की वजह से कोई अपना घर बेचने को मजबूर है तो कोई अपनी ही सोसायटी में डिफॉल्टर बनकर जी रहा है। घर का खर्च, बच्चों की स्कूल फीस, मकान की ईएमआई, इलाज का खर्च जैसे मसलों से उनकी नींद उड़ गई है। इन्हीं कर्मचारियों में से एक भोजा पुजारी हैं, जिन्होंने लगभग 26 साल पहले तब जेट एयरवेज में बैगेज हैंडलिंग का काम शुरू किया था, जब कंपनी शुरू हुई थी। अब जेट के अन्य कर्मचारियों की तरह उन्हें भी कंपनी के बंद होने की चिंता सता रही है। पुजारी ने कहा, 'अगर मसला नहीं सुलझा, तो मुझे नहीं पता क्या होगा।' उन्हें लगभग दो महीने की सैलरी नहीं मिली है और मजबूरन उन्हें अपना घर बेचना पड़ सकता है। उन्होंने कहा, 'मुझे ऐसा महसूस होता है, जैसे मेरे हाथ बांध दिए गए हैं। इन सबके बारे में सोचकर मुझे रात में नींद नहीं आती। मैंने अपने बच्चों को कुछ नहीं बताया है। वे बहुत छोटे हैं, लेकिन उन्हें आभास हो गया है कि कुछ गड़बड़ है।' जेट एयरवेज के संकट में घिरने से हजारों कर्मचारियों का भविष्य दांव पर लग गया है। कंपनी पर 8,500 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है तथा बैंकों द्वारा और कर्ज देने से मना करने के बाद नकदी के अभाव में कंपनी को बुधवार को अपने सभी विमानों को खड़ा करना पड़ा। कंपनी द्वारा परिचालन बंद कर देने से संकट और गहरा गया है। कभी देश की सबसे बड़ी निजी एयरलाइन रही जेट एयरवेज के कर्जदाता को इसे बेचने के लिए खरीदार तक ढूंढने में और मशक्कत करनी पड़ेगी। जेट एयरवेज के सीईओ विनय दूबे ने बुधवार को कर्मचारियों से कहा कि कंपनी की बिक्री में वक्त लगेगा और चुनौतियां और बढ़ सकती हैं, लेकिन उन्हें विश्वास है कि एयरलाइन एक बार फिर उड़ान भरेगी। कंपनी के संकट में घिरने से 16,000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। कंपनी के सबसे अच्छे दिनों में इसके 120 विमान से अधिक विमान रोजाना 600 उड़ान भरते थे। कंपनी के एक दर्जन से अधिक कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें तीन से चार महीनों से वेतन नहीं मिला है। अधिकांश लोग किराना दुकानों का बिल, होम लोन, स्कूल फीस और ट्यूशन फीस नहीं भर पा रहे हैं। जेट के एक इंजिनियर ने कहा, 'हम न रेस्तरां जाते हैं और नही सिनेमा।' इंजिनियर ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों के ट्यूशन टीचर को हटा दिया है और वह खुद ही उन्हें पढ़ा रहे हैं। नाम जाहिर न करने की शर्त पर उन्होंने कहा, 'उनकी सोसायटी ने उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया है, क्योंकि उन्होंने बिल्डिंग मेंटनेंस फी का भुगतान नहीं किया।'कंपनी के हजारों आक्रोशित कर्मचारी नई दिल्ली और मुंबई में विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। उन्होंने कंपनी के मैनेजमेंट पर अपने कर्मचारियों को एयरलाइंस की बदतर हालत के बारे में न बताकर उन्हें अंधेरे में रखने का आरोप लगाया है। एयरलाइन यूनियन के नेता चैतन्य माइनकार ने कहा, 'मैनेजमेंट ने कभी भी हमें एयरलाइंस की सही तस्वीर से रूबरू नहीं कराया।' शुक्रवार को कंपनी के कर्मचारियों ने मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट पर विरोध-प्रदर्शन किया और पोस्टर लहराए जिनमें 'सेव जेट एयरवेज, सेव आवर फैमिली' लिखा था। जेट के पायलटों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है, जो पहले से ही देश में पर्याप्त रोजगार पैदा न करने को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं। पिछले महीने पीएम मोदी ने हजारों नौकरियों को बचाने के उद्देश्य से बैंकों से कहा था कि वे जेट एयरवेज को बिना बैंकरप्टसी में घसीटे उसे बचाएं। लेकिन बैंकों ने एयलाइंस को 1,500 करोड़ की मदद नहीं की, जबकि उन्होंने पहले उसकी मदद की सहमति जताई थी। नैशनल एविएटर्स गिल्ड के वाइस प्रेजिडेंट कैप्टन असीम वालियानी ने जेट के पायलटों का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा, 'कम से कम अब हमें समझ में आ गया है कि नौकरियां बरकरार रखने, रोजगारों का सृजन करने जैसी तमाम बातें धोखा देने वाली हैं।' उन्होंने कहा, 'मैं जेट के साथ पिछले 23 सालों से जुड़ा रहा और आज मैं टूट गया हूं। मुझे नहीं पता कि मैं पायलटों को क्या मुंह दिखाऊंगा।' जेट के एक सीनियर पायलट ने कहा कि संकट के सामने आते ही कई अहम कर्मचारी जेट का साथ छोड़कर जा चुके हैं। लगभग 400 पायलटों ने दूसरे एयरलाइंस को जॉइन कर लिया है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 इंजिनियर भी कंपनी छोड़ चुके हैं। कुछ पुराने कर्मचारी जेट के वफादार हैं और उन्होंने इसके फिर से उड़ान भरने की उम्मीद नहीं छोड़ी है। कंपनी में बीते 25 साल से बैगेज हैंडलर का काम कर रहे 50 वर्षीय अनिल साहू ने कहा, 'मैं यहां शुरुआत से ही काम कर रहा हूं। इतना सबकुछ होने के बाद भी हमें जेट में विश्वास है। यह सुनामी की तरह है, लेकिन हमें उम्मीद है कि सबकुछ सही हो जाएगा।


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