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भोपाल में दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ सकती हैं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर


नई दिल्ली मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर भोपाल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को चुनौती दे सकती हैं। हमारे सहयोगी न्यूज चैनल टाइम्स नाउ के मुताबिक साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है। अगर वह बीजेपी के टिकट पर भोपाल से चुनाव लड़ती हैं तो मुकाबला और भी दिलचस्प हो जाएगा। भोपाल को बीजेपी का मजबूत गढ़ माना जाता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ की इस चुनौती के बाद कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को मुश्किल सीटों से चुनाव लड़ना चाहिए, दिग्विजय सिंह ने भोपाल से चुनावी समर में उतरने का फैसला किया। अब साध्वी प्रज्ञा उन्हें चुनावी मैदान में टक्कर देने के मूड में हैं। साध्वी प्रज्ञा और दिग्विजय सिंह को एक दूसरे का धुर विरोधी माना जाता है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में से एक हैं, जिन्होंने यूपीए सरकार के दौर में 'भगवा आतंकवाद' के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। इतना ही नहीं, दिग्विजय ने तो मुंबई के 26/11 हमले को 'आरएसएस की साजिश' बताने वाली एक किताब का विमोचन तक किया था। हालांकि, सच्चाई यह है कि मुंबई हमले को पाकिस्तानी आतंकियों ने अंजाम दिया था और एक आतंकवादी अजमल कसाब को तो जिंदा भी पकड़ा गया था, जिसे बाद में यूपीए सरकार के दौरान ही फांसी दी गई थी। शायद यही वजह है कि साध्वी प्रज्ञा चुनावी बिसात पर दिग्विजय सिंह को चुनौती देना चाहती हैं। 1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह 2003 के बाद से अबतक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में नहीं लड़े हैं। तब मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद दिग्विजय ने ऐलान किया था कि वह अगले एक दशक तक न तो चुनाव लड़ेंगे और न ही राज्य की राजनीति में कोई दखल देंगे। सूबे की सियासत से उनका 10 साल का स्वनिर्वासन 2013 में खत्म हुआ और वह 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। हालांकि, उसी साल यानी 2014 में कांग्रेस ने दिग्विजय को राज्यसभा में भेज दिया। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं, जब 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वह 9 सालों तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार 23 दिनों तक यातना दी गई थी। साध्वी प्रज्ञा ने आरोप लगाया कि तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने 'हिंदू आतंकवाद' का जुमला गढ़ा और इस नैरेटिव को सेट करने के लिए उन्हें झूठे केस में फंसाया गया। साध्वी प्रज्ञा 2007 के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। साध्वी प्रज्ञा का जन्म मध्य प्रदेश के भिंड जिले के कछवाहा गांव में हुआ था। हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा का शुरुआत से ही दक्षिणपंथी संगठनों की तरफ रुझान था। वह आरएसएस की छात्र इकाई एबीवीपी की सक्रिय सदस्य भी रह चुकी हैं।


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