• संवाददाता

प्रियंका गांधी ने कहा कि केंद्र सरकार संवैधानिक संस्थाओं को नष्ट कर रही है इसलिए उन्हें घर से निकलना


प्रयागराज उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कांग्रेस महासचिव और ईस्ट यूपी प्रभारी प्रियंका गांधी ने अपनी गंगा यात्रा के दौरान सोमवार को एक जनसभा को संबोधित किया। सिरसा में गंगा तट से जनसभा स्थल तक पैदल पहुंचने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार देश की संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद करने पर तुली है। प्रियंका ने कहा, 'देश और संस्थाओं पर संकट देखकर मुझे घर से निकलना पड़ा।' उन्होंने कहा कि जहां देखो जनता प्रताड़ित, दुखी और समस्याओं से जूझ रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार जनता के लिए कुछ करना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यदि कोई आवाज उठाता है तो उसे दबाया और धमकाया जाता है। जनता से सीधे मुखातिब होते हुए प्रियंका ने कहा, 'आपने बहुत खराब आदत बना दी है। नेताओं को आप ऊपर खड़ा कर देते हैं और आप नीचे बैठते हैं। इस आदत को बदलिए नहीं तो आपका विकास नहीं होग।' उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता का अधिकार होता है। वह अपना अधिकार मांग रही है। सरकार या देश किसी की जागीर नहीं है इसलिए जनता को अब जागना होगा और जागरूक होना होगा। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि धर्म और जाति के मुद्दे इसीलिए उठाए जा रहे हैं क्योंकि विकास नहीं हो रहा है। प्रियंका ने कहा, 'जनता को यह कहना होगा कि वोट चाहिए तो नेता काम करके दिखाएं। मोदी पर निशाना साधते हुए प्रियंका ने कहा कि पांच साल पहले आप सब से वादे किए गए थे। 15 लाख और 2 करोड़ रोजगार देने की बात कही गई थी लेकिन क्या प्रधानमंत्री यहां आए? क्यों नहीं आए? जबकि वह दुनिया घूम रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव दल का नहीं यह देश के भविष्य का चुनाव है। आपको जागना होगा क्योंकि 5-7 लोग देश चला रहे हैं। सरकार पर आरोप लगाते हुए प्रियंका ने कहा कि केंद्र सरकार सभी संस्थाओं को बर्बाद कर रही है। 45 साल में इतनी बेरोजगारी कभी नहीं थी। मैं भी बहुत दिनों तक घर में बैठी रही लेकिन जब देखा कि देश पर संकट है और देश की संस्थाओं पर संकट है तो निकलना पड़ा। उन्होंने कहा, 'किसी को यह इजाजत मत दीजिए कि वह आपको बांटे। आप हैं तो सरकार है। आपने लोकतंत्र बनाया है। किसी को इतनी ताकत मत दीजिए कि आपको तोड़े। प्रियंका ने घाट से सभा स्थल तक पहुंचने के दौरान लगभग एक दर्जन घरों में लोगों से मुलाकात की और सभी से हाल-चाल पूछा।


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