• संवाददाता

अपर्णा यादव को टिकट न देने के बाद बढ़ सकती हैं परिवार में और दूरियां


लखनऊ समाजवादी पार्टी की नई लिस्ट (चौथी) अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव के गले की फांस बन सकती है। इस लिस्ट में चार नाम हैं, लेकिन मुलायम की बहू अपर्णा यादव गायब हैं। चर्चा है कि अपर्णा संभल से चुनाव लड़ना चाहती हैं, लेकिन उन्हें दरकिनार कर शफीकुर रहमान बर्क को टिकट दे दिया गया। कथित रूप से अपर्णा ने टिकट के लिए अपने ससुर (मुलायम) से सिफारिश भी की थी, लेकिन पार्टी अध्यक्ष (अखिलेश) ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इस लिस्ट में गोंडा लोकसभा से विनोद कुमार उर्फ पंडित सिंह, राम सागर रावत को बाराबंकी, तबस्सुम हसन को कैराना और शफीकुर रहमान बर्क को संभल लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाया है। इस लिस्ट की खास बात यह है कि संभल सीट से अपर्णा यादव टिकट मांग रही थीं लेकिन उनकी जगह अखिलेश ने शफीकुर रहमान पर भरोसा जताया। अखिलेश यादव अभी तक उत्तर प्रदेश की 15 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं। पहली लिस्ट में छह प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए, जिसमें सबसे पहला नाम एसपी संरक्षक मुलायम सिंह का था। मुलायम को मैनपुरी, धर्मेंद्र यादव को बदायूं, अक्षय यादव को फिरोजाबाद, कमलेश कठेरिया को इटावा, भाईलाल कोल को रॉबर्ट्सगंज और शब्बीर बाल्मीकि को बहराइच से टिकट दिया। दूसरी लिस्ट में खीरी से डॉ. पूर्वी वर्मा, हरदोई से ऊषा वर्मा और कन्नौज से डिंपल यादव को प्रत्याशी बनाया गया। वहीं हाथरस से रामजी लाल सुमन और मिर्जापुर से राजेंद्र एस बिंद को प्रत्याशी घोषित किया। सूत्रों की मानें तो मुलायम की छोटी बहू संभल से टिकट चाहती थीं। मुलायम ने इसे लेकर गुरुवार को ही अखिलेश से बात की थी। सूत्रों की मानें तो अखिलेश अपर्णा को टिकट नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने 24 घंटे के अंदर संभल सीट से दूसरे प्रत्याशी का नाम घोषित कर दिया। जब अपर्णा से इस बारे में पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि उनके बारे में नेताजी जो भी निर्णय लेंगे, वह उसका सम्मानपूर्वक पालन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह राजनीति में सिर्फ नेताजी की वजह से हैं। आपको बता दें कि अपर्णा को लेकर चर्चा थी कि वह समाजवादी पार्टी छोड़कर सेक्युलर मोर्चा बनाने वाले अखिलेश के चाचा शिवपाल की पार्टी जॉइन कर सकती हैं। उन्होंने शिवपाल की पार्टी के सार्वजनिक मंच पर पहुंचकर उनके पक्ष में भाषण भी दिया था। बीते दिनों अपर्णा ने शिवपाल के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था और बोली थीं कि 'नेताजी के बाद सबसे ज्यादा सम्मान मैं चाचा का करती हूं'। अपर्णा ने यह भी कहा कि वह एसपी में रहेंगी या सेक्युलर मोर्चे के साथ, इसका फैसला चाचा ही करेंगे। राजनीतिक जानकार इसे एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बढ़ती मुसीबत के तौर पर देख रहे हैं। वैसे भी शिवपाल यादव का सॉफ्ट कॉर्नर अपर्णा के साथ रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव में जब अपर्णा को टिकट देने के लिए अखिलेश यादव तैयार नहीं थे तो शिवपाल यादव ने ही एड़ी-चोटी का जोर लगाकर अपर्णा को टिकट दिलवाया था।