• संवाददाता

RBI गवर्नर ने क्रेडिट रेटिंग्स के प्रति जाहिर की चिंता


नई दिल्ली रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की कड़ी आलोचना की है। विभिन्न कंपनियों खासकर IL&FS मामले में वित्तीय गड़बड़ियों को पहचानने में असफल होने पर आरबीआई की ने क्रेडिट रेटिंग कंपनियों को खरी-खोंटी सुनाई है। मीटिंग में शामिल होने वाले सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को शीर्ष क्रेडिट रेटिंग्स अधिकारियों के साथ बातचीत में रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास और डेप्युटी गवर्नरों ने रेटिंग एजेंसियों के प्रति चिंता जाहिर की। यह चिंता इन कंपनियों द्वारा क्रेडिट रिस्क का अनुमान न लगा पाने और समय पर रेटिंग कार्रवाई न करने को लेकर थी। सूत्र ने बताया, 'आरबीआई ने कहा कि रेटिंग्स को लेकर माना जाता है कि ये हमेशा दूरदर्शी होनी चाहिए, लेकिन ये हमेशा ही सुस्त रही हैं।' केंद्रीय बैंक ने क्रेडिट रेटिंग अधिकारियों से कहा है कि पिछले कुछ महीनों में अप्रत्याशित रेटिंग गिरावट से निवेशकों और बैंकों को झटका लगा है। आरबीआई ने ईटी द्वारा लिखे ईमेल का जवाब देने से इनकार कर दिया। IL&FS ग्रुप में चल रहे कर्ज को जानने में देरी के चलते क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की तीखी आलोचना हुई है। यह ग्रुप बैंकों से लिए लोन, म्यूचुअल फंड और प्रोविडेंट फंड का डिफॉल्टर घोषित हो चुका है। हालांकि भारतीय रेटिंग एजेंसियां प्राय: गड़बड़झाले में फंसती रही हैं। क्रेडिट रेटिंग और कंपनी की असल माली हालत के बीच बड़ा फर्क चिंता की बात है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेटिंग एजेंसियां समय रहते कदम नहीं उठाती हैं। सूत्र के मुताबिक, 'सिस्टम में मौजूद कुल एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स) में से एक तिहाई इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग्स से जेनरेट हुआ है। बैंकिंग सिस्टम में कुल 12 लाख करोड़ रुपये के ऐसे असेट्स हैं जो कर्जे में हैं। आरबीआई गवर्नर ने देश की क्रेडिट रेटिंग एजेंसी में 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट' के प्रति चिंता जाहिर की।' रिजर्व बैंक गवर्नर ने 'रेटिंग शॉपिंग' की उस प्रक्रिया को भी अस्वीकार कर दिया जिसमें कंपनियां बेहतर रेटिंग के लिए एक कंपनी से दूसरी कंपनी में माइग्रेट करती हैं। सूत्र ने कहा, 'आरबीआई ने ऐसे मुद्दों पर भी चिंता जाहिर की जहां किसी रेटिंग एजेंसी के सीईओ रेटिंग कमिटी और रेटिंग अडवाइजर में भी शामिल होते हैं और रेटिंग एजेंसियों के साथ स्पेशल रिलेशनशिप के चलते ये बेहतर रेटिंग देने का वादा करते हैं।' आरबीआई, सेबी के साथ मिलकर इस मामले को जांच-परख रही है और इस समस्या को हल करने के लिए नियमों को जल्द लाया जाएगा। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां, कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के साथ रजिस्टर्ड होती हैं और इन्हें सेबी व आरबीआई संयुक्त रूप से रेगुलेट करती हैं। क्रेडिट रेटिंग्स से यह संकेत मिलता है कि उधार लेने वाली किसी कंपनी में देनदारी की कितनी क्षमता है। हालांकि भारत में यह धारणा मजबूत होती जा रही है कि क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां रेटिंग देने में कुछ ज्यादा ही उदारता बरतती हैं। उदाहरण के लिए, भारत में एएए रेटिंग वाली कंपनियों की संख्या दूसरे देशों के मुकाबले बहुत ज्यादा है। भारत में सबसे ऊंची रेटिंग वाली करीब 70 कंपनियां हैं, वहीं अमेरिका में यह दर्जा केवल दो कंपनियों को हासिल है। जर्मनी और ब्रिटेन में किसी भी कंपनी को एएए रेटिंग नहीं मिली है। उभरते देशों के बीच चीन में एएए रेटिंग वाली केवल 14 कंपनियां हैं। इससे भारत और दूसरे देशों में क्रेडिट स्टैंडर्ड्स के बीच खाई का पता चलता है। दूसरे देशों में लागू मानकों का पालन भारत में रेटिंग एजेंसियां नहीं करती हैं