• संवाददाता

केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि बीजेपी हमेशा से चाहती है कि राम जन्मभूमि पर ही राम मंदिर ब


नई दिल्ली अयोध्या विवाद पर केंद्र की ताजा पहल को पूरी तरह संवैधानिक बताते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार की मंशा स्पष्ट की है। मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जावड़ेकर ने कहा कि संवैधानिक बेंच ने ही यह कहा था कि सरकार को निर्णय करना है कि जो बाकी जमीन है उसका क्या किया जाए। ऐसे में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से यथास्थिति के आदेश को बदलने का अनुरोध किया है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर 1993 में अधिग्रहीत 67 एकड़ जमीन को गैर-विवादित बताते हुए इसे इसके मालिकों को लौटाने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि राम जन्मभूमि न्यास ने 2003 में अपील की थी लेकिन 10 साल कांग्रेस का राज था और उन्होंने इस पर कुछ नहीं किया। अब मोदी सरकार कर रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि चुनावी राजनीति की कोई बात नहीं है। रोज सुनवाई होने को पहले प्राथमिकता में रखा गया था लेकिन 5-6 महीने ऐसे ही निकल गए इसलिए सरकार ने यह पहल की है।

'कांग्रेस तो राम को मानती ही नहीं है' उन्होंने कहा कि बीजेपी का पहले से स्टैंड साफ है कि मंदिर वहीं बने। जावड़ेकर ने कहा कि कांग्रेस दो मुंह से बोलती रहती है। कांग्रेस हमेशा ही राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल का यह तर्क कि मामले की सुनवाई जुलाई 2019 के बाद हो, इससे साबित हो जाता है। जावड़ेकर ने कहा कि वे (कांग्रेस) तो राम को मानते ही नहीं हैं। राम सेतु पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने हलफनामा देकर काल्पनिक बताया था।

मंदिर: 67 एकड़ जमीन लौटाना चाहती है सरकार

'विवादित जमीन पर यथास्थिति के पक्ष में' जावड़ेकर ने आगे कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि सुप्रीम कोर्ट सरकार की पहल को अनुमति दे देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार चाहती है कि 0.313 एकड़ की जो विवादित जमीन है उस पर यथास्थिति बनी रहे, उसका कानूनी कामकाज और कोर्ट केस पूर्व की तरह चलता रहे। इसके अलावा भूमि के जिस हिस्से पर कोई विवाद नहीं है, सरकार उसे ही मूल मालिकों को वापस देना चाहती है।

'मंदिर के लिए जो भी जरूरी होगा, बीजेपी करेगी' केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'यह बहुत बड़ी पहल है। शुरू से बीजेपी का कहना है कि राम जन्मभूमि पर ही मंदिर बने। राम मंदिर बनाने के लिए कानून के द्वारा जो भी मार्ग प्रशस्त करना होगा, वह करने का बीजेपी हमेशा प्रयास करेगी।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने इंटरव्यू में कहा था कि लोगों की इच्छा है पर कोर्ट केस चल रहा है, ऐसे में कानूनी प्रक्रिया के बाद जो उचित कदम होंगे, उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी साफ कहा है कि कानूनी कार्रवाई से ही राम मंदिर बने।

मंजूरी मिली तो आगे क्या? जावड़ेकर ने दोहराते हुए कहा कि केंद्र सरकार विवादित ढांचे वाले हिस्से को नहीं छू रही है। हम गैरविवादित भूमि को राम जन्मभूमि न्यास व अन्य को वापस करना चाहते हैं। उनकी जमीनें हैं, जो करना है वही करेंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का कदम असंवैधानिक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद राम मंदिर बनाने की दिशा में न्यास आगे बढ़ सकता है। यह सरकार का निर्णय नहीं होगा।