• संवाददाता

'प्रियंका की कांग्रेस में एंट्री से बंटेगा मुस्लिम वोट, युवा आएंगे कांग्रेस के साथ'


लखनऊ लंबे इंतजार के बाद बुधवार को गांधी परिवार की तीसरी पीढ़ी की सदस्‍य प्रियंका गांधी वाड्रा के देश की राजनीति में सक्रिय रूप से उतरने का ऐलान हो गया। कांग्रेस पार्टी ने प्रियंका गांधी को महासचिव बनाया है और उन्‍हें पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में पार्टी की डूबती नैया को पार लगाने की जिम्‍मेदारी दी गई है। विश्‍लेषकों के मुताबिक मोदी-योगी की जोड़ी और समाजवादी पार्टी-बीएसपी के गठबंधन के बीच प्रियंका गांधी का करिश्‍मा दिखा पाना टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय में राजनीति शास्‍त्र के प्रफेसर कौशल किशोर मिश्रा का मानना है कि प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का पूर्वी यूपी की 30 सीटों पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा। उन्‍होंने कहा कि पूर्वांचल की वाराणसी सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ते हैं और उनके प्रभाव को कम करने के लिए कांग्रेस ने अपना ब्रह्मास्‍त्र चलाया है। उन्‍होंने कहा कि प्रियंका गांधी पहले से पर्दे के पीछे से राजनीति में सक्रिय थीं लेकिन उसका कोई खास असर नहीं पड़ा। आगामी लोकसभा चुनाव में भी प्रियंका का कुछ खास होगा, इसकी संभावना बेहद कम है। प्रफेसर किशोर ने कहा कि प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का सबसे ज्‍यादा नुकसान समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन को होगा। प्रफेसर किशोर ने कहा कि युवा मुसलमान कांग्रेस का दामन थाम सकते हैं जबकि मुलायम समर्थक एसपी के साथ रह सकते हैं। इससे मुसलमानों के वोटों का बंटवारा होगा। बीजेपी भी यही चाहती थी कि मुस्लिम वोटों का बंटवारा हो। उन्‍होंने कहा कि अब पूर्वी यूपी में मुकाबला त्रिकोणीय होगा। प्रियंका गांधी के आने का बीजेपी से ज्‍यादा एसपी-बीएसपी को नुकसान होगा। उधर, राजनीतिक विश्‍लेषक जेपी शुक्‍ला कहते हैं कि प्रियंका गांधी के सक्रिय राजनीति में आने का सिर्फ मनोवैज्ञानिक असर पड़ेगा। इसका कोई राजनीतिक लाभ कांग्रेस को नहीं होने जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि प्रियंका गांधी के आने से कांग्रेस कार्यकर्ता उत्‍साहित हो सकते हैं और दम तोड़ रही कांग्रेस पार्टी को संजीवनी मिल सकती है। उन्‍होंने कहा कि कांग्रेस ने यह कदम देर से उठाया है। शुक्‍ला कहते हैं, 'लोकसभा चुनाव से मात्र दो महीने पहले प्रियंका के आने से यूपी में कोई खास असर नहीं पड़ेगा। इससे कांग्रेस वर्कर का केवल उत्‍साह बढ़ेगा। कांग्रेस का वोट पिछली बार की तरह ही इस बार भी बना रहे, यही बहुत है। कांग्रेस के लिए स्थिति यूपी में आशाजनक नहीं है। पहले कांग्रेस एसपी के साथ चुनाव लड़ चुकी है लेकिन उसे कोई फायदा नहीं हुआ। यह केवल सम्‍मान बचाए रखने के लिए उठाया गया कदम है।