• वन्दिता मिश्रा

समाजवादी पार्टी में तो बूथ जिताने वाले नेता भी नहीं बचेः शिवपाल यादव


लखनऊ अब तक समाजवादी पार्टी की रैलियों के रणनीतिकार रहे यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव 9 दिसंबर को अपनी नई पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) के बैनर तले प्रस्तावित रैली की तैयारियों में मशगूल हैं। लखनऊ के रमाबाई आंबेडकर मैदान में संख्या बल जुटा दम दिखाने का उन पर दबाव है। सवाल यह भी है कि मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष बनाने का उनका प्रस्ताव कब जमीन पर उतरेगा? एनबीटी से बातचीत में ऐसे ही मौजूं सवालों के शिवपाल ने जवाब दिए -

सवाल: किन मुद्दों की लड़ाई है? जवाब: केंद्र और प्रदेश में बीजेपी सरकार के भ्रष्टाचार व महंगाई बढ़ाने वाली नीतियों के खिलाफ। सीएम योगी आदित्यनाथ तो ईमानदार हैं लेकिन उनका सरकार पर नियंत्रण नहीं है। नीचे तक भ्रष्टाचार चरम पर है। कानून-व्यवस्था फेल है। इसलिए हमने रैली का नाम ही जनाक्रोश रैली रखा है।

सवाल: अब तक एसपी के लिए भीड़ जुटाते थे, अब उससे अलग रैली का अनुभव कैसा है? जवाब: हमारी पार्टी ही असली एसपी है। हम लोहियाजी के सिद्धांतों और नेताजी की दिखाई राह पर चल रहे हैं। कथित एसपी तो चुगलखोरों, चापलूसों और जनाधारविहीन लोगों से घिरी है। एक भी नेता ऐसा नहीं है जिसने एक बूथ जीता हो। रैली ऐतिहासिक होगी।

सवाल: आपके पुराने दल के विरोधी तो आप पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगा रहे हैं? जवाब: आरोप लगाने वाले बताएं कि मोदी-योगी सरकार के खिलाफ कितने आंदोलन आज तक किए। अयोध्या में धर्मसभा के खिलाफ पैदल मार्च हमने किया। बीजेपी के विरोध में रैली हम कर रहे हैं। आरोप लगाने वाले तो बीजेपी को जिताने और कांग्रेस को हराने के लिए छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और राजस्थान तक रैली कर आए। अपने उम्मीदवार उतारे।

सवाल: आपने मुलायम सिंह यादव को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव दिया था। रैली में यह बात आगे बढ़ेगी? जवाब: नेताजी का हमेशा सम्मान रहा है और रहेगा। इस पर आगे सोचेंगे। अभी बात मुद्दों की है और उसके लिए लड़ रहे हैं। इसी पर सारा फोकस है।

सवाल: एसपी के दरवाजे आपके लिए फिर खुलते हैं तो? जवाब: हम आए ही इसलिए थे क्योंकि हमें अपमानित किया गया। हम तो वहां संगठन के लिए ही काम कर रहे थे। अब राह आगे निकल चुकी है। हम उनके साथ गठबंधन को तैयार हैं लेकिन पार्टी का विलय करने को नहीं। गठबंधन भी बराबर भागीदारी और सम्मानजनक सीटों पर।

सवाल: रघुराज प्रताप सिंह 'राजा भैया' को आपने बुके और शुभकामनाएं भिजवाईं। क्या साथ आने की गुंजाइश है? जवाब: राजा भैया से हमारे अच्छे संबंध हैं। इसलिए शुभकामनाएं देना गलत नहीं है। समान विचारधारा के लोग हमसे संपर्क करेंगे तो उनके साथ भागीदारी का हाथ बढ़ाया जा सकता है।


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