नोएडा में 3-7 साल से लटके पड़े हैं 21 हजार फ्लैट्स

ग्रेटर नोएडा
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेग्युलेटरी अथॉरिटी (यूपी-रेरा) की ग्रेटर नोएडा स्थित बेंच ने गुरुवार को नोएडा के सात बिल्डरों को 3 से 7 वर्ष से लटके पड़े 21 हजार फ्लैट्स का निर्माण कार्य तेज करने का आदेश दिया। ये सारे फ्लैट्स नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा के हैं। अथॉरिटी का यह आदेश उसकी ओर से किए गए एक सर्वे के बाद आया। इस सर्वे में लॉजिक्स ग्रुप, टूडे होम्स, रुद्र बिलवेल, मैस्कॉट होम्स, सुपरटेक, ऑमेक्स और राजेश प्रॉजेक्ट्स के नोएडा एवं ग्रेटर नोएडा में 21 हजार 758 अपार्टमेंट्स के निर्माण अत्यंत लंबी अवधि से रुके पाए गए। 
यूपी-रेरा के मेंबर बलविंदर कुमार ने टाइम्स ऑप इंडिया से कहा, 'हमने गुरुवार को इन बिल्डरों के साथ मीटिंग की और उनके इन लंबे समय से लटके पड़े प्रॉजेक्ट्स पर चर्चा की। हमने उन्हें इन प्रॉजेक्ट्स को प्राथमिकता के साथ पूरा करने को कहा।' इस मीटिंग में नोएडा और ग्रेटर नोएडा अथॉरिटीज के अधिकारी भी शामिल हुए। 

किस बिल्डर के कितने लटके फ्लैट्स? 
अधिकारियों ने कहा कि सुपरकेट अपने जार और L’Orb हाउसिंग प्रॉजेक्ट्स के 9 हजार 965 फ्लैटों के निर्माण की जबकि लॉजिक्स ग्रुप अपने ब्लॉसम जेस्ट, ब्लॉसम काउंटी और ब्लॉसम ग्रीन्स के 8 हजार 258 फ्लैट्स के निर्माण की समय-सीमा बहुत पहले पार कर चुका है। वहीं, टुडे होम्स को रिज रेसिडेंसी में 1,749 और किंग्स पार्क में 687 घर अब भी डिलिवर करने हैं। इसी तरह, रुद्र बिलवे ऐक्वाकासा और पैलेस हाइट्स में 2 हजार 870 फ्लैट्स, मैस्कॉट होम्स ने मैस्कॉट मोनोरथ और निओटाउन में 700 फ्लैट्स, ओमेक्स ने हेरिटेड ग्रैंड में 2 हजार 980 फ्लैट्स और राजेश प्रॉजेक्ट्स ने आरजी लग्जरी में 2 हजार 816 फ्लैट्स लटका रखे हैं। 

मध्यस्थ की भूमिका में यूपी-रेरा 
यूपी-रेरा की ग्रेटर नोएडा बेंच 4 सितंबर से होम बायर्स की शिकायतें सुन रही है और उसने लटके पड़े प्रॉजेक्ट्स के पूरा करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाना शुरू किया है। 

 

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