• आकांशा त्रिपाठी

शेल्टर होम: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को फटकारा,क्या बच्चे देश का हिस्सा नहीं हैं?


नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में राज्य सरकार को मंगलवार को जमकर फटकार लगाई। शेल्टर होम मामले में सही तरीके से FIR दर्ज नहीं होने पर कड़ी टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने बिहार सरकार के रवैये को अमानवीय और शर्मनाक बताया। सुप्रीम कोर्ट ने 14 शेल्टर होम्स मे नाबालिगों के यौन उत्पीड़न की रिपोर्ट पर उचित कार्रवाई न करने पर बिहार सरकार को लगाई कड़ी फटकार।कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार की मानसिकता दुर्भाग्यपूर्ण है। कोर्ट ने कहा कि बच्चों के साथ इतना बड़ा हादसा हुआ और सरकार कुछ कर नहीं रही है। कड़ी टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा कि FIR में यौन शोषण और वित्तीय गड़बड़ी का जिक्र ही नहीं किया गया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार 24 घंटे के भीतर FIR में नई धाराएं जोड़े। कोर्ट ने कहा कि बिहार सरकार की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया जा सकता है। FIR में सेक्शन 377 नहीं लगाने पर नाराजगी जताते हुए शीर्ष अदालत ने मुख्य सचिव को बुधवार दो बजे तक गलती को सुधारने का आदेश दिया।

"यह शर्मनाक है कि सरकार दोषियों को बचाने में लगी है। क्या बच्चे देश का हिस्सा नही हैं? केवल ईश्वर ही इस देश को बचा सकता है।" -बिहार शेल्टर होम केस पर सुप्रीम कोर्ट शीर्ष अदालत ने कहा कि शेल्टर होम के खिलाफ रिपोर्ट मिलने के बाद भी सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। पिछली सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बेहद तल्ख तीखी टिप्पणी की थी। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस को फटकार लगाते हुए राज्य के डीजीपी को पेश होने का आदेश भी दिया था। कोर्ट ने कहा, 'बिहार सरकार मामले के आरोपियों के खिलाफ नरम रुख अपना रही है। यह शर्मनाक है।' कोर्ट ने पूछा क्या ये बच्चे देश के नागरिक नहीं हैं? बिहार सरकार ने कोर्ट के सामने गलती मानते हुए कहा भरोसा दिलाया कि FIR की गलती को जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। राज्य सरकार ने इस गलती को सुधारने के लिए अंतिम बार मोहलत मांगी। "सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर थी कि कुछ बच्चे इन शेल्टर होम में दुष्कर्म का भी शिकार हुए, लेकिन पुलिस ने धारा 377 के तहत मामला दर्ज न कर हल्की धाराओं में मामला दर्ज किया।" -सुप्रीम कोर्ट को इसलिए आया गुस्सा

यह है मामला बिहार के बहुचर्चित मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को पूर्व समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा का करीबी माना जाता है। इसी कांड को लेकर मंजू वर्मा को बिहार की नीतीश कैबिनेट से इस्तीफा देना पड़ा और बाद में उन्होंने कोर्ट में सरेंडर भी किया। सुप्रीम कोर्ट ने 31 अक्टूबर को इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान भी बिहार पुलिस को लताड़ लगाई थी। बता दें कि मुजफ्फपुर शेल्टर होम में कई लड़कियों से कथित तौर पर बलात्कार हुआ था। टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) द्वारा राज्य के समाज कल्याण विभाग को सौंपी गई एक ऑडिट रिपोर्ट में यह मामला सबसे पहले प्रकाश में आया था।

पति पहले ही कर चुके हैं सरेंडर बेगूसराय जिला स्थित आवास पर छापेमारी के दौरान अवैध हथियार और कारतूस मिलने पर मंजू वर्मा और उनके पति चन्द्रशेखर वर्मा के खिलाफ चेरिया बरियारपुर थाने में केस दर्ज किया गया था। इसके बाद मंजू वर्मा फरार हो गई थीं। वहीं मंजू वर्मा के पति चन्द्रशेखर वर्मा ने 29 अक्टूबर को कोर्ट में सरेंडर कर दिया था।


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