रीना गोयल ( हरियाणा)- सार  छन्द

 

मिल बाबुल से बिटिया रोये ,छोड़ चली घर द्वारा ।

सपनों से भी जो सुंदर था ,प्राणों से भी प्यारा ।

 

जब मैं छोटी सी बच्ची थी ,जल्दी तुम घर आते थे ।

गुड़िया ,गुड्डा,और खिलौने ,कितने सारे लाते थे ।

लेकिन सबसे अच्छा लगता ,मुझको साथ तुम्हारा ।

साथ तुम्ही तो होते मैंने ,जब जब तुम्हे पुकारा 

 

सपनों से भी .....................।

 

इक मेरी मुस्कान कि खातिर ,कितने लाड़ लड़ाते ।

घोड़ा जब कहती बन जाते ,चाहे थक भी  जाते ।

अपने पास नही कुछ रक्खा ,सब था मुझ पर वारा ।

ऐसा प्यार कहाँ पाऊँगी ,फिर से कहो दुबारा ।

 

 

सपनों से भी .....................।

 

छाँव नेह की पायी तुमसे ,माँ भी याद न आती ।

इक दिन जाना है सब तज कर ,सोच -सोच घबराती ।

लालन पालन में मेरे ही ,जीवन  किया गुज़ारा ।

बनी पराया धन है बेटी ,क्यों माने जग सारा ।

 

 

सपनों से भी .....................।

 

करी विदाई बाबुल तुमने ,कैसी रीत निभाई ।

रस्मों और रिवाज़ों खातिर ,बेटी करी पराई ।

कैसे मुझ बिन जी पाओगे ,इक पल नहीं विचारा ।

कौन रखेगा ध्यान तुम्हारा ,होगा कौन सहारा 

 

सपनों से भी .....................।

 

खूब दिए आशीष पिता

 

ने ,अंक लिया बिटिया को ।

बोले गुड्डे के संग बांधा ,प्यारी इस गुड़िया को ।

अब ससुराल तुम्हारा घर है ,सुखी रहे संसारा ।

तन मन धन से साथ निभाओ , होगा नाम हमारा ।

 

सपनों से भी .....................।

 

सुन बाबुल मैं याद आऊँ तो ,तुम्हे कसम मत रोना ।

सजल नयन कर अश्रु धार से ,दामन को मत धोना ।

बहुत कठिन है बिसरा देना ,ये घर ये चौबारा ।

आँचल में मैं बाँध रखूंगी ,प्यार तुम्हारा सारा ।

 

सपनों से भी .....................।

 

रीना गोयल ( हरियाणा)

 

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