• संवाददाता

बहुत कम होती है आतंकियों की उम्र, गोली चलाने पर गुलदस्ते की उम्मीद ना करें दहशतगर्द: सत्यपाल मलिक


श्रीनगर कश्मीर घाटी में आतंकी घटनाओं पर सख्त टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि जो आतंकी गोली चलाने के लिए बाहर आते हैं उन्हें इसके बदले में गुलदस्ते की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। मलिक ने मंगलवार को मीडिया से बात करते हुए कहा कि मेरे राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद घाटी में 40 से अधिक आतंकी मारे गए हैं और आतंक एवं पत्थरबाजी का रास्ता थामने वाले युवाओं की संख्या में कमी आई है। मलिक ने कहा कि आतंकवादियों के जीवन की अवधि अधिक लंबी नहीं होती है। उन्होंने कहा, 'जब से मैंने प्रदेश के राज्यपाल का पद भार संभाला है, लगभग 40 से अधिक आतंकवादी मारे गए हैं और आतंकवाद में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या में कमी आई है। लेकिन दहशतगर्द अगर गोली चलाएंगे तो उन्हें गुलदस्ते की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।' राज्यपाल ने कहा, मैं संतुष्ट हूं कि इस मोर्चे पर चिंताजनक हालात नहीं है। मलिक ने कहा कि मेरा यह दावा सिर्फ आधिकारिक आंकड़ों नहीं बल्कि उन जानकारियों पर भी आधारित है, जिसमें लोगों ने मुझे राज्य के हालात की जानकारी दी है।

'सिर्फ दिल्ली नहीं स्थानीय नेताओं से भी नाराजगी' राज्यपाल ने कहा कि मैंने तमाम लोगों और प्रतिनिधियों से मुलाकात की है और इन लोगों से बात करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि 13-20 वर्ष की आयु वर्ग के लोगों की चिंताओं को दूर करना वक्त की दरकार है। इस आयु वर्ग की चिंताओं को पहले दूर करने की जरूरत है क्योंकि यह लोग परेशान हैं। युवा सिर्फ नयी दिल्ली (केंद्र सरकार) से नाखुश नहीं हैं बल्कि पाकिस्तान, स्थानीय राजनीतिक दल और हुर्रियत से भी नाराज हैं। उन्हें आशा की कोई किरण नहीं नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि घाटी के लोगों के साथ संपर्क स्थापित करने और उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप काम करने की जरूरत है ताकि वे समझ सकें कि केंद्र उनके खिलाफ नहीं है।

'साक्षर लोग भी करते हैं कई गलत चीजें' वहीं मन्नान वानी जैसे पढ़े लिखे युवक के घाटी में हथियार उठाने के उदाहरण पर चर्चा करते हुए मलिक ने कहा कि गलत सूचना के आधार पर एक कहानी गढ़ ली गई है। उन्होंने कहा कि कई साक्षर लोग अन्य बुरी चीजें करते हैं। उन्होंने कहा कि बढ़ा चढ़ाकर पेश किए गए आंकड़ों में घाटी के भीतर 400 आतंकियों के मौजूद होने की बात कही जा रही है। भारत जैसे देशों के लिए इन 400 लोगों से निजात पाना कुछ नहीं है, लेकिन हमें आतंकियों से अधिक आतंकवाद के अंत के लिए काम करना होगा।

'आतंकवाद की विचारधारा खत्म करने का प्रयास' मलिक ने कहा कि हम यहां आतंकवाद की विचारधारा खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। आतंकवाद बंदूक में नहीं है बल्कि दिमाग में है और मैं आतंकवाद के जहर से इन दिमागों को मुक्त करने की हर कोशिश करूंगा। उन्होंने श्रीलंका के आतंकी संगठन लिट्टे का उदाहरण देते हुए कहा कि उसने आतंकवाद से क्या पाया, यह सोचना होगा। लिट्टे के पास तो अपनी नौसेना तक थी, लेकिन सिवाय मौत और तबाही के उसे कुछ नहीं हासिल हुआ। बता दें कि सत्यपाल मलिक ने यह सभी बयान उस वक्त दिए हैं, जबकि राज्य में हाल ही में पंचायत चुनाव संपन्न हुए हैं। वहीं बीते कुछ दिनों में कश्मीर घाटी में सेना ने ताबड़तोड़ कार्रवाईयों में कई आतंकियों को मार गिराया है।