हाई कोर्ट ने खत्म की गौतम नवलखा की नजरबंदी

October 1, 2018

नई दिल्ली 
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को अपेक्स कोर्ट के आदेश को खारिज करते हुए गौतम नवलखा को हाउस अरेस्ट से मुक्त करने का आदेश दिया। उन्हें और अन्य 5 ऐक्टिविस्टों को भीमा -कोरेगांव हिंसा मामले में नजरबंद किया गया था। हाई कोर्ट ने यह कहते हुए राहत दी है कि पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सहारा खोजने की छूट दी थी।  हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट की ट्रांजिट रिमांड के आदेश रद्द कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि नवलखा को 24 घंटे से ज्यादा हिरासत में लिया जाना सही नहीं है। नवलखा को 28 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था। जस्टिस मुरलीधर और विनोद गोयल की बेंच ने चीफ मेट्रोपोलियन मैजिस्ट्रेट के आदेश को किनारे कर दिया। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट का आदेश कानूनी रूप से सही नहीं था। महाराष्ट्र पुलिस ने 28 अगस्त को नवलखा को दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसके अलावा 4 अन्य ऐक्टिविस्टों को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस का आरोप है कि इनके नक्सली लिंक हैं और भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़काने में इनका हाथ था। गिरफ्तार ऐक्टिविस्ट में वरवर राव, अरुण फरेरा, वरनन गोंजालवीस, सुधा भारद्वा और गौतम नवलखा शामिल हैं। इनकी नजरबंदी सुप्रीम कोर्ट ने 4 हफ्ते के लिए बढ़ाई थी ताकि कानूनी कदम उठाए जा सकें। अपेक्स कोर्ट के आदेश के बाद इन्हें घरों में नजरबंद किया गया था। कोर्ट ने यह आदेश रोमिला थापर, अर्थशास्त्री प्रभात पटनायक और देवकी जैन की याचिका पर दिया है। तेलुगु कवि वरवर राव को 28 अगस्त को हैदराबाद से गिरफ्तार किया गया था। गोंजालविस और फरेरा को मुंबई से गिरफ्तार किया गया था। सुधा भारद्वाज फरीदाबाद से गिरफ्तार हुई थीं। 

 

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