• shiv vardhan singh

शिव, राम, विष्णु: प्रभु के भरोसे लड़ा जाएगा 2019 का चुनाव?


नई दिल्ली अगर आपको लगता है कि 2019 का लोकसभा चुनाव राजनीतिक दलों द्वारा आम आदमी के मुद्दों पर लड़ा जाएगा, तो एक बार फिर से सोचिए! राजनीतिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले उत्तर प्रदेश, जिसकी जनसंख्या करीब 22 करोड़ है, में राजनीतिक दलों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा भगवान होंगे। जी हां, आपने बिल्कुल ठीक पढ़ा। इस बार, भारतीय जनता पार्टी का फोकस जहां भगवान राम पर है, कांग्रेस भगवान शिव को लेकर आगे बढ़ रही है, वहीं समाजवादी पार्टी भगवान विष्णु के साथ आगे बढ़ रही है। बहुजन समाजपार्टी किसी भी हिंदू भगवान का नाम लेकर वोट मांगने से फिलहाल बच रही है। ऐसा करके वह सिर्फ दलित पार्टी के तौर पर ही वोट मांगना चाहती है। यह सिर्फ भगवा दल ही नहीं है, जो 2019 चुनाव के लिए राम के नाम पर अपनी तैयारी कर रहा है। बाकी पार्टियों की भी कोशिश है कि वह नरम हिंदुत्व में खुद को सबसे आगे दिखाने की कोशिश कर रही है और खुद पर लगा 'मुस्लिमों की पार्टी' का ठप्पा हटाने की कोशिश कर रही हैं। गैर-बीजेपी पार्टियों को लगता है कि उनकी 'मुस्लिम पार्टी' की इमेज की वजह से ही 2014 में उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा था।

फिर राम लहर पैदा करने की कोशिश में बीजेपी बीजेपी ने एक बार फिर चुनाव से पहले अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर बनाने के ढोल पीटने शुरू कर दिए हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके सहयोगी विश्व हिंदू परिषद ने फिर 90 के दौर की राम लहर तैयार करने की कोशिश शुरू कर दी है। 90 के दशक में राम लहर अपने चरम पर थी और इसका सीधा फायदा बीजेपी को हुआ था।

इमेज बदलने की कोशिश में कांग्रेस मुस्लिम समर्थक पार्टी होने की इमेज का सबसे ज्यादा नुकसान कांग्रेस को हुआ है। इस बार कांग्रेस इस इमेज को तोड़ने की पूरी कोशिश कर रही है। ऐसे में पोस्टरों पर कांग्रेस नेताओं के नाम के साथ ठाकुर, पंडित और हिंदू ह्रदय सम्राट जैसी उपमाएं भी देखने को मिल जाएंगी। कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने गुजरात चुनाव, कर्नाटक चुनाव के दौरान कई मठ और मंदिरों का दौरा किया। हाल ही में वह कैलास मानसरोवर की यात्रा भी करके लौटे हैं। पार्टी के कार्यकर्ता पोस्टरों पर उनके नाम के पहले 'शिव भक्त' की उपमा भी दे रहे हैं।

हाल के अमेठी संसदीय क्षेत्र के दौरे के समय राहुल गांधी का स्वागत 'शिव भक्त' के तौर पर किया गया था। पार्टी के छुटभैये नेता भी अपने भाषणों के जरिए राहुल गांधी को महान हिंदू बताने की कोशिश कर रहे हैं, साथ ही वे यह भी जताते हैं कि राहुल गांधी परंपराओं का पालन बेहद अच्छे ढंग से करते हैं।

इस हफ्ते राहुल गांधी उस समय थोड़ा असहज हो गए थे, जब इलाहाबाद के बमरौली एयरपोर्ट पर उनका स्वागत 'बम बम भोले' के उद्घोष के साथ किया गया। बता दें कि 2014 में जब पीएम मोदी वाराणसी में चुनाव अभियान चला रहे थे, उस समय उनका स्वागत भी इसी उद्घोष के साथ किया जाता था। पिछले दिनों जब राहुल गांधी चित्रकूट पहुंचे तो 'जय श्री राम' के नारों के साथ उनका स्वागत किया गया।

पुराने नारे पर लौटेगी बीएसपी? कुछ साल पहले तक बहुजन समाजपार्टी भी अपनी रैलियों में 'हाथी नहीं गणेश है... ब्रह्मा, विष्णु, महेश है' नारों का इस्तेमाल करती थी। इन्हीं नारों के जरिए बीएसपी ने दलित पार्टी की अपनी इमेज तोड़ने की कोशिश की थी और सर्वसमाज की बात कही थी। बीएसपी के एक सीनियर नेता ने न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, 'जरूरत पड़ने पर इन नारों का इस्तेमाल पार्टी फिर से कर सकती है।'

सैफई में विष्णु मंदिर से संदेश देगी एसपी चौंकाने वाली, लेकिन मजेदार बात यह है कि समाजवादी पार्टी भी इस बार 'मुस्लिम पार्टी' की इमेज तोड़ने की जीतोड़ कोशिश कर रही है। एसपी ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वे ऐसा कोई भी बयान न दें जिससे पार्टी की छवि 'हिंदू विरोधी' जैसी दिखे। एसपी के नेता ने बताया, 'हमें विरोधियों ने जानबूझकर मुस्लिमों की पार्टी की तरह पेश किया है। इस बार हम सचेत हैं और बीजेपी की ऐसी किसी भी अफवाह का हम जवाब देंगे।' समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आम सभा में ऐलान किया था कि वह अपने पैतृक गांव सैफई में भगवान विष्णु का एक मंदिर बनवाएंगे। बीजेपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे 'ह्रदय परिवर्तन' का नाम दिया है।

मौर्य ने कहा, 'मुझे खुशी है कि उन्होंने मुस्लिम तुष्टिकरण के किसी अवसर को नहीं छोड़ा, लेकिन अब हिंदू भगवान के नाम जाप कर रहे हैं। यह हिंदुओं की शक्ति को दिखाता है।' वहीं एसपी के पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद अमर सिंह ने कहा कि यह ह्रदय परिवर्तन नहीं बल्कि वोट के लिए ड्रामा है।

भगवान किसकी तरफ होंगे और वोटरों का आशीर्वाद किसे मिलेगा यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन एक बात बिल्कुल साफ है कि आने वाले चुनाव में भगवान बेहद व्यस्त रहने वाले हैं। क्योंकि हर कोई वोट के लिए उनके नाम का इस्तेमाल करेगा।