लखनऊ यूनिवर्सिटी में 'गरीब छात्रों पर हमला, दिनेश शर्मा दें जवाब'


लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी के लखनऊ विश्वविद्यालय में सेमेस्टर प्रणाली लागू किए जाने को लेकर एक ओर जहां छात्रों में रोष है वहीं अब इस व्यवस्था को लेकर संबद्ध महाविद्यालयों ने भी मुखर होकर विरोध करना शुरू कर दिया है। महाविद्यालयों का कहना है कि उनके पास ना ही पर्याप्त सुविधाएं हैं और ना ही इसे लागू करने की पूर्ण व्यवस्था, ऐसे में नए सिस्टम से परीक्षाएं कराना काफी मुश्किल हो रहा है। कालीचरण पीजी कॉलेज के कॉमर्स विभाग के एचओडी ने एससी पांडे ने कहा कि जिस तरह से विश्वविद्यालय ने सेमेस्टर सिस्टम लागू कर दिया है, उससे छात्र सिर्फ नंबर के लिए पढ़ाई करेंगे, ना कि वे विषय से जुड़ा ज्ञान ले पाएंगे। उन्होंने कहा, 'परीक्षा से पहले प्रजेंटेशन की व्यवस्था में समय बर्बाद होगा। 15 नवंबर से परीक्षाएं होनी है, कोर्स पूरा नहीं है, इन सबके बीच प्रजेंटेशन देने से न सिर्फ स्टूडेंट्स पर दबाव बढ़ेगा बल्कि वे टीचर्स भी समय के हिसाब से काम पूरा नहीं कर पाएंगे।' पांडे ने सवाल किया कि इंटरनल्स की कॉपी जांचने, प्रजेंटेशन लेने में कई दिन लग जाएंगे, फिर हम कोर्स कब पूरा कराएंगे? नए सिस्टम को लेकर लखनऊ यूनिवर्सिटी ऐफिलेटेड कॉलेज टीचर्स असोसिएशन के अध्यक्ष मनोज पांडे ने कहा कि सेमेस्टर सिस्टम को जिस तरह लागू किया गया है, वह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, 'छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है और हमने इसके लिए सरकार और कुलपति को पत्र लिखा है। हमारी मांग है कि छात्रों के साथ-साथ महाविद्यालयों की जमीनी हकीकत के बारे में सोचा जाए।' सेमेस्टर सिस्टम को लेकर छात्र संगठन भी लंबे समय से सड़कों पर उतरे हैं। एबीवीपी के क्षेत्र संगठन मंत्री रमेश गढ़िया ने कहा, 'विश्वविद्यालय में सेमेस्टर सिस्टम लागू करना छात्रों के ऊपर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना है। गरीब छात्र काफी विपरीत परिस्थियों में धन की व्यवस्था करके पढ़ाई करते हैं, अब फीस लगभग दोगुनी हो गई है। नया सिस्टम उन गरीब छात्रों के साथ अन्याय है।' उन्होंने कहा कि राजधानी का विश्वविद्यालय होने के कारण पूरे प्रदेश के किसानों के बच्चे और गरीब छात्र यहां पढ़ने आते हैं लेकिन इस बढ़ी फीस से वे शिक्षा से दूर हो जाएंगे। एबीवीपी के प्रांत सहमंत्री विवेक सिंह मोनू ने कहा कि विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों का आवश्यक अनुपात नियमानुसार पूर्ण नहीं है। उन्होंने कहा, 'जब स्टूडेंट का कोर्स ही नहीं पूरा होगा तो वह कैसे एग्जाम देगा? शिक्षा सिर्फ नंबर लाने के लिए नहीं होती। इस सिस्टम से छात्रों पर दबाव इतना अधिक हो जाएगा कि वे एनसीसी, एनएसएस, खेल, सहित्य एवं संस्कृतिक गतिविधियों में शामिल नहीं हो पाएंगे।' उन्होंने कहा कि नए सिस्टम से छात्रों का व्यक्तित्व विकास रुक जाएगा। समाजवादी छात्रसभा के प्रदेश उपाध्यक्ष टीडी सिंह ने कहा कि नए सिस्टम को लागू करके विश्वविद्यालय प्रशासन तानाशाही कर रहा है। उन्होंने कहा, 'बिना किसी तैयारी के यह फैसला छात्रों पर जबरन थोपा गया है। सबसे बड़ा दुख इस बात का है कि सूबे के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा खुद विश्वविद्यालय में पढ़ा चुके हैं। वह विश्वविद्यालय की स्थिति और छात्रों की विवशता को बहुत अच्छे से समझते हैं, लेकिन आज वह चुप हैं।' उन्होंने कहा कि यदि विश्वविद्यालय ने नए सिस्टम को वापस नहीं लिया तो हम इस लड़ाई को लड़ते रहेंगे।


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