• shiv vardhan singh

जब पुलिस और फोन कंपनी के नंबर से धोखाधड़ी होने लगे, तो क्या करें?


ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचें? फर्ज़ कीजिए किसी सुबह आप नहा-धोकर, तैयार होकर काम पर पहुंचते हैं और आपके पास दिल्ली पुलिस का फोन आता है। पुलिस कहती है कि आपके नंबर से धमकियां दी जा रही हैं, ठगी की जा रही है और लोग शिकायत कर रहे हैं। अब आप परेशान! भई पुलिस थाने के लैंडलाइन नंबर से फोन आया है, तो बात सही ही होगी। 24 घंटे के अंदर आपकी सिम कंपनी भी फोन कर देती है कि आपके नंबर की शिकायत आ रही है। अब आप डबल श्योर हो जाते हैं कि ज़रूर कुछ गड़बड़ है. कुछ न समझ आने पर आप सिम कंपनी के बंदे को मांगी हुई सारी जानकारी दे देते हैं और उसका बताया सॉफ्टवेयर भी इन्स्टॉल कर लेते हैं। नतीजा ये निकलता है कि आपके क्रेडिट कार्ड के ज़रिए खाते से 2.95 लाख रुपए निकाल लिए जाते हैं। इस पूरे वाकये में तकनीक के अलावा कोई नई चीज़ नहीं है। लूट पहले भी होती थी, आज भी होती है, आगे भी होती रहेगी। पहले लोग चाकू-बंदूक के दम पर सड़कों पर लूटते थे, आज तकनीक के बूते बेवकूफ बनाकर सीधे आपके खाते में हाथ डालते हैं। ऐसे में सावधानी और जानकारी ही बचाव है। जो कहानी आपने पढ़ी, वो गाज़ियाबाद के शिप्रा कृष्णा विस्टा सोसायटी के अमित अग्रवाल की आपबीती है। अमित आनंद विहार इलाके में केमिकल का कारोबार करते हैं। 19 सितंबर की सुबह करीब साढ़े दस बजे उनके पास कनॉट प्लेस थाने के लैंडलाइन नंबर 011-23747100 से फोन आया था। अमित एयरटेल का सिम इस्तेमाल करते हैं। अगले दिन उन्हें एयरटेल के नंबर 9810012345 से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को कंपनी का एक अधिकारी नवीन पाठक बताया और दिल्ली पुलिस वाली बात दोहरा दी। एग्ज़िक्यूटिव के कहने पर अमित ने उसका दिया एक सॉफ्टवेयर फोन में इन्स्टॉल किया और 2.95 लाख की चपत लगवा बैठे।

क्या हुआ अमित के साथ?

अमित के साथ जो हुआ, उसे इंटरनेट की भाषा में स्पूफिंग अटैक (Spoofing Attack) कहा जाता है। स्पूफिंग यानी धोखा देना। इस तकनीक में कंप्यूटर के IP अड्रेस, ईमेल आईडी या फोन नंबर की नकल कर ली जाती है। वही जो अमित के साथ हुआ। हैकर ने पहले कनॉट प्लेस थाने के नंबर की स्पूफिंग करके फोन किया। अमित को लगा कि दिल्ली पुलिस का फोन है। फिर उसने एयरटेल के नंबर की स्पूफिंग करके फोन किया। अमित को लगा कि एयरटेल ने फोन किया है। हैकर ने अमित को भरोसा दिलाकर, डराकर एक सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करा दिया। इसके बाद अमित का फोन उसके कब्ज़े में आ गया। क्रेडिट कार्ड का पेमेंट करने के लिए फोन में जो OTP (वन टाइम पासवर्ड) आता है, वो हैकर के पास भी आया और उसने पैसा उड़ा दिए।

स्पूफिंग के साथ दिक्कत ये है कि इससे बचा नहीं जा सकता। ये किसी एक शहर से दूसरे शहर या एक राज्य से दूसरे राज्य ही नहीं, एक देश से दूसरे देश में भी की जा सकती है। मान लीजिए अमेरिका में बैठे एक हैकर ने किसी नंबर की स्पूफिंग करके भारत में फोन किया, तो उस पर भारत के कानून लागू नहीं होंगे। इसीलिए ऐसे हैकर्स को पकड़ना और उनके खिलाफ ऐक्शन लेना मुश्किल होता है। अमित को किसने कहां से फोन किया था, अभी तक पता नहीं चला है। अमित को जितने नंबर्स से फोन आए, उन्होंने वो सारे गूगल पर चेक किए और वो सही निकले। जब हैकर ने उनसे अपने फोन में Dotsecure सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल करने के लिए कहा, तो उन्होंने बिना जांचे कर लिया और यहीं उनसे गलती हो गए।

तो अगर आपके साथ भी ऐसा कुछ होता है, तो आप स्पूफिंग से तो नहीं बच सकते। हां, बचने के लिए आप इतना ज़रूर कर सकते हैं कि अपने फोन में कोई भी अनजान ऐप या सॉफ्टवेयर इन्स्टॉल न करें। अगर कोई आपको कोई लिंक देकर कुछ डाउनलोड या इन्स्टॉल करने के लिए कहता है, तो न करें। प्ले स्टोर से वही ऐप्स डाउनलोड करें, जिन्हें हज़ारों-लाखों लोगों ने डाउनलोड किया हो या जो सर्टिफाइड हों।

अमित के मामले में दिल्ली पुलिस ने पल्ला झाड़ लिया है. उनका तर्क है कि फोन आने के दौरान अमित गाज़ियाबाद में थे, तो वहीं की पुलिस जांच करेगी। गाज़ियाबाद पुलिस जांच करा रही है। अमित का क्रेडिट कार्ड अमेरिकन एक्सप्रेस का था, जिसने पैसा निकलने के चार दिन बाद मामले की जांच शुरू की। एयरटेल भी ये कहकर मामले से अलग हो गई कि अमित के नंबर की क्लोनिंग नहीं की गई थी, तो कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है। अमित को ऐसा लगता है कि इस मामले में एयरटेल या अमेरिकन एक्सप्रेस का कोई व्यक्ति शामिल है।

बहरहाल, अमित के साथ तो धोखा हो गया। आपके साथ न हो, इसके लिए हमारी बताई बातें ध्यान रखिए। नंबर के साथ फोन करने वाले का नाम वगैरह बताने वाली ऐप इस्तेमाल करें और कोई भी अनजान चीज़ अपने फोन में डाउनलोड या इन्स्टॉल न करें। सावधानी ही बचाव है।


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