• आकांशा त्रिपाठी

सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा अहम फैसला मंगलवार को, दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर लगेगी रोक ?


नई दिल्ली दागी उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाएगा। दरअसल, याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हो गए हों और पांच साल या उससे ज्यादा सजा का प्रावधान हो तो उन्हें चुनाव लड़ने से रोका जाए। सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संवैधानिक बेंच ने मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसके साथ ही नेताओं के बतौर वकील प्रैक्टिस करने के खिलाफ याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुनाएगा।

केंद्र ने कहा था कानून बनाना संसद का काम सुनवाई के दौरान अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा था कि यह कानून बनाना संसद के अधिकार-क्षेत्र में है और सुप्रीम कोर्ट को उसमें दखल नहीं देना चाहिए। वेणुगोपाल ने कहा था कि अदालत की मंशा प्रशंसनीय है लेकिन सवाल है कि क्या कोर्ट यह कर सकता है? मेरे हिसाब से नहीं। उन्होंने कहा था कि संविधान कहता है कि कोई भी तब तक निर्दोष है जब तक वह दोषी करार न दिया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि क्या चुनाव आयोग ऐसी व्यवस्था कर सकता है कि जो लोग क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं उनके बारे में डीटेल सार्वजनिक किया जाए। वेणुगोपाल ने याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि जहां तक सजा से पहले ही चुनाव लड़ने पर बैन का सवाल है तो कोई भी आदमी तब तक निर्दोष है जब तक कि कोर्ट उसे सजा नहीं दे देता और संविधान का प्रावधान यही कहता है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय के वकील ने कहा था कि 2014 में 34 फीसदी सांसद ऐसे संसद पहुंचे जिनके खिलाफ क्रिमिनल केस है। क्या कानून तोड़ने वाले कानून बना सकते हैं? सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच ने 8 मार्च 2016 को यह मामला संवैधानिक बेंच को रेफर किया था।

कानून की व्याख्या करना सुप्रीम कोर्ट का काम सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगुआई वाली संवैधानिक बेंच ने कहा था कि संसद का काम कानून बनाना है और हमारा काम कानून की व्याख्या करना है और अदालत की लक्ष्मण रेखा वही है। अदालत कानून नहीं बना सकती, यह संसद के अधिकार क्षेत्र में है। दागी नेताओं के खिलाफ मामले को फास्ट ट्रैक किया जा सकता है।

एक अन्य याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वकील कृष्णन वेणुगोपाल ने कहा था कि कोर्ट को आदेश पारित करना चाहिए कि राजनीतिक पार्टी ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत न दे जिनके खिलाफ केस है। चुनाव आयोग राजनीतिक पार्टी का रजिस्ट्रेशन करती है और वह कह सकती है कि ऐसे लोगों को पार्टी चुनाव लड़ने की इजाजत न दे।

क्या है कानूनी सवाल? संवैधानिक बेंच के सामने सवाल है कि क्या किसी आपराधिक मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने पर रोक लगनी चाहिए या नहीं। ट्रायल के किस स्टेज पर नेताओं को अयोग्य ठहराया जा सकता है?


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