• Umesh Singh,Delhi

सरकार की है नजर, मालदीव के अप्रत्याशित चुनाव नतीजे भारत के लिए बड़ा मौका


नई दिल्ली राजनीतिक अस्थिरता के बीच मालदीव में अप्रत्याशित रूप से विपक्षी उम्मीदवार की जीत ने भारत को बिगड़े संबंधों को दुरुस्त करने के लिए बड़ा मौका दे दिया है। मालदीव में राजनीतिक समीकरण ऐसे समय में पूरी तरह उलट गए हैं जब चीन वहां अपना सामरिक विस्तार कर रहा है। ऐसे में ये नतीजे चीन के लिए किसी झटके से कम नहीं हैं। दूसरे छोटे देशों की तरह चीन यहां भी कर्ज का बोझ लादकर देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है। आपको बता दें कि मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के कार्यकाल में भारत से संबंध कई बार तनावपूर्ण हो गए थे। इसे चीन से प्रभावित मालदीव सरकार के फैसले का असर माना गया था। सोमवार को वहां आए चुनाव परिणाम के मुताबिक मालदीव में विपक्षी उम्मीदवार इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने निवर्तमान राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन गयूम को हरा दिया है। ऐसे में भारत ने विपक्षी दलों की जीत पर अपनी खुशी जताने में देरी भी नहीं दिखाई। सोमवार को जैसे ही तस्वीर साफ हुई कि मालदीव में प्रजातंत्र की वापसी हो रही है, विदेश मंत्रालय ने तुरंत नतीजों का स्वागत किया।

विदेश मंत्रालय की ओर से बयान में कहा गया कि भारत उम्मीद करता है कि वहां का चुनाव आयोग जल्द से जल्द आधिकारिक रूप से नतीजों की पुष्टि करेगा। बयान में कहा गया कि यह चुनाव मालदीव में सिर्फ लोकतांत्रिक ताकतों की जीत को ही नहीं दर्शाता बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और कानूनी शासन की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। साथ ही भरोसा दिलाया गया कि ‘पड़ोसी प्रथम’ की नीति को ध्यान में रखते हुए मालदीव के साथ संबंध और बेहतर होंगे।

आपातकाल की घोषणा पर भारत ने की थी निंदा राष्ट्रपति यामीन ने जब पांच फरवरी को देश में आपातकाल की घोषणा की थी तब भारत और मालदीव के संबंधों में तनाव आ गया था। इसके बाद देश के उच्चतम न्यायालय ने विपक्षी नेताओं के एक समूह को रिहा करने का आदेश दिया था। इन नेताओं पर चलाए गए मुकदमों की व्यापक आलोचना हुई थी। भारत ने आपातकाल लगाने के लिए यामीन सरकार की आलोचना की थी और उससे राजनीतिक कैदियों को रिहा करके चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता बहाल करने को कहा था। आपातकाल 45 दिनों के बाद हटा लिया गया था।

शपथ होने तक रहेगी आशंका वहीं, जानकारों का मानना है कि विपक्षी दलों की जीत न सिर्फ भारत से संबंध बल्कि डेमोक्रैसी को भी मजबूत करने वाली है लेकिन जब तक नई सरकार का गठन नहीं हो जाए तब तक निवर्तमान राष्ट्रपति यामीन के अगले कदम के प्रति आश्वस्त नहीं होना चाहिए। चुनाव से पहले जिस तरह उन्होंने विपक्षी नेताओं को दबाने के अलावा संस्थानों को भी कब्जे में लेने की कोशिश की, उससे इस आशंका को बल मिलता है कि वह अब भी अंतिम कोशिश कर सकते हैं। इस मामले में चीन भी उनकी मदद कर सकता है।

चीन होगा दूर, भारत से करीबी विपक्षी दलों की जीत चीन के लिए बड़ा झटका है। आपको बता दें कि राष्ट्रपति यामीन चीन के प्रति झुकाव रखते हैं। भारत समर्थक विपक्षी दल लगातार चीन के निवेश पर संदेह जताते रहे हैं। उनका कहना है कि चीन देश के अंदर हस्तक्षेप कर रहा है। जाहिर है कि अगर चुनाव परिणाम के बाद नई सरकार का गठन होता है तो भारत के लिए सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मालदीव में अपनी साख दोबारा स्थापित करने का सुनहरा मौका मिल जाएगा। वहां लगभग एक दर्जन से अधिक दलों ने मिलकर संयुक्त रूप से चुनाव लड़ा था, अभी राजनीतिक स्थिरता कितनी होती है, यह देखना बाकी है।