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अमेरिका ने चीन पर रूस के हथियार खरीदने पर लगाया प्रतिबंध, 'भूल सुधार' की मांग


वॉशिंगटन चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को अमेरिका के सामने चीनी मिलिटरी पर लगाए प्रतिबंध हटाने की मांग की है। ट्रंप प्रशासन ने चीन पर रूस से फाइटर जेट खरीदने पर प्रतिबंध लगाया था। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'अमेरिका की तरफ से की गई इस गैरजिम्मेदाराना गतिविधि के लिए चीन मजबूती से अपनी नाराजगी दर्ज कराता है।' गेंग ने बताया कि चीन ने अमेरिका के सामने अधिकारिक तौर पर अपना विरोध दर्ज कराया है। गेंग ने कहा, 'अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों के सिद्धांतों का गंभीरता से उल्लंघन किया है। इससे दोनों देश और उनकी सेनाओं के बीच संबंध खराब हुए हैं। हम अमेरिका से मांग करते हैं कि वे तत्काल प्रभाव से भूल सुधार करें और अपने तथाकथित प्रतिबंध को वापस ले अन्यथा उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे।' अमेरिका का कहना है कि चीन की सेना ने अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए प्रतिबंध का उल्लंघन किया है। अमेरिकी चुनाव में रूस द्वारा दखलअंदाजी करने के लिए रूस पर यह प्रतिबंध लगाया गया था। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह चीन के इक्विपमेंट डिवेलपमेंट डिपार्टमेंट (ईडीडी) पर तुरंत प्रतिबंध लगाता है। ईडीडी ही वह संस्था है, जिसके जरिए चीन को हथियार खरीदे या बेचे जाते हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह प्रतिबंध चीन द्वारा रूस से एसयू-35 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एस-400 एयर मिसाइल से संबंधित इक्विपमेंट खरीदने के लिए लगाया गया है। अमेरिका ने ईडीडी और उसके प्रमुख ली शांग्फु पर एक्सपोर्ट लाइसेंस के लिए अप्लाई करने पर प्रतिबंध लगाया है।


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