• संवाददाता

अफगानिस्तान में भारत के विरोध, चीन से बढ़ती दोस्ती को लेकर पाकिस्तान पर सख्त हुआ अमेरिका


वॉशिंगटन/इस्लामाबाद पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। इसका हालिया उदाहरण अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को दी जाने वाली 30 करोड़ की सैन्य सहायता को रोकना है। एक तो पाकिस्तान आतंक के खिलाफ ऐक्शन लेने में असफल रहा है, तो दूसरी तरफ अफगानिस्तान के संदर्भ में उसने भारत की किसी भूमिका को भी स्वीकार करने से इनकार किया है। ऐसी स्थिति में अमेरिका लगातार पाकिस्तान पर दबाव बनाए हुए है कि अगर वॉशिंगटन से अच्छे रिश्ते चाहिए तो उसे अफगानिस्तान में अमेरिकी रणनीति का समर्थन करना होगा। आपको बता दें कि अमेरिका अफगानिस्तान के संदर्भ में भारत की अहम भूमिका को स्वीकार करता रहा है। उधर, पाकिस्तान के सूचना व प्रसारण मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि उनका देश इस बात से सहमत नहीं है कि अफगानिस्तान में शांति बहाली में भारत की कोई भूमिका है। आतंकवाद से लड़ने और अफगानिस्तान में अमेरिकी रणनीति के अनुकूल व्यवहार नहीं करने को लेकर पाकिस्तान अब वॉशिंगटन के निशाने पर है। द डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक अब अमेरिका पाकिस्तान पर मिलिटरी और कूटनीतिक, दोनों तरह के दबाव बना रहा है। अमेरिका ने पाक को अपना पहला कठोर संदेश पिछले हफ्ते भेजा जब विदेश मंत्री पॉम्पियो ने इमरान खान से बात की। पॉम्पियो ने सभी तरह के आतंकवाद के खिलाफ ऐक्शन लेने को कहा। दूसरा कठोर संदेश भी पिछले हफ्ते तब आया जब अमेरिका के रक्षा मंत्री ने एक न्यूज ब्रीफिंग के दौरान इसकी जानकारी दी कि पॉम्पियो और अमेरिकी मिलिटरी चीफ पाकिस्तान जाएंगे। जेम्स मैटिस ने कहा कि ये आतंक के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान को उसकी भूमिका अदा करने को कहेंगे। इसके बाद शनिवार को अमेरिका ने पाकिस्तान को 30 करोड़ डॉलर की सैन्य सहायता रोकने की घोषणा ही कर दी। इसके बाद पेंटागन के एक सीनियर अधिकारी रान्डेल ने अपनी टिप्पणी में अमेरिकी सख्ती का नेक्स्ट लेवल दिखाया। रान्डेल ने एक कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा सहायता तबतक फिर से शुरू नहीं की जाएगी जबतक अफगानिस्तान वॉर का अंत नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ पाकिस्तान के बढ़ते आर्थिक संबंध की वजह से भी अमेरिका चिंतित है। पेंटागन के एशियन ऐंड पसिफिक सिक्यॉरिटी अफेयर्स के असिस्टेंट सेक्रटरी ऑफ डिफेंस ने संकेत दिए कि वॉशिंगटन और प्रतिबंध लगा सकता है। हालांकि बाद में उन्होंने थोड़ी सी नरमी दिखाते हुए कहा कि अमेरिका पाकिस्तान की नई इमरान सरकार को थोड़ा वक्त देने के लिए तैयार है ताकि वह अपनी नीतियां तैयार कर सकें। उन्होंने कहा कि इमरान ने चुनाव पहले क्या कहा और सरकार बनाने के बाद क्या बोले, इससे उतर हम उन्हें भारत के साथ संबंध सुधारने के मौके देना चाहते हैं।