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लालू यादव का रांची CBI कोर्ट में सरेंडर, जेल जाने के बाद अब अस्पताल में हुए भर्ती


रांची चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में सजा काट रहे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने गुरुवार को रांची की सीबीआई कोर्ट में सरेंडर कर दिया। करीब 100 दिन बाद गुरुवार सुबह लालू रांची की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में स्पेशल कोर्ट में पहुंचे और इसके बाद उन्होंने यहां आत्मसमर्पण कर कानूनी कार्रवाई पूरी की। इसके बाद सीबीआई कोर्ट ने लालू को हिरासत में लेकर बिरसा मुंडा जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया। इस दौरान लालू के वकीलों ने कोर्ट से उन्हें रिम्स अस्पताल में भर्ती कराने की मांग की, लेकिन कोर्ट ने जेल प्रशासन को लालू के स्वास्थ्य का खास ध्यान रखने के निर्देश देते हुए उन्हें जेल भेजने का निर्णय बरकरार रखा। इसके बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव को जेल भेजा गया, जहां चिकित्सकीय जांच के बाद दोपहर करीब 3 बजे रांची स्थित राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में भर्ती कराया गया। इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने लालू यादव की जमानत अवधि को बढ़ाने से इनकार करते हुए उनकी अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्हें 30 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करने के निर्देेश दिए गए थे। लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में ठहरे लालू ने झारखंड विकास मोर्चा के चीफ बाबूलाल मरांडी समेत कई सियासी लोगों से मुलाकात की थी। लालू की मरांडी से काफी देर बातचीत हुई।

लालू यादव के साथ बाबूलाल मरांडी

मेरे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार की है: लालू मरांडी से मुलाकात के बाद लालू प्रसाद यादव रांची सीबीआई कोर्ट में सरेंडर करने के लिए रवाना हुए थे। इस दौरान गेस्ट हाउस से निकलते हुए लालू प्रसाद यादव ने कहा कि मेरी कोई इच्छा नहीं है। सरकार मुझे जहां चाहे वहां पर रख सकती है और मेरे स्वास्थ्य की जिम्मेदारी भी अब सिर्फ सरकार की है।

झारखंड हाई कोर्ट का जमानत अवधि बढ़ाने से इनकार इससे पूर्व झारखंड हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव की चारा घोटाले के देवघर कोषागार समेत सभी तीन मामलों में स्वास्थ्य कारणों से दी गई अंतरिम बेल की अवधि को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था और उन्हें विशेष अदालत के सामने आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि जरूरत होने पर अब लालू का रांची के रिम्स अस्पताल में ही इलाज होगा।

सीबीआई के वकील ने किया था विरोध मामले की सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से कोर्ट में पेश हुए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने इलाज के लिए लालू यादव की अंतरिम जमानत तीन महीने और बढ़ाने का अनुरोध किया था। अभिषेक मनु सिंघवी की दलील का सीबीआई के अधिवक्ता राजीव सिन्हा ने विरोध किया था जिसके बाद न्यायालय ने लालू की अंतरिम जमानत की अवधि आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया था। 30 अगस्त तक दी गई थी जमानत इससे पहले लालू यादव को 20 अगस्त की सुनवाई में 27 अगस्त तक के लिए अंतरिम जमानत दे दी गई थी। लालू के वकीलों ने अदालत से अनुरोध किया था कि अंतरिम जमानत की इस अवधि को कम से कम 30 अगस्त तक बढ़ा दिया जाए जिससे अभियुक्त का सीबीआई अदालत में आत्मसमर्पण कराया जा सके। कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उनकी जमानत की अवधि 30 अगस्त तक इस शर्त के साथ बढ़ा दी कि हर हाल में वह 30 अगस्त तक सीबीआई की रांची के विशेष अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण कर देंगे। इसी आदेश के मद्देनजर लालू यादव बुधवार को पटना से रांची पहुंचे थे।


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