• कीर्ति देशवाल,दिल्ली

माओवादी लिंक पर गिरफ्तारी पर संग्रामः NHRC का नोटिस, माया भी बोलीं


नई दिल्ली भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में कथित नक्सली लिंक को लेकर वामपंथी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर सियासी संग्राम जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) सुप्रीमो मायावती ने इसे दलितों की बात करने वालों की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने इसके विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स का जिक्र करते हुए कहा कि ऐक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी में तय मानकों का पालन नहीं किया गया है। बता दें कि इन गिरफ्तारियों का वामपंथी संगठन विरोध कर रहे हैं। इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी अपील की गई है। 28 अगस्त को पुणे पुलिस ने भीमा कोरेगांव हिंसा, नक्सलियों से संबंधों और गैर-कानूनी गतिविधियों के आरोपों में 5 लोगों को अरेस्ट किया है। इनमें वरवर राव, सुधा भारद्वाज और गौतम नवलखा शामिल हैं।

नक्सल लिंकः अरेस्ट पर बवाल, SC में केस

पुलिस ने बिना सबूत नहीं की गिरफ्तारीः महाराष्ट्र के गृहमंत्री वहीं, महाराष्ट्र के गृह मंत्री दीपक केसरकर ने कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर पुणे पुलिस का बचाव किया है। उन्होंने कहा, 'जब तक पुलिस के पास कोई प्रूफ नहीं होता, तब तक वह ऐक्शन नहीं लेती, लेकिन प्रूफ होने पर कोर्ट पुलिस को कस्टडी देती है। साफ है कि सरकार के पास सबूत हैं और दूसरी बात कि लोग कैसे नक्सलवाद का समर्थन कर सकते हैं। ये लोग अपनी ही सरकार चला रहे हैं, क्या यह लोकतंत्र के लिए अच्छा है?'

मानवाधिकार आयोग ने दिया नोटिस मानवाधिकार आयोग ने इस संबंध में महाराष्ट्र के चीफ सेक्रटरी और डीजीपी को नोटिस जारी कर पूरी प्रक्रिया के संबंध में 4 सप्ताह के भीतर जानकारी मांगी है। इस बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने गौतम नवलखा की ट्रांजिट रिमांड पर यह कहते हुए रोक लगा दी है कि पुलिस ने इस बात को लेकर संतोषजनकर जवाब नहीं दिया है कि आखिर उन्हें किस आरोप में अरेस्ट किया गया है। यही नहीं सुधा भारद्वाज की ट्रांजिट रिमांड की अर्जी भी फरीदाबाद की चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित है।

नक्सल लिंक: जानिए कौन हैं अरेस्ट ऐक्टिविस्ट

ऐक्टिविस्ट ने बताया कि उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया है, जिसके लिए उसे गिरफ्तार किया गया है। सुधा के मुताबिक एफआईआर में उनका नाम तक शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ उनकी विचारधारा के चलते प्रताड़ित किया जा रहा है। गौतम नवलखा के मामले में अदालत ने पुणे पुलिस से यह पूछा है बिना किसी स्थानीय गवाह के उसने ट्रांजिट रिमांड की मांग कैसे की।

माया बोलीं, दबाई जा रही दलितों की बात करने वालों की आवाज इस बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी 5 ऐक्टिविस्ट्स की गिरफ्तारी की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार की ओर से सत्ता का बेजा इस्तेमाल करने जैसा है। उन्होंने कहा कि सरकार उन आवाजों को दबाना चाहती है, जो दलितों के अधिकारों का समर्थन करते हैं। माया ने कहा, 'ऐसा करके बीजेपी महाराष्ट्र और केंद्र में अपनी सरकारों की असफलता को छिपाने का प्रयास कर रही है।'