• Umesh Singh,Delhi

सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार से पूछा, नेताओं के केसों के लिए कितनी विशेष अदालतें बनीं


नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि उसके पिछले साल के आदेश के बाद अबतक नेताओं के मामलों के लिए कितनी विशेष अदालतें बनाई गई हैं। सर्वोच्च अदालत ने पिछली साल 14 दिसंबर को केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि राजनेताओं से जुड़े मामलों की खास जांच के लिए 12 विशेष अदालतें बनाई जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इन विशेष अदालतों को एक मार्च तक शुरू हो जाना चाहिए। जस्टिस रंजन गोगोई को नेतृत्व वाली बेंच ने मंगलवार को मोदी सरकार से विशेष अदालतों, सेशंस या मैजिस्ट्रियल कोर्ट और उनके क्षेत्रीय अधिकार की जानकारी देने को कहा है। बेंच ने सरकार से पूछा है कि मैजिस्ट्रियल और सत्र न्यायालयों के समक्ष लंबित मामलों के अलावा इन विशेष अदालतों के सामने भी अटके हुए केसों की जानकारी दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह पूछा कि उसके द्वारा बनाई गई विशेष अदालतों के अलावा भी क्या सरकार ने अन्य अतिरिक्त अदालतों के गठन का इरादा दिखाया। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 28 अगस्त की तारीख तय की है। दिल्ली हाई कोर्ट की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने बेंच को जानकारी दी कि एक सेशंस और एक मैजिस्ट्रियल, दो विशेष अदालतों का अबतक गठन किया जा चुका है। बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को 28 अगस्त या इससे पहले इस संबंध में अन्य जानकारियों के साथ हलफनामा दाखिल करने को कहा है। इसके अलावा यह भी जानकारी मांगी गई है कि इन दोनों विशेष अदालतों को कितने मामले ट्रांसफर किए गए हैं। सुनवाई के दौरान इस मामले के याचिकाकर्ता और ऐडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय ने कहा कि केंद्र ने इस संबंध में एक हलफनामा दाखिल किया है लेकिन उसकी कॉपी अबतक उन्हें नहीं मिली है। केंद्र की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता ने बेंच को बताया कि इस साल मार्च में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी कॉपी याची को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। पिछले साल एक नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा था कि 10 मार्च को दिए गए एक साल टाइम फ्रेम में विधायकों और सांसदों के खिलाफ 1581 मामलों (2014 के आम चुनावों के शपथ पत्र के मुताबिक) में से कितने केसों का नतीजा निकला। कितने नेता दोषी या दोष मुक्त सिद्ध हुए। कोर्ट ने इसमें आगे जोड़ा कि 2014 से 2017 के बीच क्या किसी वर्तमान या पूर्व विधायक या सांसद के खिलाफ आपराधिक मामला दाखिल किया गया? और अगर ऐसा हुआ तो इसकी भी विस्तृत जानकारी दें। आपक बता दें कि सुप्रीम कोर्ट उन याचिकओं पर सुनवाई कर रहा है जिसमे सजायाफ्ता नेताओं को जेल की सजा के बाद छह साल के लिए चुनाव लड़ने के अयोग्य बनाने संबंधी जनप्रतिनिधित्व कानून के प्रावधानों को संविधान के अनुरूप नहीं होने की घोषणा करने का आग्रह किया गया है।


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