• अजय नौटियाल, नई दिल्ली

डीएनडी फ्लाइवे: SC ने CAG से पूछा, क्या सीलबंद लिफाफे में पेश रिपोर्ट सार्वजनिक की जा सकती है


नई दिल्ली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट (डीएनडी) फ्लाइवे परियोजना की पूरी लागत वसूल नहीं होने संबंधी नोएडा टोल ब्रिज कंपनी के दावों के बारे में उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस समय यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के पास है। जस्टिस मदन बी. लोकुर, जस्टिस एस. अब्दुल नजीर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने CAG के वकील से सवाल किया, 'इस रिपोर्ट को सार्वजनिक करने के बारे में क्या उसे कोई आपत्ति है।' इस पर वकील ने कहा कि रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। बेंच ने कहा, 'आप ऐसा कहते हुए हलफनामा दाखिल करें।' बेंच ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए स्थगित कर दी। सुप्रीम कोर्ट 26 अक्टूबर, 2016 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड की अपील पर सुनवाई कर रही थी। हाई कोर्ट ने फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेन्ट्स वेलफेयर असोसिएशन की याचिका पर अपने फैसले में कहा था कि अब इस 9.2 किलोमीटर लंबे फ्लाइवे पर वाहनों से कोई भी टोल नहीं वसूल किया जाएगा। इस मामले में सुनवाई के दौरान नोएडा टोल ब्रिज कंपनी ने कोर्ट के इस साल 3 अप्रैल के आदेश का हवाला दिया और दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने CAG की रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में रखने के बारे में टिप्पणी की थी। बेंच ने कहा, 'आप (नोएडा टोल ब्रिज कंपनी) CAG को पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करा रहे हैं। आपने CAG को वह जानकारी नहीं दी जो वह चाहता था। ऐसी स्थिति में क्या करना होगा।' इस पर वकील ने कहा कि उन्होंने इस मामले में सारी जानकारी CAG को उपलब्ध कराया है और आवश्यक होने पर और जानकारी भी उपलब्ध कराई जाएगी। कोर्ट ने पिछले साल नवंबर में CAG से इस मामले में सहयोग करने और कंपनी के इस दावे का सत्यापन करने के लिए कहा था कि इस परियोजना की कुल लागत अभी तक वसूल नहीं हो सकी है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 नवंबर 2016 को नोएडा टोल ब्रिज कंपनी की दलीलों से असहमति वयक्त करते हुए कहा था कि डीएनडी फिलहाल टोल मुक्त रहेगा। कंपनी का कहना था कि हाई कोर्ट के फैसले से उसे अपूर्णीय क्षति होगी।