कॉस्मोस बैंक हैकिंग से उत्तर कोरियाई कनेक्शन?

 

नई दिल्ली 
हैकरों ने पिछले हफ्ते 112 वर्ष पुराने पुणे के कॉस्मोस कोऑपरेटिव बैंक पर साइबर हमला करके 94 करोड़ से ज्यादा रुपये कई विदेशी बैंकों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। शनिवार को दोपहर 3 बजे से रात 10 बजे के बीच 28 देशों के 12,000 से ज्यादा एटीएम से पैसे निकाले गए। इसके अलावा, उसी दौरान भारत में अलग-अलग जगहों से 2,800 ट्रांजैक्शन के जरिए हैकरों ने 2.5 करोड़ रुपये उड़ा दिए। सोमवार को सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक टेलिकम्युनिकेशंस (SWIFT) सुविधा का इस्तेमाल करते हुए 13.5 करोड़ रुपये हॉन्ग कॉन्ग स्थित अकाउंट में ट्रांसफर किए गए। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह हैकिंग का कोई साधारण मामला नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे नॉर्थ कोरिया के कुख्यात हैकिंग ग्रुप लजारस का हाथ हो सकता है, जिसने दुनियाभर में कुछ बड़ी हैकिंग की वारदात को अंजाम दिया है। इस हैकिंग ग्रुप ने सोनी पिक्चर्स के डेटा को लीक और नष्ट किया था। इसके अलावा इसने पोलैंड और बांग्लादेश के बैंकों से करोड़ों रुपये उड़ाए थे। 

हैकरों ने वास्तव में क्या किया? 
पेमेंट एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस फ्रॉड को सर्वर के फायरवॉल में सेंधमारी के जरिए अंजाम दिया गया। फायरवॉल ही एटीएम ट्रांजैक्शंस को अधिकृत करता है। इसके बाद, एक प्रॉक्सी सर्वर तैयार किया गया और ट्रांजैक्शंस को उसी फेक या प्रॉक्सी सर्वर से ऑथराइज्ड किया गया। इसका मतलब यह हुआ कि एटीएम को बिना इसकी जांच किए कि कार्ड असली है नहीं, कैश रिलीज करने के निर्देश मिले थे। 

अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई ने पहले ही चेतावनी दी थी कि साइबर अपराधी ग्लोबल बैंकों पर 'एटीएम कैश आउट' फ्रॉड के जरिए साइबर हमले की योजना बना रहे हैं। 'एटीएम कैश आउट' फ्रॉड में बैंक या कार्ड पेमेंट प्रोसेसर को निशाना बनाया जाता है तो गैरअधिकृत पहुंच के जरिए कुछ ही घंटों में कैश निकाल लिए जाते हैं। 

इंटरनैशनल मीडिया ने एफबीआई की चेतावनी के बारे में सोमवार को डीटेल में रिपोर्टिंग किया था, लेकिन तबतक कॉस्मोस बैंक के साथ पहले ही फ्रॉड हो चुका था। 

क्या जमाकर्ताओं की पूंजी सुरक्षित है? 
1. बैंक का कहना है कि खाताधारकों का पैसा सुरक्षित है और भविष्य में भी सुरक्षित रहेगा क्योंकि हैकरों ने प्रॉक्सी स्विच को पेमेंट गेटवे पर इस्तेमाल किया था न कि कोर बैंकिंग सिस्टम पर। 
2. बैंक ने साइबर हमले की जांच के लिए एक पेशेवर फरेंसिक एजेंसी को नियुक्त किया है। 
3. बैंक के सर्वर, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और एटीएम सर्विस को सस्पेंड कर दिया गया है। 
4. बैंक ने कहा कि इसे फिर शुरू करने में कुछ समय लग सकता है क्योंकि बैंक अपने सिस्टम को फुलप्रूफ बनाने की कवायद में है। 

कॉस्मोस के चेयरमैन मिलिंद काले ने बताया कि जमाकर्ताओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'हमारे सिक्यॉरिटी सिस्टम में सेंध नहीं लगी है। जुलाई 2018 में ही आरबीआई ने बैंक के आईटी सिस्टम का मुआयना किया था। आरबीआई ने 4 अधिकारियों को जांच करने और असल नुकसान का जायजा लेने के लिए भेजा है।' बैंक के एमडी सुहास गोखले खाताधारकों को एसएमएस भेजकर बता रहे हैं कि घबराने वाली कोई बात नहीं है क्योंकि कोर बैंकिंग सिस्टम पर हमला नहीं हुआ है। 

इंस्पेक्टर वैशाली गलांडे ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, 'हमने आईटी ऐक्ट के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।' 

काले ने बताया कि साइबर हमला पकड़ में आने के बाद से ही बैंक ने अपने सर्वर और सभी इंटरनेट बैंकिंग ऐप्लिकेशनों को बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि आरबीआई ने संदिग्ध लेनदेन को लेकर बैंक को अलर्ट किया था।

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