SC/ST ऐक्ट में प्रावधान के लिए इसी सत्र में विधेयक पेश करेगी सरकार

August 1, 2018

 

नई दिल्ली 
कैबिनेट ने बुधवार को दलितों को किसी भी तरह के अत्याचार से बचाने के लिए प्रावधानों को बहाल करने वाले विधेयक को पेश करने का फैसला लिया है। सूत्रों का कहना है कि इस विधेयक को इसी सत्र के दौरान पास कराया जाएगा। दलित संगठन और सरकार की सहयोगी पार्टी एलजेपी (लोक जनशक्ति पार्टी) के दबाव के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में यह फैसला लिया गया। सूत्रों की मानें तो पीएम मोदी ने मंत्रिमंडल को इस प्रावधान में कोई भी बदलाव न करने का निर्देश दिया है।  
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा इस कानून के तहत उचित जांच के बाद ही आरोपी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया गया था, जिसके बाद दलित हितों की रक्षा को लेकर बहस शुरू हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में 2 अप्रैल को देश भर में दलित संगठनों ने काफी बड़ा आंदोलन भी किया था। आंदोलन इतना उग्र था कि सरकार को इस मामले में अध्यादेश लाने का मन भी बनाना पड़ा। 

दलित संगठनों ने सरकार को चेतावनी दी है कि उनकी मांग नहीं मानी गई तो वह 9 अगस्त को फिर आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर जाएंगे। पिछले हफ्ते सरकार की सहयोगी पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी के नेता रामविलास पासवान ने भी दलितों की मांग मानने के अलावा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस गोयल को एनजीटी के चेयरमैन पद से हटाने की मांग भी कर रहे हैं। जस्टिस जज उन दो जजों में से एक हैं, जिन्होंने अनुसूचित जाति एवं जनजाति उत्पीड़न रोकथाम अधिनियम के संबंध में आदेश दिया था। 

एलजेपी ने भी अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिशों के तहत एससी-एसटी ऐक्ट को लेकर बीजेपी को अल्टिमेटम दे दिया है। एलजेपी ने कहा है कि बीजेपी को समर्थन मुद्दों पर आधारित है। पार्टी ने दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ कानून में सख्त प्रावधान करने तथा 9 अगस्त तक एनजीटी के अध्यक्ष को पद से हटाने की मांग की है। जनता दल (यूनाईटेड) ने दलित ऐक्ट के कड़े प्रावधानों को अध्यादेश के जरिए बहाल करने की एलजीपी की मांग का समर्थन किया है। 

आयोजक 131 सांसदों और 1000 से ज्यादा विधायकों को पत्र लिखकर कहेंगे कि वह आरक्षित सीटों का ही प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनका अपने समुदाय के प्रति दायित्व भी है। 9 अगस्त को बुलाए गए बंद के लिए 20 मांगें सामने रखी गई हैं। सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी ऐक्ट में किए गए बदलावों को निरस्त करने के लिए ऑर्डिनेंस लाया जाए।

 

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