• अजय नौटियाल, नई दिल्ली

जस्टिस केएम जोसफ के नाम पर बनी सहमति, सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने फिर भेजा नाम


नई दिल्ली चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले 5 वरिष्ठ जजों की सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ का नाम दोबारा सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त करने के लिए सिफारिश का फैसला किया है। बता दें कि इससे पहले 26 अप्रैल को केंद्र सरकार ने जस्टिस जोसेफ को प्रमोट करने की कलीजियम की सिफारिश वापस भेज दी थी। केंद्र ने तर्क रखा था कि यह प्रस्ताव टॉप कोर्ट के पैरामीटर्स के तहत नहीं है। केंद्र की ओर से यह भी कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में केरल से पर्याप्त प्रतिनिधित्व है, जहां से वह आते हैं। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर प्रमोशन के लिए उनकी वरिष्ठता पर भी सवाल उठाए थे। कलीजियम ने साथ ही मद्रास हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बनर्जी और उड़ीसा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विनीत सरन का नाम सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्ति के लिए सिफारिश करने का फैसला किया है। कलीजियम ने इसके अलावा कई और हाई कोर्ट के जजों को भी दूसरे हाई कोर्ट में नियुक्ति की अनुशंसा की है। कलीजियम ने दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल को जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलकत्ता हाई कोर्ट के सीनियर जस्टिस अनिरूद्ध बोस को झारखंड हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की गई है। सुप्रीम कोर्ट कलीजियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस वीके तहिलरमानी को मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। कलीजियम ने गुजरात हाई कोर्ट के एमआर शाह को पटना हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की अनुशंसा की है। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि जस्टिस जस्ती चेलामेश्वर की सदस्यता वाले कलीजियम की एकमत से की गई सिफारिश के आधार पर उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को देश की शीर्ष अदालत में जज बनाने की राह में केंद्र सरकार के बाधा डालने की गुंजाइश नहीं है। चेलामेश्वर 22 जून को रिटायर हो गए थे, जिससे यह अटकल लगने लगी कि जोसेफ की नियुक्ति की सिफारिश वाला 11 मई के प्रस्ताव पर नए सिरे से सहमति लेनी होगी क्योंकि कलीजियम का पुनर्गठन हुआ। जस्टिस ए के सीकरी ने कलीजियम में चेलामेश्वर की जगह ली थी। सूत्रों ने बताया कि प्रस्ताव पर दस्तखत किए जा चुके हैं और वह वैध है। उन्होंने कहा कि उसे नए सिरे से दोहराने या नई सिफारिश करने की जरूरत नहीं है। देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाले एससी कलीजियम ने 11 मई को 'सैद्धांतिक रूप से एकमत से सहमति जताई थी कि उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश दोहराई जानी चाहिए।' कलीजियम ने यह भी कहा था कि दोहराई जाने वाली सिफारिश के साथ अन्य 'उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने की सिफारिश भी भेजी जानी चाहिए।' दोबारा नाम जाने पर वापसी का विकल्प नहीं है सरकार के पास कलीजियम अगर दोबारा किसी नाम को सरकार के पास भेजती है तो सरकार उसे वापस नहीं कर सकती। सुप्रीम कोर्ट के ऐडवोकेट एमएल लाहौटी बताते हैं कि ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा नाम सरकार को भेजा हो और उसे मंजूर न किया गया हो। सरकार दोबारा नाम भेजे जाने के बाद वापस नहीं कर सकती।


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