• लेखिका वन्दिता मिश्रा

ब्रू जनजाति और उनका पुनः समावेशन


ब्रू (BRU) जनजातीय समुदाय पूर्वोत्तर क्षेत्र का एक प्रमुख समुदाय है,जोकि हाल ही में गृह मंत्रालय के साथ हुए एक समझौते से चर्चा में है. ब्रू जनजाति त्रिपुरा में “रेयांग” नाम से सरकारी दस्तावेजों में है. रेयांग त्रिपुरा की 21 अनुसूचित जनजातियों में से एक है. इसका वास्तविक नाम ब्रू जनजाति ही है जोकि दुर्घटनावश भारत सरकार के जनसँख्या आंकणों में रेयांग के नाम से दर्ज हो गयी है. यह जनजाति मुख्यतया त्रिपुरा तथा मिज़ोरम में काफी संख्या में है इसके अतिरिक्त असम, मणिपुर तथा बांग्लादेश में भी ब्रू जनजाति काफी संख्या में निवास करती है. ये “कोकबोरोक” भाषा बोलते हैं जिसका अर्थ होता है “लोगों की भाषा”.

वर्ष 1995 में समस्या की शुरुआत मिजोरम में हुए एक अंतर सामुदायिक संघर्ष से हुई जिसने ब्रू जनजाति के लोगों को भारी संख्या में मिजोरम से त्रिपुरा पलायन करने पर मजबूर कर दिया. मिजोरम से त्रिपुरा गए लगभग 32 हजार ब्रू जनजाति के लोगों को फिर से मिजोरम में स्थापित करने के लिए भारत सरकार की तरफ से लगातार प्रयास किये जाता रहा है.1995 में मिजोरम में दो बड़े मिज़ो संगठन “यंग मिज़ो एसोसिएशन” तथा “मिज़ो स्टूडेंट्स एसोसिएशन” ब्रू समुदाय का लगातार विरोध कर उन्हें राज्य की निर्वाचक नामावली में ना जोड़े जाने की मांग करते रहे हैं, इन संगठनों का कहना है कि ये समुदाय मिजोरम का मूल निवासी समुदाय नहीं है. इस विरोध से ब्रू समुदाय में भी प्रतिक्रियावादी मिलिटेंट संगठन “ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट” तथा राजनैतिक संगठन “ब्रू नेशनल यूनियन” का जन्म हुआ. परन्तु संघर्ष का तात्कालिक कारण बनी वर्ष 1997 की वो घटना जिसमे ब्रू नेशनल लिबरेशन फ्रंट ने मिजोरम के “मामित” जिले में स्थित दम्फा टाइगर रिज़र्व में एक मिज़ो फ़ॉरेस्ट गार्ड को गोली मार दी, इससे पूरे मिजोरम में एंटी-ब्रू हिंसक आन्दोलन चल पड़ा और अंततः ब्रू समुदाय के हजारों लोगों को त्रिपुरा पलायन करना पड़ा. पलायन करनेवाले ब्रू त्रिपुरा मिजोरम सीमा में और फिर धीरे धीरे लगभग पूरे त्रिपुरा में फैले शरणार्थी शिविरों में बहुत ही दयनीय स्थिति में 21 सालों से जीवन बिता रहे हैं. “ब्रू डिसप्लेस्ड पीपुल्स फोरम” , जो कि हाल के समझौते में एक प्रमुख वार्ताकार है , के अनुसार त्रिपुरा सरकार इस समुदाय को न कोई मेडिकल सुविधा देती रही है और ना ही जीवन बेहतर करने के अन्य साधन.

पहले चरण के प्रत्यावर्तन की शुरुआत नवम्बर 2010 में हुई जो कि बुरी तरह फेल हो गयी और बाद में बाद में वर्ष 2011,2012 और फिर 2015 में भी किये गए प्रयास पूरी तरह विफल रहे. गृह मंत्रालय,सिविल सोसाइटी तथा प्रमुख मिज़ो संगठनों की शान्ति वार्ता प्रक्रिया की वर्तमान शुरुआत वर्ष 2015 में हुई और अंततः जुलाई में एक व्यापक प्रत्यावर्तन समझौते पर सहमति बनती दिखी. इस ऐतिहासिक समझौते के अनुसार 435 करोड़ रूपए के वित्तीय पैकेज पर सहमति बन गयी है.जिसके अंतर्गत- प्रत्येक 5087 ब्रू परिवारों को 4 लाख रूपए का फिक्स्ड डिपाजिट कराया जायेगा, 5000 रुपये प्रति महीने प्रति परिवार तथा मुफ्त राशन की दो वर्ष तक सुविधा दी जाएगी,साथ ही 1.5 लाख रूपये प्रति परिवार घर बनाने में सहयोग के लिए दिया जायेगा. आधार कार्ड ,राशन कार्ड, झूम खेती के लिए जगह, एकलव्य रेजिडेंशियल स्कूल तथा मुफ्त यात्रा जो कि त्रिपुरा से मिजोरम तक की होगी उसे शामिल किया जायेगा. राजनीतिक अधिकारों के लिए चुनाव आयोग को निर्देश दे दिया गया है धीरे धीरे सभी लोगों को मिजोरम निर्वाचक नामावली में दर्ज कर दिया जायेगा अर्थात अब ये समुदाय मिजोरम में वोटर भी होगा,जो कि निश्चित रूप से उन्हें एक सशक्त करने वाला कदम है. परन्तु मिजोरम सरकार ने ब्रू समुदाय की उस मांग को मनाने से साफ़ इनकार कर दिया है जिसके तहत एक अलग गाँव की मांग की गयी थी,बजाय इसके मिज़ो सरकार इन ब्रू परिवारों को वहीँ बसाएगी जहाँ से ये पलायन किये थे.परन्तु ये क्या 3 जुलाई को हुए इस समझौते, जिसमे ब्रू परिवारों को 30 सितम्बर 2018 तक प्रत्यावर्तित करना था,पर 15 दिनों के अन्दर ही ग्रहण लगता दिखायी दिया.16 जुलाई को समझौते के एक एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता ब्रू डिसप्लेस्ड पीपुल्स फोरम ने समझौते से हाँथ खींचते हुए कहा की उनका समुदाय इन मांगों का हिंसक विरोध कर रहा है. ब्रू समुदाय नहीं चाहता की 4 लाख की राशि फिक्स्ड डिपाजिट में दी जाये. बजाय इसके वो सेविंग अकाउंट में ये राशि चाहते हैं,साथ ही अलग गाँव,विधानसभा सीट, अलग प्रशासनिक काउन्सिल तथा प्रत्येक परिवार से एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग.इन सभी मांगो को वो छोड़ने को तैयार नहीं.

दो संगठन जो 21 वर्षों से एक दूसरे को देखना भी नहीं चाहते थे,कम से कम एक टेबल पर बैठकर कुछ बातों पर तो सहमत हुए! कुछ शर्तें कभी पूरी नहीं होती और शांति कभी भी मनमानी शर्तों पर नहीं प्राप्त की जा सकती. पूरी आशा है सरकार सहित सभी पक्षकार कुछ कुछ झुकेंगे और आगे बढ़ेंगे ताकि उस क्षेत्र में प्रत्यावर्तन के साथ साथ शान्ति एवं समृद्धि स्थापित की जा सके

vandita mishra