• शिव वर्धन सिंह, कानपुर

गुणात्मक शोध पत्र लेखन पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन


शोध कौशाल , शोधार्थियों, शिक्षकों के लिए ही नहीं बल्कि व्यवसाय से जुड़े सभी लोगों के लिए लाभकारी: डाॅ. नीलिमा गुप्ता

कानपुर। (शिववर्द्धन) सोशल रिसर्च फाउण्डेशन कानपुर द्वारा आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर का गुणात्मक शोध पत्र लेखन विषय पर एक अन्तर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन अग्रसेन भवन किदवई नगर कानपुर में किया गया। संगोष्ठी का उद्देश्य था शोधार्थियों और शिक्षकों का इस विषय पर विचारों का आदान प्रदान और प्रतिष्ठित विद्वानों से शोध प्रबन्ध और शोध पत्र लेखन सम्बन्धी महत्वपूर्ण बिन्दुओं की जानकारी प्राप्त करना। संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि डाॅ. नीलिमा गुप्ता कुलपति सीएसजेएम विश्ववि़द्यालय कानपुर और ईस्टर्न वाशिंग्टन यूनिवर्सिटी चेन्ने की प्रोफेसर अति सम्मानित अतिथि डाॅ. वन्दना अस्थाना के कर कमलों से हुआ। डाॅ. नीलिमा गुप्ता ने कहा कि शोध कौशल केवल शोधार्थियों और शिक्षकों के लिए ही नहीं बल्कि समस्त व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए लाभकारी है। प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने कहा कि शोधार्थियों के शोध पत्र तथा फाउण्डेशन की शोध पुस्तकों को सीएसजेएमयू विश्वविद्यालय कानपुर की लाइब्रेरी में रखा जायेगा। उन्होंने बताया कि तीन हफ्ते बाद मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावेडकर के साथ देश भर के विश्वविद्यालयों की कुलपतियों की बैठक होगी इस बैठक में वह यूपी के शोधकर्ताओं और उनके शोध पत्रों के बारे में प्रवक्ता से जानकारी देंगे तथा इनके विकास एवं प्रतिभा के निखार के लिए विशेष सुझाव भी देंगे। उन्होंने कहा कि वो

चाहती हैं कि शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए शोधार्थियों को प्रोत्साहन दिया जाये। इस संबंध में वो मंत्री जी से भी मंत्रणा करेंगी। डाॅ. वन्दना ने अपने विशिष्ट सम्बोधन में मौलिक शोध क्या है, लेख और शोधपत्र में क्या अन्तर है और एक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के गुणात्मक शोध पत्र पर प्रकाश डाला। सोशल रिसर्च फाउण्डेशन की अध्यक्षा डाॅ. आशा त्रिपाठी ने सभी सम्मानित अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह एक चिन्तनीय विषय है कि शोध पत्र लेखन में संख्यात्मक सुधार तो हुआ है पर गुणत्मकता में लगातार कमी आ रही है। अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में गुणात्मक शोध पत्र की दिशा में सोशल रिसर्च फाउण्डेशन के इस प्रयास की प्रशंसा की। उच्चतम न्यायालय नई दिल्ली द्वारा इस गोष्ठी को ए $ शोध पत्र लेखन की दिशा में किया गया एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया। पीपीएन कालेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. निर्मल कुमार सक्सेना ने मुख्य वक्ता के रूप में गुणात्मक शोध पत्र लेखन के आधारभूत तत्वों को संक्षेप में बताते हुए डाटा विश्लेषण, परिणामों का विवेचन और रिपोर्ट

लेखन पर गहन प्रकाश डाला। इस मौके पर जनरल एंथोलाॅजी के गोष्ठी के विशिष्ट अंक और सोशल रिसर्च फाउण्डेशन द्वारा प्रकाशित शोध पत्र कैसे लिखा जाये ? का विमोचन किया गया। इस अवसर पर शैक्षिक और सामाजिक क्षेत्र में अपने विशेष योगदान के लिए कुछ अतिथियों का सम्मान भी किया गया। तकनीकी सत्र की अध्यक्षता सीएसजेएमयू के कोआॅर्डीनेटर डाॅ. प्रभात कुमार बाजपेयी ने करते हुए इस बात पर चिंता व्यक्त की कि अधिकांश शोध पत्र सिर्फ एपीआई में अच्छे ग्रेड पाने के लिए लिखे जाते हैं। जबकि शोध पत्र लेखन व्यक्ति की शोध क्षमता का परीक्षण है। एएनडी प्रचार्या डाॅ. नूतन वोहरा ने शोध के क्षेत्र की नई चुनौतियों पर प्रकाश डाला। पश्चिम बंगाल की असिस्टेंट प्रोफेसर डाॅ. चित्रलेखा मेहरा, सीएसजेएमयू के शिक्षा संकाय डीन डाॅ. सुभाष चन्द्र अग्रवाल, डीजी कालेज अलवर की प्राचार्या डाॅ. मालती शर्मा, भोपाल के प्रभात कुमार पाण्डेय और डाॅ. मीनू पाण्डेय ने गुणात्मक शोध पत्र लेखन के उपयोगी बिन्दुओं और संकेतों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। समापन सत्र की अध्यक्षता झालवाड़ एकलव्य कालेज के प्राचार्य डाॅ. ए.के. स

र्राफ ने की। डाॅ. रविन्द्र मोदी, प्रीति लोधी, नीता अग्निहोत्री, अल्का कटियार, आशा वर्मा, मीना श्रीवास्तव, मंजू तिवारी, मनोज कुमार, शिप्रा सिंह, शशि बल्लभ शर्मा ने शोध पत्र प्रस्तुत किए। यह संगोष्ठी फाउण्डेशन के लिए मील का पत्थर साबित हुई। डाॅ. राजीव मिश्रा ने धन्यवाद दिया। गोष्ठी का संचालन लखनऊ की मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता डाॅ. कुमुद श्रीवास्तव द्वारा किया गया। इस दौरान विजेन्द्र मिश्रा, श्रीमती मीरा, दीप्ति मिश्रा, भावना, नम्रता मिश्रा, रश्मि, पूनम, रूपा, डी.के. मैथानी संपादक कर्मकसौटी, सदस्य प्रेस काउंसिल आॅफ इण्डिया, जन सामना संपादक श्याम सिंह परमार आदि सम्मानित हुए।


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