सियासत या सिनेमा, कमल हासन और रजनीकांत करेंगे किसी एक का चुनाव!

चेन्नई 
यह हो सकता है राजनेताओं को सियासत के बीच कई बार उनके स्टारडम के कारण पॉलिटिकल माइलेज मिल जाती हो, लेकिन कई बार यही लोकप्रियता राजनेताओं के लिए परेशानी का एक कारण भी बन जाती है। कई बार सियासत का असर फिल्म अभिनेता से राजनेता बने लोगों के करियर पर भी पड़ता है और इसके कारण तमाम मौकों पर ऐसे राजनेताओं की पार्टियां विरोधी पक्ष के विरोध का सॉफ्ट टारगेट भी बन जाती हैं।  


ऐसा ही कुछ नजारा आजकल दक्षिण भारत की भी सियासत में देखने को मिल रहा है। कभी अपनी फिल्मों के जरिए समूचे दक्षिण भारत के दिलों पर राज करने वाले दो बड़े ऐक्टर्स रजनीकांत और कमल हासन के राजनीति में आने के बाद अब इन अभिनेताओं की फिल्मों को राजनीतिक मुद्दों के चलते विरोध का सामना करना पड़ रहा है। 

हाल के मामले की बात करें तो तमिलनाडु की सियासत में अपनी नई पारी शुरुआत करने वाले रजनीकांत को अपनी फिल्म 'काला' को लेकर भारी विरोध का सामना करना पड़ा था। विरोध की वजह यह थी कि रजनीकांत ने अपनी फिल्म के रिलीज होने से पहले ही एक राजनेता के रूप में तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद को लेकर एक बयान दिया था। 

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कर्नाटक में हुआ था रजनीकांत की फिल्म का विरोध 
अपने बयान में रजनीकांत ने कहा था कि कर्नाटक को तमिलनाडु के हिस्से में आने वाला कावेरी नदी का पानी छोड़ना चाहिए। रजनीकांत के इस बयान के बाद कर्नाटक के तमाम लोगों ने इसकी आलोचना की थी, जिसके बाद कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 29 मई को प्रदेश में काला फिल्म के प्रदर्शन होने की अनुमति नहीं देने की बात कही थी। इस फैसले को कर्नाटक के तमाम राजनीतिक पक्षों का समर्थन भी मिला था। 

राजनीतिक विरोध का सॉफ्ट टार्गेट बन जाती हैं फिल्में 
सियासी जानकारों का कहना है कि कई बार राजनेताओं की फिल्में विरोधियों के लिए एक सॉफ्ट टार्गेट बन जाती हैं और ऐसी परीस्थितियों को दोबारा ना होने देने के लिए ऐसे सियासी लोगों को फिल्म और राजनीति में से किसी एक पक्ष का चुनाव भी करना पड़ जाता है। चूंकि रजनीकांत को हाल में काला फिल्म को लेकर कर्नाटक में भारी विरोध देखना पड़ा है, ऐसे में ऐसी स्थितियां बनती दिख रही हैं, जिसमें आने वाले वक्त में रजनीकांत को राजनीति या फिल्म जगत में से किसी एक का चुनाव करना पड़ सकता है। ऐसे ही अनुभव तमिलनाडु की नई राजनीतिक पार्टी मक्कल निधि मय्यम के प्रमुख कमल हासन के साथ भी हैं। कमल हासन साल 2004 में फिल्म 'विरुमंदी' और साल 2013 में फिल्म 'विश्वरूपम' के लिए विरोध का सामना कर चुके हैं। आने वाले वक्त में उनकी फिल्म विश्वरूपम का सीक्वल भी रिलीज होने जा रहा है, ऐसे में इस बात की आशंका जताई जा रही है कि हासन के किसी राजनीतिक विरोध का असर उनकी फिल्म की रिलीज पर भी पड़ सकता है। 

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चुननी पड़ सकती है कोई एक राह 
राजनीति और फिल्म के इस दोराहे पर किसी ना किसी रूप में नेता बने ऐक्टर्स का फिल्मी करियर सियासी विरोध की भेंट चढ़ता दिखने लगा है। ऐसे में अब वह स्थितियां दिखने लगी हैं जहां दक्षिण भारतीय फिल्मों के दो सबसे बड़े चेहरों के राजनीतिक पदार्पण के साथ अब उन्हें फिल्मी जगत से संन्यास लेना पड़ सकता है। बता दें कि कमल हासन ने बीते दिनों कर्नाटक में अपनी नई राजनीतिक पार्टी मक्कल निधि मय्यम का गठन कर विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी करने की घोषणा की थी। वहीं दक्षिण फिल्मों के सुपरस्टार रजनीकांत ने भी राजनीति में पदार्पण के साथ तमिलनाडु के तमाम सामयिक राजनीतिक विषयों पर सक्रियता दिखाई थी। इस बीच रजनीकांत ने एक सक्रिय राजनेता के रूप में तूतीकोरिन में हुए प्रदर्शनों से लेकर कावेरी जल विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अपनी राय भी दी थी। 

 

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