गंगा सफाई मैं धन खाली क्यों हो जाता है ?

June 13, 2018


 

 

कानपुर : गंगा की सफाई के लिए भले ही अरबों रुपये की योजनाएं चल रही हों, हकीकत में धन की कमी काम के आड़े आ रही है। लखनऊ में मंगलवार को प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण के साथ बैठक में धन की कमी का मुद्दा उठा और साफ कर दिया कि जल्द ही नगर निगम से धन नहीं मिला तो जाजमऊ स्थित कॉमन इफ्यूलेंट सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का संचालन बंद हो जाएगा और टेनरियों का दूषित पानी सीधे गंगा में गिरेगा। जल निगम के धन मांगने पर बैठक में शामिल नगर निगम अधिकारियों ने खजाना खाली होने और शासन से फंड नहीं मिलने का हवाला दिया। कहा, जब तक फंड नहीं मिलेगा, जल निगम को संचालन राशि देना संभव नहीं है। इसके अलावा जल निगम ने सीईटीपी की मरम्मत के लिए स्वीकृत 17.88 करोड़ रुपये जल्द दिलाए जाने के लिए कहा ताकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप कुंभ के पहले काम पूरा किया जा सके।

मुख्यमंत्री ने कुंभ मेले के दौरान निर्मल अविरल गंगा के लिए टेनरी बंद करने और सीईटीपी के संचालन के संबंध में 25 मई को लखनऊ में शासन, प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अफसरों की बैठक ली थी। उस बैठक में दिए गए निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा और जरूरतों की बाबत प्रमुख सचिव पर्यावरण रेणुका कुमार ने जल निगम व नगर निगम के अफसरों की लखनऊ में बैठक ली।


जल निगम के महाप्रबंधक आरके अग्रवाल ने सीईटीपी के संचालन के लिए साढ़े आठ करोड़ मांगे। कहा, नगर निगम पर 29 करोड़ और टेनरी संचालकों पर 51 करोड़ रुपये बकाया है। टेनरी संचालकों को नोटिस भेजने की तैयारी की जा रही है। अभी धन नहीं मिला तो सीईटीपी बंद करना पड़ जाएगा। इस पर प्रमुख सचिव ने नगर आयुक्त से जल निगम को धन देने के लिए कहा। नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा ने खजाना खाली होने का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। कहा, अभी जल निगम संचालन करे। जब 14 वें वित्त आयोग और अंवस्थापना निधि से धन मिलेगा तब दे पाएंगे।
जल निगम ने प्लांट की मरम्मत के लिए स्वीकृत 17.88 करोड़ रुपये मांगे। प्रमुख सचिव ने अनु सचिव नगर विकास विभाग गुलाब सिंह को धन जारी करने का आदेश दिया। उन्होंने एस्टीमेट न मिलने का हवाला दिया। जल निगम ने एस्टीमेट भेजे जाने की बात बताई। साथ ही एस्टीमेट की एक वहीं पर जमा कर दी। माना जा रहा कि जल्द ही रकम जारी हो जाएगी।

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