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बालासाहेब के आदर्श भुलाने वाले नहीं करें नैतिकता की बात: ​रविशंकर प्रसाद


नई दिल्ली महाराष्ट्र में देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में सरकार बनाए जाने पर शिवसेना के आरोपों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री और बीजेपी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जो बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों की रक्षा नहीं कर सके, वह आदर्शों की क्या बात करेंगे। उन्होंने लोकतंत्र की हत्या की कांग्रस के आरोप पर कहा कि जब जनादेश को नजरअंदाज कर स्वार्थपूर्ति के लिए विरोधी विचारधारा की पार्टी के साथ सत्ता हथियाने का खेल हो तो वह लोकतंत्र की हत्या नहीं है? उन्होंने कहा कि बीजेपी ने महाराष्ट्र की जनभावना का सम्मान करते हुए सरकार बनाई है और पार्टी वहां एक प्रामाणिक, प्रभावी और ईमानदार सरकार देगी। प्रसाद ने कहा, 'यह एक महायुति बनी है जो एक स्थाई सरकार देगी। शिवेसना-एनसीपी की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस और बाद में कांग्रेस के संवदादाता सम्मेलन के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस ने प्रसाद ने कहा कि शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस की कोशिश एक चोर दरवाजे से देश की वित्तीय राजधानी पर कब्जा करने की साजिश थी, यह एक षडयंत्र था। उन्होंने कहा, 'चुनाव सामने था, नतीजे सामने आए थे, लेकिन किसके इशारे पर ऐसा हुआ? शरद पवार की सार्वजनिक घोषणा थी कि हमें विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है। कांग्रेस ने भी यही कहा था। फिर अचानक क्या हुआ कि सत्ता पाने के लिए मैच फिक्सिंग होने लगी।' प्रसाद ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे पर जोरदार हमला बोला और कहा कि उन्होंने सत्ता स्वार्थ के लिए अपने पिता बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों की बली चढ़ा दी। उन्होंने कहा, 'जो आदरणीय बालासाहेब ठाकरे के आदर्शों को जीवित नहीं रख सके, उनका प्रामाणिक कांग्रेस विरोध जगजाहिर है। उनकी राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद प्रामाणिक है। यही कारण था कि दोनों पार्टियां साथ आई थीं। जो लोग ये सब छोड़ देते हैं, वे शिवाजी की बात करते हैं। सत्ता के लिए विचार त्याग करने वाले शिवाजी की बात नहीं करें।' केंद्रीय मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों पर कहा, 'कहा जा रहा है कि डिमोक्रेसी की हत्या की जा रही है। जब शिवसेना स्वार्थ भाव से प्रेरित होकर अपनी 30 साल की दोस्ती तोड़ दे और घोर विरोधी विचारधार की एनसीपी और कांग्रेस का दामन थाम ले तो लोकतंत्र की हत्या नहीं है? जहां अजित पवार भी बैठे हुए हैं, पूर्व के। और एक स्थाई सरकार के आग्रह पर देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई में एक बड़ा तबका समर्थन देने का फैसला करता है तो उसे लोकतंत्र की हत्या कहा जा रहा है, इस पर क्या कहा जा सकता है।' प्रसाद ने कहा कि राज्यपाल ने संविधान के मुताबिक फैसला लिया। उन्होंने कहा, 'संविधान की दृष्टि से देखें तो राज्यपाल ने तीनों पार्टियों को बुलाया। बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी में किसी के पास अकेले दम पर बहुमत नहीं था। बीजेपी ने आज राज्यपाल के पास आवेदन दिया कि हमारे पास स्पष्ट बहुमत है। क्या शिवसेना और एनसीपी ने कभी स्पष्ट बहुमत का आवेदन दिया?' उन्होंने कहा कि इस विधानसभा चुनाव में मैंडेट था बीजेपी-शिवसेना का, लेकिन बड़ी पार्टी थी बीजेपी और मुख्यमंत्री का मैंडेट था देवेंद्र फडणवीस का। उन्होंने साफ-सुथरी शासन सरकार चलाई थी। उन्होंने दावा किया कि इस बार के चुनाव में शिवसेना को भी बीजेपी समर्थकों के वोटों से ही इतनी बड़ी जीत मिली थी। उन्होंने कहा, '2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 260 सीटें लड़कर 47 सीटें जीतीं और 28% वोट हासिल किए थे। 2019 में बीजेपी ने 150 सीटें लड़ीं, 70% सक्सेस रेट और 26% वोट। इसके अलावे, मुख्यमंत्री के रूप में पूरे चुनाव में देवेंद्र फडणवीस का नाम प्रचारित हुआ था। शिवसेना को जिताने में भी बीजेपी समर्थक वोटों का बहुत बड़ा हाथ था। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि महाराष्ट्र की एक-एक जनता यह सवाल कर रही थी कि हमने आपको मैंडेट दिया था, आप सरकार बनाते क्यों नहीं हैं? हर तबके से यह यह आवाज उठ रही थी।


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