• संवाददाता

कर्नाटक: अल्‍पमत में आई एचडी कुमारस्‍वामी सरकार, अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने से डर रही बीजेपी


बेंगलुरु कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी के दो और विधायकों के इस्‍तीफे के बाद एचडी कुमारस्‍वामी सरकार अल्‍पमत में आ गई है, लेकिन मुख्‍य विपक्षी बीजेपी अब भी अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने से डर रही है। कर्नाटक में शुक्रवार से विधानसभा का मॉनसून सत्र शुरू हो रहा है। अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने की बजाय बीजेपी नैतिकता के आधार पर कुमारस्‍वामी के इस्‍तीफे की मांग कर रही है। ताजा इस्तीफे के बाद कांग्रेस-जेडीएस सरकार के असंतुष्‍ट विधायकों की संख्‍या 16 हो गई है जबकि विधानसभा में उनकी संख्‍या 118 से घटकर अब 100 पहुंच गई। सरकार बचाए रखने के लिए जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन को 105 विधायकों की जरूरत है। गुरुवार को बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन किया जिसके बाद 11 से 14 जुलाई तक कर्नाटक विधानसभा में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत विधानसभा में चार से अधिक लोग एक साथ इकट्ठे नहीं हो सकते हैं। पूर्व सीएम सिद्धारमैया ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जिम्मेदार बताया है। भारतीय जनता पार्टी की आलोचना करते हुए सिद्धारमैया ने पार्टी के विधायकों और कार्यकर्ताओं को गुंडा भी कहा है। कांग्रेस-जेडीएस के 16 विधायकों ने इस्‍तीफा दे दिया है, फिर भी अभी तक विधानसभा अध्‍यक्ष केआर रमेश कुमार ने अभी तक उनका इस्‍तीफा स्‍वीकार नहीं किया है। इस वजह से अभी तक विधानसभा की सदस्‍यता जस की तस यानि 224 सदस्‍य बनी हुई है। ऐसी स्थिति में अगर विश्‍वास मत प्रस्‍ताव या अविश्‍वास मत प्रस्‍ताव लाया जाता है तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन विप जारी करके आसानी से बहुमत हासिल कर सकता है। विश्‍वास मत प्रस्‍ताव सामान्‍य तौर पर मुख्‍यमंत्री की ओर से बिना विधानसभा अध्‍यक्ष या राज्‍यपाल के निर्देश के लाया जाता है ताकि विधानसभा के अंदर बहुमत का परीक्षण किया जा सके। अविश्‍वास प्रस्‍ताव आमतौर पर विपक्ष की ओर से लाया जाता है। विपक्ष को जब यह लगता है कि सत्‍तारूढ़ पार्टी या पार्टियों का सदन के अंदर बहुमत नहीं है तो वे यह प्रस्‍ताव लाते हैं। यदि कोई विधायक पार्टी के विप का उल्‍लंघन करता है तो उसे दल-बदल निरोधक कानून के तहत विधानसभा से बर्खास्‍त किया जा सकता है। यही नहीं जेडीएस-कांग्रेस सरकार बागी विधायकों को सबक सिखाने के लिए तमिलनाडु मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है। बता दें कि वर्ष 2017 में एआईएडीएमके 18 विधायकों ने पार्टी के पूर्व नेता टीटीवी दिनाकरण के प्रति निष्‍ठा दिखाते हुए इस्‍तीफा दे दिया था। एआईएडीएमके के 18 विधायकों के इस्‍तीफे के बाद राज्‍य सरकार अल्‍पमत में आ गई लेकिन तमिलनाडु के विधानसभा अध्‍यक्ष पी धनपाल ने दल बदल कानून के तहत उन्‍हें अयोग्‍य घोषित कर दिया। एआईएडीएमके के बागी विधायकों ने पहले मद्रास हाई कोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में विधानसभा अध्‍यक्ष के फैसले के खिलाफ याचिका दायर किया। याचिका पर सुनवाई करते हुए दोनों ही अदालतों ने विधानसभा अध्‍यक्ष के फैसले को बरकरार रखा। इससे राज्‍य में उपचुनाव का रास्‍ता साफ हुआ। गौरतलब है कि कर्नाटक सरकार के दो बड़े मंत्रियों एम टी बी नागराज और के. सुधाकर ने भी अपनी विधानसभा सदस्यता और पद से त्यागपत्र दे दिया है। इससे कांग्रेस-जेडीएस सरकार के असंतुष्‍ट विधायकों की संख्‍या 16 हो गई है जबकि विधानसभा में उनकी संख्‍या 118 से घटकर अब 100 पहुंच गई है। राज्‍य में सरकार बचाए रखने के लिए जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन को 105 के जादुई आंकड़े की जरूरत है।


0 व्यूज

                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.