• संवाददाता,मुंबई

शाह ने राज्यसभा में कहा, जो भारत को तोड़ने की बात करेगा उसी भाषा में जवाब मिलेगा


नई दिल्ली जम्मू और कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के प्रस्ताव पर सोमवार को राज्यसभा में तीखी बहस देखने को मिली। कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने सरकार को घेरने की कोशिश की और जब जवाब देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए तो उन्होंने करारा पलटवार किया। कश्मीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत के पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर की पिछली सरकारों पर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने सूफी संतों और कश्मीरी पंडितों का भी जिक्र किया। दरअसल, विपक्ष ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नारे का जिक्र कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए थे। इस पर जवाब देते हुए शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंच-सरपंच के चुनाव क्यों नहीं कराए गए? उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा का सबसे बड़ा गढ़ जम्मू-कश्मीर रहता था। किसने निकाल दिया उन्हें और फिर किसी ने कुछ नहीं बोला। कश्मीरी पंडितों को घरों से निकाल दिया गया। उनके घरों को तोड़ दिया गया। उस समय कश्मीरियत की चिंता किसी को नहीं थी? उन्होंने कहा कि सरकार की नीति है कि कश्मीर की आवाम की संस्कृति का संरक्षण हम ही करेंगे। शाह ने कहा कि एक समय आएगा जब क्षीर भवानी के मंदिर में कश्मीरी पंडित भी पूजा करते दिखाई देंगे और सूफी संत भी दिखाई देंगे। शाह ने कहा, 'घाटी में स्कूल बंद हो गए। पीढ़ियां अनपढ़ हो गईं, क्या यही इंसानियत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति शासन में इस ओर ध्यान दिया गया। शौचालय, सिलेंडर और बिजली पहुंचाई गई, यह इंसानियत है। कश्मीर के अंदर सस्ता अनाज पहुंचा है। विधवा और वृद्धा पेंशन सीधे बैंक खातों में पहुंच रही है, यह इंसानियत है। आयुष्मान भारत के तहत इस राज्य में कवरेज काफी ज्यादा है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि हम कश्मीरियत, इंसानियत और जम्हूरियत के तहत ही आगे बढ़ेंगे। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कश्मीर में चुनाव न कराए जाने को लेकर सरकार को घेरा था। इस पर जवाब देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि देश में 132 बार आर्टिकल 356 का इस्तेमाल किया गया। कांग्रेस ने 93 बार इसका इस्तेमाल किया और हमे परिस्थितियों के कारण इसका इस्तेमाल करना पड़ा। शाह ने कहा कि पंचायत और लोकसभा चुनावों में खून नहीं बहा तो एकसाथ चुनाव कराने की बात की जा रही है, हम तो तैयार हैं, आप तैयार हो जाइए हम बिल लेकर आ जाएंगे। इस पर संसद सदस्य हंस पड़े। लोकसभा के साथ विधानसभा के चुनाव न कराने को लेकर भी शाह ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, 'जम्मू-कश्मीर में अभी ऐसी स्थिति नहीं है कि हम सभी उम्मीदवारों को सुरक्षा प्रदान कर पाएं। चुनाव आयोग के सामने सुरक्षा बलों ने सभी नेताओं को सुरक्षा दे पाने में असमर्थता जताई थी कि चुनाव एक साथ हुए तो यहां दिक्कत हो सकती है।' उन्होंने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि हमारे पास सरकारों का अकाल नहीं है, 16 सरकारें हैं और सुरक्षा चिंता के कारण ही चुनाव नहीं कराए गए। रमजान और अमरनाथ यात्रा के बाद चुनाव कराने को लेकर सुरक्षा बलों ने कहा था। अब चुनाव आयोग आगे फैसला करेगा। राज्यसभा में बोलते हुए गृह मंत्री ने घाटी के लोगों को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं आपको कहना चाहता हूं कि भारत के साथ खुद को जोड़िए। किसी से डरने की जरूरत नहीं है और किसी भी दुष्प्रचार में मत फंसिए। हम आपकी चिंता करेंगे।' गुलाम नबी आजाद ने सवाल किया था कि बिल कमिटियों के पास नहीं जाते हैं। इस पर गृह मंत्री ने जवाब दिया, 'कमिटियों के भीतर कम बिल जाते हैं लेकिन जब काफी जरूरी होता है तभी हम यहां लाते हैं।' उन्होंने आगे तुलनात्मक रूप से जानकारी सामने रखते हुए कहा कि UPA-2 के समय कुल 180 बिल आए और 125 बिल एक भी कमिटी के सामने नहीं गए। यूपीए-1 में 248 बिल आए, उसमें से 207 बिल एक भी कमिटी के सामने नहीं गए जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल में 180 में से 124 बिल कमिटी के सामने गए। उन्होंने कहा, 'पीडीपी के साथ गठबंधन करने का फैसला हमारा नहीं था, ऐसा ही जनादेश मिला था। काफी समय राज्यपाल शासन रहा था और बाद में हम कॉमन मिनिमम प्रोग्राम पर आगे बढ़े। जब लगा कि आतंकवाद बढ़ रहा है तो हमने अलग होने का फैसला किया।' राज्यसभा में बोलते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि चर्चा के दौरान सभी नेताओं में एक बात कॉमन रही कि जम्मू-कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार पर भले ही गुलाम नबी आजाद ने तंज कसा हो पर मैं दोहराना चाहूंगा कि आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति है और जारी रहेगी। सरकार जम्मू-कश्मीर के समान विकास के लिए प्रतिबद्ध है। किसी क्षेत्र के साथ विकास के मामले में मतभेद नहीं होना चाहिए। पश्चिम बंगाल को एक हफ्ते में दो अडवाइजरी जारी करने को लेकर शाह ने TMC नेता डेरेक ओ ब्रायन को जवाब दिया कि गृह मंत्रालय हेल्थ कारणों के लिए अडवाइजरी जारी नहीं करता है। दरअसल, TMC नेता ने कहा था कि गृह मंत्रालय ने बच्चों की मौत पर बिहार को कोई अडवाइजरी जारी नहीं की थी।


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