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'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मुद्दे को लेकर एक कमिटी बनाई जाएगी, जो इसके सभी पक्षों पर विचार करक


नई दिल्ली 'एक राष्ट्र-एक चुनाव' के मुद्दे को लेकर एक कमिटी बनाई जाएगी, जो इसके सभी पक्षों पर विचार करके अपनी रिपोर्ट देगी। यह फैसला पीएम अध्यक्षता में हुई सर्वदलीय बैठक में हुआ। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि बैठक में 24 पार्टियों का प्रतिनिधित्व रहा। उन्होंने कहा कि लगभग सभी पार्टियों ने एक देश-एक चुनाव के मुद्दे को लेकर अपना समर्थन दिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि बैठक में सिर्फ सीपीआई और सीपीएम ने क्रियान्वयन को लेकर आशंका जाहिर की है। हालांकि इन दोनों पार्टियों ने भी सकारात्मक दृष्टिकोण दिखाश्स है। बता दें कि सरकार की तरफ से 40 पार्टियों को बैठक में बुलाया गया था। कांग्रेस, एसपी, बीएसपी, आम आदमी पार्टी, टीएमसी जैसी कई पार्टियों ने इस बैठक में शिरकत नहीं की। बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने कहा, 'ज्यादातर सदस्यों ने एक राष्ट्र-एक चुनाव के मुद्दे पर अपना समर्थन दिया है। सीपीआई-सीपीएम की तरफ से थोड़ा-बहुत विचारों में मतभेद रहा है। उनकी चिंता इस बात पर थी कि यह कैसे संभव होगा। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे का विरोध नहीं किया। उन्होंने सिर्फ इसके क्रियान्वयन को लेकर आशंका जाहिर की।' रक्षा मंत्री ने बताया कि बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि इस संबंध में एक कमिटी का गठन किया जाएगा। जो निर्धारित सीमा में इससे जुड़े सभी पक्षों पर विचार करके अपने सुझाव देगी। कमिटी बनाने का काम पीएम की तरफ से होगा। राजनाथ सिंह ने कहा कि इस बैठक के दौरान पीएम ने अपने उद्बोधन में कहा कि बैठक में पेश किए गए मुद्दे सरकार का अजेंडा नहीं है, बल्कि देश का अजेंडा है। राजनाथ सिंह ने कहा कि सभी दलों को विश्वास लेकर ही हम आगे बढ़ेंगे। यदि विचार में कोई मतभेद होगा तो उसका भी सम्मान किया जाएगा। बैठक में 21 पार्टियों के अध्यक्ष मौजूद थे, साथ ही 3 पार्टियों के अध्यक्षों ने व्यस्तता के कारण बैठक में आने में असर्थता जाहिर की, लेकिन उन्होंने पत्र के माध्यम से इन मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने आए सभी सुझावों की सराहना की। बैठक में एक देश-एक चुनाव के साथ कई और मुद्दों पर भी चर्चा हुई। रक्षा मंत्री ने कहा कि बैठक में संसद की प्रॉडक्टिविटी बढ़ाने को लेकर सभी सदस्यों की आम राय थी। बैठक में मौजूद सदस्यों का मानना था कि संसद में संवाद और वार्तालाप का माहौल बने रहना चाहिए। यह भी उम्मीद व्यक्त की गई कि 17वीं लोकसभा के लगभग आधे ऐसे सदस्य हैं, जो पहली बार निर्वाचित हुए हैं। और वे सार्थक संवाद की भावना को सदन में आगे बढ़ाएंगे। राजनाथ सिंह ने बताया कि बैठक में शामिल कई सदस्यों ने जोर देकर कहा कि आने वाली पीढ़ी को महात्मा गांधी के आदर्शों के बारे में बताया जाना जरूरी है। इसके लिए महात्मा गांधी की 150वीं जयंती एक ऐसा अवसर है, जिसमें इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि सभी दलों का यह भी मानना था कि देश में सुनियोजित और व्यापक विकास के लिए हम इस अवसर पर कुछ ठोस संकल्प ले सकते हैं, जो 2022 में आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक पूरे हो जाएं। इस दौरान पीएम ने कहा कि जल प्रबंधन एक चुनौती, जिसे हमारी सरकार ने स्वीकार किया है। पानी बचाना ही इससे निपटने का प्रमुख रास्ता हो सकता है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि गांधी जी की जयंती के 150 और आजादी के 75 वर्ष पूरे होने कार्यक्रम कोई इवेंट नहीं हैं। गांधी जी देशवासियों के लिए उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने आजादी के समय थे। पीएम ने स्वच्छता अभियान के संबंध में भी चर्चा की। सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने किनारा कर किया था। कांग्रेस ने बैठक में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया वहीं, बीएसपी अध्यक्ष मायावती, टीएमसी अध्यक्ष ममता बनर्जी और आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने बैठक से किनारा किया था। मायावती ने ट्वीट कर कहा कि अगर ईवीएम के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक होती तो वह इसमें जरूर शामिल होतीं। बैठक से कांग्रेस, एसपी और टीएमसी भी गायब है। एसपी ने कहा था कि वह इस मुद्दे के विरोध में है।


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