• संवाददाता

बिहारः 'चमकी बुखार' को लेकर चल रही थी मीटिंग, स्वास्थ्य मंत्री ने पूछा- कितना विकेट हुआ


मुजफ्फरपुर बिहार के मुजफ्फरपुर और इसके आसपास के इलाके में चमकी बुखार का प्रकोप जारी है। इस घातक बीमारी की चपेट में आने से सौ से ज्यादा बच्चों की मौत हो चुकी है। राज्य में आई इस भयानक आपदा को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की संवेदनहीनता को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इस बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय का एक विडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। विडियो में पांडेय अक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम को लेकर मंत्रियों और डॉक्टरों के बीच चल रही मीटिंग के दौरान भारत-पाकिस्तान क्रिकेट स्कोर के बारे में पूछ रहे हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए मंत्री की ऐसी संवेदनहीनता को लेकर उनकी काफी आलोचना हो रही है। गौरतलब है कि राज्य में चमकी बुखार की आपदा के मद्देनजर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन ने रविवार को मुजफ्फरपुर में श्री कृष्णा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (एसकेएमसीएच) का दौरा किया था। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे, बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडेय और डॉक्टरों के साथ एक हाई लेवल मीटिंग भी की। इस मीटिंग के दौरान मंगल पांडेय के दिमाग में भारत-पाकिस्तान के बीच मैनचेस्टर में चल रहा क्रिकेट मैच घूम रहा था। पांडेय मीटिंग के बीच में मैच के लेटेस्ट स्कोर के बारे में पूछने से अपने आपको नहीं रोक पाते हैं। स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे और केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन के साथ बैठे पांडेय पूछते हैं, 'कितना विकेट हुआ था?' इस पर कमरे में मौजूद कोई शख्स जवाब देता है, 'चार विकेट'। गौरतलब है कि बिहार में चमकी बुखार से होने वाली मौतों का आंकड़ा दिनोदिन बढ़ता जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को हर्षवर्धन के चार घंटे के दौरे के दौरान ही 3 बच्चों की मौत हो गई थी। इससे मंत्री और स्वास्थ्य अधिकारी हैरान रह गए। इसके अलावा रविवार को अपने दौरे के दौरान हर्षवर्धन ने बीमार बच्चों के परिजन को आश्वासन देते हुए कहा था कि बीमारी पर काबू पाने के लिए सरकार अपनी ओर से कोई कसर नहीं छोड़ेगी और सभी मुमकिन कदम उठाए जाएंगे। हर्षवर्धन ने नई दिल्ली जाने से पहले एक और समीक्षा बैठक की थी। वहीं इस दौरान बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया था कि डॉक्टरों की एक टीम और पर्याप्त संख्या में पैरामेडिकल स्टाफ को पटना से मुजफ्फरपुर भेजा गया है। गौरतलब है कि बिहार के मुजफ्फरपुर में साल दर साल एक ही बीमारी से बच्चे मरते रहे हैं। रोकथाम के नाम पर अमेरिका से जापान तक का दौरा होता रहा लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस बार भी जब बच्चों की मौतें जारी हैं, तो स्वास्थ्य विभाग इलाज के बजाय ऊपर वाले के रहम पर भरोसा कर रहा है। विभाग चाहता है कि जल्द बारिश हो, जिससे महामारी का प्रकोप थमे। गर्मी बढ़ने के साथ मुजफ्फरपुर में हालात और खराब हो गए हैं। अगर सरकार ने बनी योजना पर अमल किया होता तो मुजफ्फरपुर में बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। मुजफ्फरपुर में अब तक इंसेफलाइटिस पर रोकथाम के लिए सरकार ने रिसर्च और इलाज का उपाय खोजने में 100 करोड़ से ऊपर खर्च किया है लेकिन फिर भी मौतें जारी हैं। रिपोर्ट के अनुसार जिन बच्चों की मौत छोटे अस्पतालों में या घर पर ही हो गईं, उनके आंकड़े शामिल नहीं किए गए। गैर सरकारी आंकड़ा है कि दो हजार से ज्यादा बच्चे एईएस से पीड़ित हैं।


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