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ब्रिटिश कोर्ट ने नीरव मोदी का रिमांड बढ़ाकर भारत सरकार से पूछा, उसे किस जेल में रखेंगे


लंदन भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की जेल से छूटने की कोशिश पर फिर से पानी फिर गया। ब्रिटेन की अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी की रिमांड 27 जून तक बढ़ा दी और भारत सरकार से पूछा कि प्रत्यर्पण के बाद उसे किस जेल में रखेंगे? नीरव मोदी 13,000 करोड़ रुपये के पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग केस में खुद के भारत प्रत्यर्पण से बचने की कोशिश में जुटा है। 48 वर्षीय हीरा कारोबारी अभी साउथ-वेस्ट लंदन के वांड्सवर्थ जेल में बंद है। उसकी जमानत पर छूटने की तीसरी कोशिश पर तब पानी फिर गया जब लंदन की वेस्टमिंस्टर मैजिस्ट्रेट्स कोर्ट में इसी महीने पिछली सुनवाई के दौरान चीफ मैजिस्ट्रेट एम्मा आर्बथनॉट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी। भारत के इस भगोड़े कारोबारी को गुरुवार को जज अर्बथनॉट के सामने पेश किया गया और जज ने उसकी हिरासत 27 जून तक बढ़ाने का आदेश दिया। जज ने भारत सरकार से 14 दिनों के अंदर उस जेल की जानकारी मांगी जिसमें नीरव मोदी को रखा जाएगा। मोदी को स्कॉटलैंड यार्ड के ऑफिसरों ने प्रत्यर्पण वॉरंट पर सेंट्रल लंदन के एक मेट्रो बैंक से 19 मार्च को गिरफ्तार किया था, जहां वह अपना नया बैंक अकाउंट खुलवाने की कोशिश कर रहा था। तब से वह जेल में ही बंद है। वेस्टिंस्टर मैजिस्ट्रेट्स कोर्ट में सुनवाई के दौरान दलील दी गई कि नीरव मोदी पीएनबी को चूना लगाने के लिए जारी किए गए फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरस्टैंडिंग्स (LoUs)का प्रमुख लाभार्थी था। वह फर्जीवाड़े से जुटाए पैसे की लॉन्ड्रिंग कर अपराध के रास्ते पर बढ़ता गया। दिसंबर 2018 में भारत के एक और भगोड़े विजय माल्या के भारत प्रत्यर्पण का आदेश देने वाली जज अर्बथनॉट ने भारत सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सीपीसी की दलील से सहमति जताई। जज ने कहा सीपीसी को कहा कि वह नीरव मोदी के मामले से जुड़े सारे दस्तावेजों को सही तरीके से सूचीबद्ध करते हुए अदालत में पेश करे।


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