• संवाददाता

दिल्‍ली की गद्दी के लिए हमेशा से ही महत्‍वपूर्ण रहा है सबसे ज्‍यादा 80 सीटों वाला उत्‍तर प्रदेश


लखनऊ देश के राजनीतिक गलियारे में वर्षों से यह कहावत मशहूर है कि दिल्‍ली का रास्‍ता उत्‍तर प्रदेश से होकर जाता है। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में अब कुछ ही घंटे शेष बचे हैं और ऐसे में अटकलों का दौर तेज हो गया है। आबादी के लिहाज से देश के सबसे बड़े राज्‍य यूपी का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह अभी साफ नहीं है लेकिन एग्जिट पोल की मानें तो राज्‍य में भगवा लहर बरकरार रह सकती है। आइए जानते हैं एग्जिट पोल के अनुमानों के बीच क्‍या है कि यूपी का सियासी समीकरण और 'किंगमेकर' बनने का इतिहास... लोकसभा चुनाव के बाद आए एग्जिट पोल के अनुमानों के मुताबिक एसपी-बीएसपी-आरएलडी के महागठबंधन के बाद भी यूपी में बीजेपी शानदार प्रदर्शन कर रही है। अकेले बीजेपी को 300 या उससे ऊपर सीटों की भविष्यवाणी करने वाले टुडेज चाणक्य और एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक उत्‍तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन बीजेपी को रोकने में नाकाम दिख रहा है। एक्सिस माय इंडिया के मुताबिक यूपी की 80 सीटों में एनडीए को 62-68 सीटें मिल सकती हैं। इसमें अकेले बीजेपी 60-66 और सहयोगी अपना दल को 2 सीटें मिल सकती हैं। एसपी-बीएसपी गठबंधन को 10-16 और कांग्रेस को 1 से 2 सीटें मिल सकती हैं। इसी तरह टुडे चाणक्य एग्जिट पोल के मुताबिक यूपी में एनडीए को 65 (+-8) सीटें यानी 57 से लेकर 73 तक सीटें मिल सकती हैं। 6 एग्जिट पोल्स के नतीजों का औसत निकालें तो बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए को 52 सीटें मिलने का अनुमान है। वहीं, महागठबंधन को 26 और कांग्रेस को महज 2 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह अनुमान रिजल्ट में तब्दील होते हैं तो एसपी-बीएसपी-आरएलडी गठबंधन के लिए बड़ा झटका होगा। सिर्फ दो एग्जिट पोल में महागठबंधन को 40 से ज्यादा सीटें मिलने का अनुमान है। एबीपी-नील्सन ने महागठबंधन को 45 सीटें दी हैं जबकि सी-वोटर के सर्वे में एसपी-बीएसपी-आरएलडी के खाते में 40 सीटें मिलती नजर आ रही हैं। एबीपी-नील्सन ने बीजेपी को 33 और सी-वोटर ने 38 सीटें दी हैं। इन दो एग्जिट पोल की मानें तो एसपी-बीएसपी के बीच काफी हद तक यूपी में वोट ट्रांसफर हुआ है। 2014 के चुनाव में एसपी को 22.20 फीसदी और बीएसपी को 19.60 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। इन दोनों को मिला दिया जाए तो करीब 42 प्रतिशत वोट होता है। लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी के बंपर जीत का ऐलान कर रहे एग्जिट पोल के नतीजों ने विपक्षी दलों की बेचैनी बढ़ा दी है। विपक्षी दलों को आस है कि 23 मई आने वाला चुनाव परिणाम अलग रहेगा। इसी के मद्देनजर वह रणनीति बनाने में जुटे हैं। सोमवार सुबह अखिलेश यादव चुनाव में अपनी सहयोगी बीएसपी प्रमुख मायावती से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने करीब 1 घंटे तक चर्चा की। विपक्षी नेताओं की कोशिश है कि अगर करीबी स्थिति बनती है तो उसमें यूपीए समेत तीसरे मोर्चे की संभावना पर भी विचार किया जाए। इस तीसरे मोर्चे में मायावती और अखिलेश की भूमिका अहम हो सकती है। मायावती के लिए यह चुनाव बहुत अहम है। अखिलेश यादव कई बार मायावती के पीएम की रेस में होने के संकेत दे चुके हैं।


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