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चीन दुनियाभर में बढ़ा रहा है अपनी सैन्य ताकत: अमेरिका


नई दिल्ली चीन लगातार तेजी से दुनियाभर में अपनी युद्ध क्षमता को बढ़ा रहा है। चीन परमाणु क्षमता वाली मिसाइल और सबमरीन से लेकर साइबरवारफेयर और एंटी-सैटलाइट हथियारों के अलावा दुनियाभर में अपने मिलिट्री बेस भी तैयार कर रहा है। ऐसा करके चीन का इरादा अपनी ताकत बढ़ाने के अलावा, अरबों डॉलर के वन बेल्ट वन रोड (OBOR) इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट की सुरक्षा करने का भी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपनी हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। चीन द्वारा बढ़ाई जा रही सैन्य ताकत पर यूएस कांग्रेस के समक्ष पेश हुई अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट में पेंटागन ने कहा, 'चीन दूसरे देशों में अतिरिक्त मिलिट्री बेस बनाएगा। इनमें लंबे समय से दोस्ताना रिश्ते और इसी तरह की नीति वाला पाकिस्तान शामिल है और विदेशी सेना का उनकी सरजमीं पर होना कार्य प्रणाली का एक हिस्सा रहा है।' पेंटागन का कहना है कि अगस्त 2017 में चीन ने हॉर्न ऑफ अफ्रीका के डजीबॉटी में पहली बार विदेशी मिलिट्री बेस बनाया था। चीन की सबमरीन नियमित तौर पर कराची में मौजूद रही हैं। मिलिट्री बेस बनाने के लिए चीन की टारगेट लोकेशन पश्चिमी एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और वेस्टर्न पैसिफिक हैं। चीन द्वारा सैन्य क्षमता को बढ़ाने के पीछे फिलहाल मुख्य उद्देश्य है ताइवान, दक्षिण और पूर्व चीनी महासागरों में किसी भी तरीके के अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को रोकने के साथ-साथ इंडियन ओसन रीजन (IOR) में एनर्जी सप्लाई को भी सुरक्षित बनाना है। हालांकि, अभी IOR में चीनी के रणनीतिक कदम, पूर्वी लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक 4067 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (Loc) और पेइचिंग व इस्लामाबाद के बीच सैन्य विस्तार पर करीब से निगाह रखने के अलावा भारत के पास और कोई विकल्प नहीं हैं। एक अधिकारी ने कहा, 'दक्षिण एशिया में भारत को कमतर करने के लिए चीन प्रभावी तौर पर पाकिस्तान को इस्तेमाल करता है।' पेंटागन की रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन ने पाकिस्तान को करीब 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा के हथियार बेचे हैं। इनमें कैगॉन्ग आर्म्ड ड्रोन से लेकर, छोटे हथियार और 8 युआन-क्लास सबमरीन व 4 टाइप-054A मल्टी-रोल युद्ध पोत शामिल हैं। 2017 में भारत और चीन के बीच 73 दिन तक सेना आमने-सामने रही थी। इसके बाद 2018 में डेम्कहॉक में दोबारा दोनों सेनाओं का आमना-सामना हुआ। पेंटागन ने कहा कि बात करें पीपल्स लिबरेशन आर्मी द्वारा बढ़ाई जा रही सैन्य ताकत का, तो ICBM (इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल्स) परमाणु क्षमता वाले रॉकेट फोर्सेज में 'एक महत्वपूर्ण सुधार' है जिसे चीन ने विकसित किया है। इसके अलावा, चीन के पास पहले ही बड़े युद्ध-पोत और बैलिस्टिक मिसाइल हैं। पेंटागन ने कहा, 'चीन लगातार अपनी जमीनी और परमाणु क्षमता वाले सबमरीन में सुधार कर रहा है और परमाणु क्षमता वाली हवाई बैलिस्टिक मिसाइल को विकसित करने के साथ ही परमाणु परीक्षण करने पर काम कर रहा है।' चीन हाइपरसोनिक मिसाइल डिवेलप कर रहा है जो साउंड की स्पीड से पांच गुना तेजी से रफ्तार भर सकती है। रिपोर्ट में कहा गया, 'अगस्त, 2018 में चीन ने सफलतापूर्वक जिंगकॉन्ग-2 (स्टारी स्काई-2) का परीक्षण किया जिसे सार्वजनिक तौर पर एक हाइपरसोनिक वेव-राइडर वीकल के तौर पर जाना जाता है।'


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