• संवाददाता

पतंजलि ने एफएमसीजी में दिग्गज बनने की दिशा में रुचि सोया को खरीदकर बड़ा दांव खेला


नई दिल्ली बाबा रामदेव के नेतृत्व वाली कंपनी पतंजलि आयुर्वेद ने देश में एफएमसीजी क्षेत्र का बेताज बादशाह बनने का सपना देखा था। कंपनी इस दिशा में सफलतापूर्वक कदम भी बढ़ा रही थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों में उसे वह सफलता नहीं मिल पाई, जिसकी उसे दरकार थी। हालांकि, रुचि सोया के अधिग्रहण से उसे अपना सपना साकार करने की दिशा में एक नई राह दिखी है। पतंजलि ने 4,325 करोड़ रुपये की बोली लगाकर रुचि सोया को अपने नाम कर लिया। इस अधिग्रहण से पतंजलि को सोयाबीन ऑइल सहित कई अन्य उत्पादों में अग्रणी कंपनी बनने में मदद मिलेगी। रुचि सोया के पास न्यूट्रेला, महाकोष, सनरिच, रुचि स्टार तथा रुचि गोल्ड जैसे कई टॉप ब्रैंड्स हैं। कर्ज में डूबी रुचि सोया को उसके कर्जदाता बैंकों स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक और डीबीएस बैंक ने दिवाला निपटान प्रक्रिया में खींचा था। कंपनी पर कई कर्जदाताओं के कुल 9,345 करोड़ रुपये बकाया हैं। कंपनी पर एसबीआई का सबसे अधिक 1,800 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था। अन्य प्रमुख कर्जदाताओं में सेंट्रल बैंक के 816 करोड़ रुपये, पीएनबी के 743 करोड़ रुपये और स्टैंडर्ड चैटर्ड के 608 करोड़ रुपये बकाया हैं। ईटी प्राइम की एक खबर के मुताबिक, आमदनी को 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का सपना कंपनी को अंदर से खाए जा रहा था। आगे चलकर कई और चुनौतियों के पेश आने से रामदेव को अपना लक्ष्य और कठिन लगने लगा। क्रेडिट सुईस की रिपोर्ट के मुताबिक, पतंजलि के कई उत्पादों की बिक्री में गिरावट आई है। अन्य गंभीर मसलों में- कंपनी के लिए वितरण एक बड़ी समस्या बनना, बहु्त ज्यादा विस्तार से उसकी मूल ताकत आयुर्वेद की पहचान का क्षय हुआ और पहले से एफएमसीजी क्षेत्र में कारोबार कर रही कंपनियों ने रामदेव का मुकाबला अपने आयुर्वेदिक उत्पादों से ही करना शुरू कर दिया। रामदेव का देश के एफएमसीजी क्षेत्र पर राज करने का सपना किसी से छिपा नहीं है। लेकिन पिछले साल कंपनी को तब तगड़ा झटका लगा, जब उसकी आय 10 हजार करोड़ रुपये से आगे नहीं बढ़ पाई, जबकि उसने 3-5 साल में कुल आय को 20-25 हजार करोड़ रुपये पहुंचाने का लक्ष्य तय किया था। 37.2 लाख टन क्षमता वाली रुचि सोया भारत मे सबसे बड़े ऑइल सीड एक्सट्रैक्टर में से एक है और पतंजलि को अपने समक्ष आ रही तमाम समस्याओं से निपटने के लिए यह एक मददगार औजार साबित हो सकता है। इसके पास खाद्य तेलों के लिए क्रशिंग, मिलिंग, रिफाइनिंग, पैकेजिंग के 24 प्लांट हैं। यह रामदेव की महत्वाकांक्षी योजना का एक बेहद अहम हिस्सा हो सकता है, जिसका देश के बढ़ते वेजिटेबल ऑइल मार्केट में बड़ा हिस्सा है। मौजूदा समय में अडानी विल्मर का इस बाजार में 19 फीसदी हिस्सेदारी, जबकि रुचि सोया की लगभग 14 फीसदी हिस्सेदारी है। भारत में खर्च योग्य आय बढ़ने तथा अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ने से वेजिटेबल ऑइल बिजनस तेजी से बढ़ रहा है। रेबो बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में वेजिटेबल ऑइल की खपत 2030 तक सालाना तीन फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 3.4 करोड़ टन हो जाने की उम्मीद है।


                                           KarmKasauti

                            Kanpur Uttar Pradesh

          Email: karmkasauti@gmail.com

   Copyright 2018. All Rights Reserved.