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अमर सिंह ने आजम खान को 'राक्षस' की संज्ञा दी, बोले रामपुर में आजम खान को हराना रावण के पुतला


रामपुर यूपी के रामपुर के चुनावी रण में 'गुरु' और 'चेले' के बीच जारी जुबानी जंग के बीच अब तीसरे और बेहद अहम किरदार की एंट्री होने जा रही है। समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और राज्‍यसभा सांसद अमर सिंह आज रामपुर की जंग में कदम रखने जा रहे हैं। वह रामपुर में जया प्रदा के लिए 'सारथी' की भूमिका में नजर आ सकते हैं। अमर सिंह ने कभी मित्र रहे एसपी नेता आजम खान को 'राक्षस' की संज्ञा दी है। उन्‍होंने कहा कि रामपुर में आजम खान को हराना रावण के पुतला दहन की तरह होगा। लंबे समय से बीमार चल रहे अमर सिंह ने गुरुवार शाम को एक विडियो मेसेज ट्वीट कर कहा, 'मैं शारीरिक और मानसिक रूप से अब ठीक हूं और रामपुर जा रहा हूं और वहां तब तक रहूंगा जब तक कि औपचारिक चुनाव प्रचार खत्‍म नहीं हो जाता। आजम खान की हार रावण के पुतले के दहन की तरह होगा। रामपुर के हरेक नागरिक को इस राक्षस को करारा जवाब देना चाहिए।' उन्‍होंने कहा, 'मैं मानसिक रूप से बीमार आजम खान की खोज खबर लेने और उसके लंगोट प्रेम की पूरी की पूरी तहकीकात करने तथा नारी शक्ति के प्रति उनकी क्रूरता का जवाब देने और गिरी हुई मानसिकता का इलाज करने रामपुर जा रहा हूं। मैं आ रहा हूं आजम तुमसे मिलने। जो भारत में रहता है और भारत की खाता है और पाकिस्‍तान की गाता है। भारत माता को डायन कहता है। ऐसे आजम की खबर लेना रामपुर के हर मतदाता का फर्ज है।' बता दें कि रामपुर में एसपी प्रत्याशी आजम खान और बीजेपी प्रत्याशी जया प्रदा के बीच जुबानी जंग थमने का नाम नहीं ले रही है। पिछले दिनों रामपुर की शाहबाद तहसील में आयोजित एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खान ने एक बार फिर भाषा की मर्यादा लांघते हुए विवादित बयान दे डाला। हैरान करने वाली बात यह थी कि इस दौरान मंच पर एसपी अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी मौजूद थे, लेकिन किसी ने भी आजम को टोका नहीं। सभा में मौजूद भीड़ आजम के बेशर्म बयान पर तालियां बजाती रही। जया प्रदा का नाम लिए बगैर आजम ने जनसभा में मौजूद लोगों से पूछा, 'क्या राजनीति इतनी गिर जाएगी कि 10 साल जिसने रामपुर वालों का खून पिया, जिसे उंगली पकड़कर हम रामपुर में लेकर आए, उसने हमारे ऊपर क्या-क्या इल्जाम नहीं लगाए। क्या आप उसे वोट देंगे?' आजम ने आगे कहा कि आपने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवेअर खाकी रंग का है।' इससे पहले एसपी से सांसद रहीं और इस चुनाव में बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में पहुंचीं जया प्रदा ने आजम खान पर जलील करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी वजह से ही उन्हें रामपुर छोड़कर जाना पड़ा था। जया प्रदा ने कहा था, 'आजम खान साहब, मैंने आपको भाई कहा लेकिन आपने मुझे बहन के नाम से बद्दुआ दी और जलील किया। क्या हमारे भाई इस नजर से देखते हैं कि मैं नाचने वाली हूं? इसलिए मैं रामपुर छोड़कर जाना चाहती थी।' इतना ही नहीं जया प्रदा ने रामपुर में अपनी अश्लील तस्वीरें फैलाए जाने का भी आरोप लगाया था। जया ने कहा था, 'मैंने मुलायम सिंह जी को भी बताया कि मेरी अश्लील तस्वीरें रामपुर में घुमा रहे हैं। मुझे बचाइए, लेकिन रामपुर में किसी नेता ने मुझे बचाने की कोशिश नहीं की तो मुझे रामपुर मजबूरी में छोड़ के जाना पड़ा।' दरअसल जया प्रदा और आजम खान के बीच अदावत में एक अहम किरदार अमर सिंह हैं। अमर सिंह जया प्रदा के बेहद करीबी हैं। यह अमर सिंह ही हैं जिन्‍होंने आजम खान के विरोध के बाद भी वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा को रामपुर से टिकट दिलाया और उन्‍हें जीत दिलाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। अब अमर सिंह के रामपुर पहुंचने से दोनों 'दोस्‍तों' के बीच जुबानी जंग एकबार फिर तेज हो सकती है। आजम रामपुर की सियासत के 'किंग' कहे जाते हैं और वर्ष 2004 में उन्‍होंने जया प्रदा को रामपुर की सियासत का ककहरा सिखाया था। अब अमर सिंह के समर्थन से क्‍या जया प्रदा रामपुर फतह कर पाएंगी या नहीं, यह देखना बेहद दिलचस्‍प होगा। आजादी के बाद भारत में शामिल होने वाला पहला राजघराना था, रामपुर। यहां का नूर महल आजादी के पहले से लेकर अब तक सियासत का गढ़ रहा है। आजादी से पहले यह महल स्वतंत्रता आंदोलन का केंद्र रहा। यहां से रणनीतियां बनतीं और अंग्रेजों के खिलाफ यहीं से मोर्चाबंदी होती थी। जब आजाद भारत में पहला लोकसभा चुनाव हुआ तो मौलाना अबुल कलाम आजाद ने यहां से चुनाव लड़ा और जीते थे। सच्चर कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक रामपुर में मुस्लिमों की आबादी पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा 49.14 फीसदी है। रामपुर की यह पहचान रही है कि अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद भी यह क्षेत्र दंगों से अछूता रहा। रामपुर के स्वर्णिम इतिहास में यह भी जिक्र है कि महात्मा गांधी की अस्थियां राजघाट के अलावा केवल रामपुर में संरक्षित हैं। इस बार कांग्रेस ने आजम खान की विरोधी नूर बानो को टिकट न देकर संजय कपूर को कांग्रेस उम्मीदवार बनाया है।


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