• संवाददाता,मुंबई

जेट मैनेजमेंट ने अपने बोर्ड के सामने कंपनी का संचालन पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा है


मुंबई किंगफिशर एयरलाइंस की तरह ही जेट एयरवेज के सामने भी बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। ऐसा लग रहा है कि नरेश गोयल स्थापित कंपनी जल्द ही विजय माल्या की किंगफिशर एयरलाइंस की तरह बंद होने वाली है क्योंकि जेट में हिस्सेदारी की बिक्री के प्रयासों पर पानी फिरता दिख रहा है। दरअसल, कथित तौर पर नरेश गोयल का प्रतिनिधित्व करने वाली तीन कंपनियों के समूह ने बोली प्रक्रिया से हाथ खींच लिया है। इससे पहले, एतिहाद एयरवेज और टीपीजी कैपिटल ने साफ-साफ चेतावनी दे दी थी कि अगर गोयल जेट एयरवेज से नहीं हटेंगे तो वे बोली प्रक्रिया से बाहर निकल जाएंगी। इस बीच जेट मैनेजमेंट ने अपने बोर्ड के सामने कंपनी का संचालन पूरी तरह बंद करने का प्रस्ताव रखा है क्योंकि कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों की ओर से अब फंडिंग मिलने की कोई उम्मीद नहीं बची है। फंडिंग क्राइसिस के कारण जेट एयरवेज अब महज सात जहाज ही उड़ा पा रही है क्योंकि वह रोजाना बमुश्किल इन्हीं जहाजों के तेल के खर्चे उठा पा रही है। आज बोर्ड मीटिंग में हुई बातचीत से वाकिफ एक व्यक्ति ने कहा, 'जेट अपने ग्राहकों को ठगना नहीं चाहता है और न ही उन्हें इस भ्रम में रखना चाहता है कि कंपनी अब भी संचालन में है। अब उड़ानों की बात करना मजाक है।' नरेश गोयल की जनरल सेल्स एजेंसी जेटएयर ने एक अमेरिकी कंपनी फ्यूचर ट्रेंड कैपिटल और लंदन की कंपनी ऐडि पार्टनर्स की मदद से जेट की खरीददारी में अपनी दिलचस्पी दिखाई और शुक्रवार को शाम 6:08 बजे एक्स्प्रेशन ऑफ इंट्रेस्ट (EOI) जमा किया जबकि EOI जमा करने की मियाद शुक्रवार शाम 6 बजे तक ही थी। ध्यान रहे कि जेट एयर से ही जेट एयरवेज का जन्म हुआ था। आज एसबीआई कैप्स को उचित बोली लगाने वाले का चयन करना है। एतिहाद, टीपीजी और इंडिगो कैपटिल आदि एक्सप्रेसन ऑफ इंट्रेस्ट जमा करने वालों में शामिल हैं। उम्मीद की जा रही है कि सरकारी संस्थान नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐंड इन्वेस्टमेंट फंड सीधे बोली लगाएगा। जेटएयर के एक टॉप एग्जिक्युटिव में ईटी के ईमेल का जवाब नहीं दिया। वहीं टीपीजी ने भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया, जबकि एतिहाद के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइन अफवाहों और अनुमानों पर कुछ नहीं बोलेगी। एतिहाद ने जेट एयरवेज में निवेश करने की दो शर्तें रखी हैं- कंपनी से गोयल की संपूर्ण निकासी और शेयर बाजार के उस नियम से छूट जिसके तहत किसी कंपनी में 25% शेयर खरीदने पर 20% शेयर को ओपन ऑफर पर रखने की बाध्यता है। एतिहाद के पास अभी जेट एयरवेज के 24 प्रतिशत शेयर हैं। उसका कहना है कि वह इतना ही शेयर अपने पास रखना चाहती है क्योंकि उसे अतिरिक्त हिस्सेदारी खरीदने पर ओपन ऑफर के नियम से छूट नहीं मिलने वाली। दरअसल, एतिहाद की बेरुखी इसलिए भी देखने को मिल रही है क्योंकि नरेश गोयल ने चेयरमैन और बोर्ड मेंबर का पद छोड़ने के बाद अपना 31.2 प्रतिशत शेयर बेचने का ऐलान किया था और कहा था कि वह बाकी बची हिस्सेदारी भी बेच देंगे। गोयल के पास जेट की कुल 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है। हालांकि, जब उन्होंने जेट में शेयर खरीदने में दिलचस्पी दिखाई तो एतिहाद भड़क गई। एक सीनियर बैंकर ने बताया कि पीएनबी, आईसीआईसीआई और यस बैंक जेट एयरवेज को इमरजेंसी फंड देने के हक में नहीं हैं, जबकि एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, केनरा बैंक और सिंडिकेट बैंक को इस पर ऐतराज नहीं है। गोयल के पास जेट के 51 पर्सेंट शेयर हैं। इसमें से 31 पर्सेंट शेयर उन्होंने पहले ही बैंकों के पास गिरवी रखे हुए हैं। उन्होंने अपने हिस्से के और शेयर गिरवी रखने का वादा किया है, लेकिन अभी तक उन्होंने इस पर अमल नहीं किया है। उन्होंने कुल 41.4 पर्सेंट बैंकों के पास गिरवी रखने की बात कही है। गोयल ने कहा है कि उनके 9.9 पर्सेंट शेयर गिरवी नहीं रखे जाने चाहिए। यह पता नहीं चला है कि बैंक उनसे कितने शेयर गिरवी रखवाना चाहते हैं। यह भी पता नहीं चल पाया है कि गोयल की हाल की पेशकश पर बैंकों का क्या रवैया है। जेट के पास कुल 17 प्लेन हैं। इनमें से ज्यादातर चौड़ी बॉडी वाले 777 और एयरबस ए330 हैं। बाकी के प्लेन उसने लीज पर लिए थे। वहीं, पिछले साल दिसंबर तक कंपनी के पास 124 प्लेन का बेड़ा था।


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