• संवाददाता

चुनाव आयोग को लेकर पूर्व नौकरशाहों की राय बंटी हुई दिख रही है, दो अलग-अलग ग्रुप ने राष्ट्रपति को लिख


नई दिल्ली लोकसभा चुनाव में जहां राजनीतिक दलों में आरोप-प्रत्यारोप का खेल जारी है, वहीं पूर्व नौकरशाहों की खेमेबाजी भी दिख रही है। पूर्व नौकरशाहों के एक ग्रुप ने कुछ दिन पहले राष्ट्रपति को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि जानबूझकर चुनाव आयोग को कमजोर किया जा रहा है, वहीं अब इस पत्र को काउंटर करते हुए एक दूसरा पत्र राष्ट्रपति को भेजा गया है। ये पत्र भेजने वाले भी पूर्व आईएएस, पूर्व आईपीएस, पूर्व आईएफएस और सेना के पूर्व अधिकारी हैं। इस लेटर पॉलिटिक्स में ये भी बंटे नजर आ रहे हैं। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर आर. एस. गुप्ता के नेतृत्व में पूर्व नौकरशाहों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति से मुलाकात कर उन्हें चुनाव आयोग के समर्थन में पत्र सौंपा। जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग बेहतर तरीके से काम कर रहा है और देश में कुछ लोग अपने फायदे के लिए आयोग के काम करने के तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि आयोग या सरकार जल्दबाजी में कोई ऐसा फैसला ना करें जिससे पूरे संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो। पिछले हफ्ते करीब 60 पूर्व नौकरशाहों ने राष्ट्रपति को पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है। इसमें ए -सैट लॉन्च , नमो टीवी और पीएम मोदी पर बनी बायॉपिक के लॉन्च को लेकर भी सवाल उठाए थे । दिलचस्प यह है कि अब जो पत्र राष्ट्रपति को दिया गया है उसमें न सिर्फ नमो टीवी की सफाई दी गई है बल्कि यह भी लिखा गया है कि कुछ लोग चुनाव आयोग पर कार्रवाई करने का दबाव बना रहे हैं और काफी हद तक चुनाव आयोग इस दबाव में आकर कार्रवाई भी कर रहा है। इसमें कहा गया है कि मोदी पर बनी बायॉपिक पर बैन लगाना जल्दबाजी में लिया फैसला था। साथ ही लिखा कि वही ग्रुप (जिसने पहले लेटर लिखी) मोदी पर बनी वेब सीरीज को रुकवाने की कोशिश कर रहा है। यह भी दिलचस्प है कि इस पत्र में पूर्व नौकरशाहों ने नमो टीवी पर भी सफाई दी है। इसमें लिखा है कि नमो टीवी, टीवी चैनल नहीं है इसलिए उसे लाइसेंस की जरूरत नहीं है। इसमें यह भी लिखा है कि पहले पत्र लिखने वालों ने एक सीनियर नेता के बयान पर भी सवाल उठाए और उसे बांटनेवाला कहा है जबकि चुनावी माहौल में हीट ऑफ द मूवमेंट में नेता ऐसे बयान दे देते हैं। जिस पर ठंडे दिमाग से सोचना चाहिए।


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